उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर न केवल करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी देश की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का प्रतीक है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही देश-विदेश से श्रद्धालु यहां भारी मात्रा में नकद, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य सामग्रियां दान के रूप में अर्पित कर रहे हैं।
हाल ही में इस पावन स्थल के चढ़ावे और चंदे में कथित अनियमितता तथा हेराफेरी की खबरों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। मामले की संवेदनशीलता और जन-आस्था को ठेस न पहुंचे इस उद्देश्य से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए एक उच्च स्तरीय 3-सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। एसआईटी की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है और उसने दस्तावेजों को खंगालने तथा साक्ष्यों को जुटाने की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू कर दी है।
चंदा विवाद की पृष्ठभूमि- कैसे शुरू हुआ मामला?
राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे की गिनती दैनिक आधार पर एक बेहद सुरक्षित कमरे में की जाती है जो पूरी तरह से हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहता है। इसके बावजूद जून 2026 के शुरुआती सप्ताह में सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यह बात सामने आई कि मंदिर के दानपात्रों से भारी मात्रा में नगदी और चढ़ावे की चोरी या गबन किया गया है।
इस विवाद को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तब और गति मिली जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अयोध्या के पूर्व विधायक विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से लगभग 7 से 7.5 करोड़ रुपये गायब हैं। पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी (Chief Accounts Officer) महिपाल सिंह द्वारा भी दान राशि की गिनती में वित्तीय विसंगतियों का आरोप लगाया गया। इन गंभीर आरोपों के बाद देशभर के रामभक्तों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य सदस्यों ने शुरुआत में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और इन्हें महज अफवाह बताया। परंतु जनता के विश्वास को बनाए रखने और दूध का दूध व पानी का पानी करने के लिए ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की लिखित सिफारिश की।
उत्तर प्रदेश सरकार का त्वरित एक्शन और एसआईटी का गठन
ट्रस्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश शासन ने तुरंत एक 3-सदस्यीय ‘विशेष जांच टीम’ (SIT) का गठन किया। इस समिति में प्रशासनिक, कानून-व्यवस्था और वित्तीय मामलों के शीर्ष विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि जांच के सभी पहलुओं को गहराई से परखा जा सके।
एसआईटी के प्रमुख सदस्य
- विजय विश्वास पंत (IAS)- लखनऊ के मंडलायुक्त (2004 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी) जो इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
- किरण एस (IPS)- पुलिस महानिरीक्षक (IG Range, लखनऊ) जो कानून-व्यवस्था और आपराधिक कोण से जांच की कमान संभाल रहे हैं।
- नील रतन- विशेष सचिव (वित्त विभाग) जो ऑडिट, वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और खातों के मिलान से जुड़ी तकनीकी जांच की देखरेख कर रहे हैं।
सरकार ने इस समिति को अत्यंत सख्त समय-सीमा दी है। एसआईटी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर और अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर शासन को सौंपनी है।
अयोध्या में एसआईटी की कार्रवाई और जांच के प्रमुख बिंदु
गठन के तुरंत बाद एसआईटी की टीम ने अयोध्या का रुख किया और वहां पहुंचकर जांच का पहला चरण शुरू कर दिया है। टीम मंदिर प्रशासन, स्थानीय पुलिस और बैंक अधिकारियों के समन्वय से काम कर रही है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और जिला व मंदिर प्रशासन एसआईटी को पूर्ण सहयोग दे रहा है।
एसआईटी की जांच मुख्यतः निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है
- रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की स्क्रूटनी- मंदिर में दान संकलन, कैश हैंडलिंग, स्टोरेज और बैंक में जमा करने से संबंधित सभी बही-खातों (लेजर बुक) की बारीकी से जांच की जा रही है।
- सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण- जिस सुरक्षित कक्ष में हर दिन पैसों की गिनती होती है वहां के पिछले कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि क्या गिनती के दौरान कोई संदिग्ध गतिविधि हुई थी।
- पूछताछ का दायरा- मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एसआईटी ने अब तक पैसे गिनने वाले 11 कर्मचारियों से गहन पूछताछ की है। इसके अतिरिक्त ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक कर्मियों, पुजारियों और मंदिर प्रशासन से जुड़े पूर्व व वर्तमान कर्मचारियों से भी सवाल-जवाब किए जा रहे हैं।
- इंटरनल कंट्रोल मैकेनिज्म की समीक्षा- टीम इस बात का भी मूल्यांकन कर रही है कि ट्रस्ट के भीतर चंदे के प्रबंधन की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली कितनी मजबूत है और क्या इसमें कोई तकनीकी या मानवीय खामी (लूपहोल) है जिसका फायदा उठाया गया हो।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और मामला सुप्रीम कोर्ट में
राम मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर देश में सियासत भी गरमा गई है। विपक्ष जहां इस कथित घोटाले को लेकर सरकार और ट्रस्ट पर पारदर्शिता के अभाव का आरोप लगा रहा है वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि ट्रस्ट द्वारा खुद आगे बढ़कर जांच की मांग करना यह साबित करता है कि वे पूरी तरह से बेदाग हैं और सच सामने लाना चाहते हैं। इसी बीच राज्य सरकार की इस एसआईटी जांच को नाकाफी बताते हुए कुछ पक्षों द्वारा यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक भी ले जाया गया है जिसमें कोर्ट की निगरानी में सीबीआई (CBI) जांच कराने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
अयोध्या राम मंदिर करोड़ों लोगों की अटूट आस्था और समर्पण का जीवंत केंद्र है। ऐसे पावन स्थल पर चंदे और चढ़ावे की कथित गड़बड़ी का सामने आना अत्यंत चिंताजनक है क्योंकि यह सीधे तौर पर जनता के विश्वास से जुड़ा विषय है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 3-सदस्यीय एसआईटी का गठन और ट्रस्ट द्वारा त्वरित रूप से जांच के लिए आगे आना एक अत्यंत सराहनीय और पारदर्शी कदम है। 15 दिनों के भीतर आने वाली एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट से इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर हो जाएगी। इस जांच का मुख्य उद्देश्य न केवल सच को सामने लाना है बल्कि भविष्य के लिए एक ऐसी अभेद्य और पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था स्थापित करना है जिससे सनातन धर्म के इस सर्वोच्च केंद्र की शुचिता, मर्यादा और गौरव पर कभी कोई आंच न आ सके।







