ईरान में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी का नाम आज ईरान में मानवाधिकारों और महिला स्वतंत्रता के लिए चल रहे संघर्ष का पर्याय बन चुका है। हाल ही में एक बार फिर उनकी गिरफ्तारी ने दुनिया का ध्यान खींचा है जो यह दर्शाता है कि सत्ता और असहमति के बीच टकराव कितना गहरा है। यह गिरफ्तारी महज एक कानूनी कार्रवाई नहीं है बल्कि उस अदम्य भावना का प्रतीक है जो जेल की सलाखों के पीछे भी झुकने को भी तैयार नहीं है।

मानवाधिकार वकील की शोकसभा और साहस का प्रदर्शन
मोहम्मदी को एक प्रतिष्ठित मानवाधिकार वकील और अपने साथी कार्यकर्ता की शोकसभा में शामिल होने के बाद हिरासत में लिया गया। इस घटना ने उनकी अटूट प्रतिबद्धता को उजागर किया। गिरफ्तारी का तात्कालिक कारण यह बताया गया कि उन्होंने शोकसभा में हिजाब के बिना भीड़ को संबोधित किया। जो ईरान की इस्लामी गणराज्य व्यवस्था में महिलाओं के लिए अनिवार्य है हिजाब का यह मतलब है कि सार्वजनिक रूप से सिर ढकना ऐसा ना करना कानून का उल्लंघन करना माना जाता है विशेष रूप से इसे एक सार्वजनिक मंच से सत्ता को सीधी चुनौती माना जाता है।
यह कृत्य केवल एक ड्रेस कोड का उल्लंघन नहीं था यह महिला जीवन स्वतंत्रता आंदोलन के मूल नारे का एक सशक्त दृश्य प्रतिनिधित्व था। उनके द्वारा हिजाब उतारना उनके लिए दमनकारी कानूनों और पितृसत्तात्मक नियंत्रण को अस्वीकार करने का एक सार्वजनिक घोषणापत्र बन गया है। शोकसभा का मंच जहां दुख और न्याय की मांग का स्थान था वहीं मोहम्मदी ने उसे प्रतिरोध का एक मंच बना दिया|
जेल से शांति का आह्वान
2023 में जब नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तब वह पहले से ही तेहरान की एल्विन जेल में कैद थीं। नोबेल समिति ने उन्हें ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए उनकी लड़ाई हेतु सम्मानित किया था यह पुरस्कार उनकी व्यक्तिगत जीत से कहीं अधिक ईरान की उन बहादुर महिलाओं के सामूहिक संघर्ष की वैश्विक पहचान थी जो अपनी जान जोखिम में डालकर भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं।
मोहम्मदी की कहानी दशकों के संघर्ष का सार है। वह एक वैज्ञानिक एक पत्रकार और एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी भूमिकाओं ईरान मै निभा रही है लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा जेलों और अदालती संघर्षों में बीता है। अब तक 13 बार गिरफ्तार हो चुकी है जिसमें से उन्हें पांच बार दोषी ठहराया जा चुका है उन्हें अब तक कुल 31 साल की जेल की सज़ा और 154 कोड़ों की सज़ा सुनाई जा चुकी है यह दर्शाता है कि ईरान की सरकार ने उनकी आवाज़ को दबाने के लिए हर संभव प्रयास किया है।
अपनी सज़ाओं के बावजूद भी वह जेल के भीतर से काम कर रही है उन्होंने कैदियों विशेषकर महिला कैदियों के अधिकारों के हनन पर लेख लिखे भूख हड़तालें कीं और जेल के अंदर की भयानक परिस्थितियों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया। उनके लिए जेल की दीवारें प्रतिरोध के मैदान में बदल गईं है और हर गिरफ्तारी उनकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी| महिला जीवन स्वतंत्रता आंदोलन की मशाल नरगिस मोहम्मदी का संघर्ष ईरान में 2022 में शुरू हुए महिला जीवन स्वतंत्रता (Woman Life Freedom) आंदोलन से गहरा जुड़ा हुआ है। महसा अमिनी की दुखद मौत के बाद इस आंदोलन ने ईरान के धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक विद्रोह का रूप ले लिया था यह आंदोलन केवल हिजाब के बारे में नहीं है बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता की एक मांग है जो महिलाओं को पुरुषों के समान नागरिक मानती है।
मोहम्मदी इस आंदोलन की एक प्रमुख वैचारिक नेता हैं भले ही वह जेल में हैं। उनका हर सार्वजनिक कृत्य चाहे वह शोकसभा में हिजाब के बिना उपस्थित होना हो या जेल से पत्र लिखना इस आंदोलन को ऊर्जा देता हो उनकी हालिया गिरफ्तारी इस बात की याद दिलाती है कि प्रतिरोध की कीमत कितनी ऊंची है लेकिन साथ ही यह भी बतलाती है कि प्रतिरोध जारी रहेगा|
Also read – तुर्किये के अन्न भंडार कोन्या मैदान पर मंडराता सिंकहोल का संकट एक पर्यावरणीय चेतावनी
वैश्विक प्रतिक्रिया और आगे की राह
मोहम्मदी की प्रत्येक गिरफ्तारी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया होती है। संयुक्त राष्ट्र संगठन और दुनिया भर के नेता ईरान सरकार से उनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हैं। यह वैश्विक दबाव महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ईरान के नेतृत्व पर एक नैतिक और राजनीतिक बोझ डालता है।
हालांकि ईरान सरकार अक्सर इन मांगों को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताकर खारिज कर देती है। उनकी यह नवीनतम गिरफ्तारी दर्शाती है कि सत्ता व्यवस्था मानवाधिकारों की अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूदभी अपनी दमनकारी नीतियों को बदलने के लिए तैयार नहीं है।
गंभीर चिंता उनके स्वास्थ्य को लेकर
मोहम्मदी को दोबारा जेल भेजना पर डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वह पहले से ही दिल की बीमारी बड़ी सर्जरी और हड्डी में गांठ देसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं अब उन्हें दोबारा जेल भेजना उनकी जान के लिए खतर हो सकता है।
स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद भी नरगिस मोहम्मदी प्रदर्शनों किया उन्होंने तेहरान की एविन जेल के बाहर भी प्रदर्शन किया जहां वे पहले बंद भी बंद हो चुकी है






