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तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए की ऐतिहासिक जीत

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए की ऐतिहासिक जीत
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 15, 2025 10:35 पूर्वाह्न
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तिरुवनंतपुरम। केरल स्थानीय निकाय चुनावों में बदले सियासी समीकरण, प्रधानमंत्री मोदी ने जताई खुशी

केरल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। दशकों से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस-नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के प्रभाव वाले इस निगम में एनडीए की सफलता को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। 

तिरुवनंतपुरम

तिरुवनंतपुरम नगर निगम: आंकड़ों में जीत 

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में कुल 101 वार्ड हैं। चुनाव परिणामों के अनुसार— 

  • एनडीए ने सबसे अधिक 50 वार्डों में जीत हासिल कर बहुमत के करीब/बहुमत का आंकड़ा छू लिया।
  • एलडीएफ  29 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
  • यूडीएफ को अपेक्षाकृत कम 19 सीटों से संतोष करना पड़ा। 

यह परिणाम इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि इससे पहले निगम पर लंबे समय तक वाम मोर्चे का दबदबा रहा है। शहरी मतदाताओं का यह रुझान स्थानीय मुद्दों और वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व की स्वीकार्यता को दर्शाता है। 

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का ट्वीट 

तिरुवनंतपुरम में एनडीए की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया दी।

प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में केरल की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत सुशासन, विकास और जनभागीदारी के संदेश को मजबूत करती है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और एनडीए सहयोगियों की मेहनत की सराहना की और भरोसा जताया कि स्थानीय निकायों में एनडीए जनहित में काम करेगा।

प्रधानमंत्री का यह ट्वीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केरल जैसे राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का संकेत देता है।

पूरे केरल की तस्वीर 

राज्य भर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो— 

  • यूडीएफ ने पंचायत और ब्लॉक स्तर पर मजबूत प्रदर्शन किया और राज्य में कुल मिलाकर बढ़त बनाई। 
  • एलडीएफ को कई परंपरागत गढ़ों में नुकसान उठाना पड़ा। 
  • एनडीए ने सीमित क्षेत्रों में ही सही, लेकिन रणनीतिक और प्रतीकात्मक जीत दर्ज की, जिसमें तिरुवनंतपुरम नगर निगम सबसे बड़ा उदाहरण है। 
  • केरल में कुल 6 नगर निगम, 14 जिला पंचायतें, 152 ब्लॉक पंचायतें और 941 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें यूडीएफ का पलड़ा भारी रहा, लेकिन राजधानी निगम में एनडीए की जीत ने पूरे चुनाव परिणामों की दिशा पर खास ध्यान खींचा है। 

किन मुद्दों ने बदला समीकरण 

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तिरुवनंतपुरम में एनडीए की जीत के पीछे कई स्थानीय मुद्दे अहम रहे— 

  • कचरा प्रबंधन और स्वच्छता
  • पेयजल आपूर्ति
  • सड़कों और बुनियादी ढांचे की स्थिति
  • शहरी रोजगार और स्मार्ट सिटी से जुड़े वादे 

एनडीए ने इन मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव प्रचार किया, जिसका असर शहरी मतदाताओं पर साफ दिखाई दिया।

राजनीतिक मायने 

यह जीत केवल एक नगर निगम तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसे 2026 के केरल विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, एलडीएफ और यूडीएफ के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का संकेत है, खासकर शहरी क्षेत्रों में बदलते मतदाता रुझानों को लेकर। 

केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में भले ही राज्य स्तर पर यूडीएफ आगे रहा हो, लेकिन तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए की जीत ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति अब नए मोड़ पर खड़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट ने इस जीत को राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक पहचान दिला दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए इस सफलता को किस तरह आगे की राजनीति में भुनाता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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