क्रिकेट दुनिया में एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा (I.S. Bindra) का निधन हो गया है, जिससे न केवल भारतीय क्रिकेट बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में भी गहरा शोक छा गया है। बिंद्रा 84 वर्ष के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। उन्होंने रविवार, 25 जनवरी 2026 की शाम अपनी अंतिम सांस दिल्ली में अपने निवास पर ली। उनकी मौत से खेल के सभी स्तरों पर संवेदनाओं का सिलसिला जारी है और उनके प्रशंसक एवं सहयोगी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
आई.एस. बिंद्रा: जीवन और करियर
इंद्रजीत सिंह बिंद्रा भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली प्रशासकों में से एक माने जाते रहे हैं। उन्होंने बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में 1993 से 1996 तक सेवा की और इसके अलावा पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) के अध्यक्ष के रूप में 1978 से 2014 तक तीन दशकों से भी अधिक समय तक नेतृत्व किया।
बिंद्रा एक आईएएस अधिकारी के रूप में अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत के बाद क्रिकेट प्रशासन में आए, जहां उन्होंने न केवल खेल के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया बल्कि भारतीय क्रिकेट को व्यवस्थित और व्यावसायिक रूप से एक नई दिशा दी। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट ने कई बड़े बदलाव देखे और खेल का व्यावसायिकरण हुआ, जिससे बीसीसीआई आज दुनिया का सबसे समृद्ध क्रिकेट बोर्ड बन सका।
भारतीय क्रिकेट में योगदान
बिंद्रा को भारतीय क्रिकेट में आधुनिकरण और ग्लोबल स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने 1987 के वर्ल्ड कप को भारत में आयोजन कराने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई — यह पहला मौका था जब दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट इवेंट इंग्लैंड के बाहर आयोजित हुआ था। इस प्रयास में उन्होंने अपने साथी प्रशासक जगमोहन डालमिया और बीसीसीआई के अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया।
उनके इन प्रयासों ने भारतीय क्रिकेट को एक व्यावसायिक रूप से सफल और वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति के रूप में स्थापित किया, जिससे भारतीय क्रिकेट के प्रसार, प्रसारण तथा विपणन को नई ऊँचाइयाँ मिलीं। बिंद्रा ने 1990 के दशक में दूरदर्शन के क्रिकेट प्रसारण अधिकारों के अलावा प्राइवेट ब्रॉडकास्टर्स को भी मौका देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिससे भारतीय टीवी प्रसारण बाजार में ESPN, TWI जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स की एंट्री हुई और क्रिकेट के प्रसार को गति मिली।
इसके अलावा बिंद्रा ने मोहाली क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण तथा उसके विकास में भी मार्गदर्शक भूमिका निभाई। इस कारण 2015 में इस स्टेडियम का नाम बदलकर ‘आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम’ कर दिया गया, जो उनके योगदान के प्रतीक के रूप में पहचाना जाता है।
बीसीसीआई और अंतरराष्ट्रीय भूमिका
बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के बाद भी बिंद्रा ने क्रिकेट प्रशासन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। 2014 में उन्होंने सक्रिय प्रशासनिक भूमिका से संन्यास ले लिया, पर इसके पूर्व वे आईसीसी (ICC) में प्रधान सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के विकास में योगदान दिया।
उनकी प्रशासनिक शैली में पारदर्शिता, अनुशासन और व्यावसायिक दृष्टिकोण प्रमुख थे, जो भारतीय क्रिकेट को व्यवस्थित रूप से एक बड़े व्यवसाय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित हुए।
जय शाह ने जताया शोक और श्रद्धांजलि
भारतीय क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् के वर्तमान चेयरमैन जय शाह ने बिंद्रा के निधन पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ पर लिखा:
“Deepest condolences on the passing of Mr. I S Bindra, former BCCI president and a stalwart of Indian cricket administration. May his legacy inspire future generations. Om Shanti.”
जय शाह ने बिंद्रा को क्रिकेट प्रशासन का एक महान स्तंभ बताया और कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। यह श्रद्धांजलि न केवल उनके प्रशंसकों, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, जिसने भारतीय क्रिकेट को देखा और उसके विकास का हिस्सा रहा।
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क्रिकेट जगत की प्रतिक्रिया और शोक
बिंद्रा के निधन की खबर सुनते ही क्रिकेट जगत में शोक की लहर फैल गई है। न केवल भारतीय क्रिकेट के उच्च अधिकारी बल्कि विदेशी क्रिकेट प्रशासक, खिलाड़ी और प्रशंसक भी उनके योगदान को याद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर तमाम खेल प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को सराहा।
उनकी मौत से बीसीसीआई, PCA और आईसीसी सहित कई संगठनों ने शोक व्यक्त किया है। कहा जा रहा है कि बिंद्रा का अंतिम संस्कार सोमवार को नई दिल्ली के लोधी श्मशान घाट में किया जाएगा, जहाँ परिवार, मित्रों और उनके प्रशंसकों की उपस्थिति में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।







