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तिब्बत में आया भूकंप केंद्र धऱती के 25 किलोमीटर नीचे तीव्रता 4.5 मापी गई

तिब्बत में आया भूकंप केंद्र धऱती के 25 किलोमीटर नीचे तीव्रता 4.5 मापी गई
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 6, 2026 8:14 अपराह्न
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तिब्बत की धरती एक बार फिर भूकंप के झटकों से कांप उठी है। 6 फरवरी 2026 की सुबह तड़के आए इस भूकंप ने स्थानीय निवासियों में दहशत पैदा कर दी। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है इसलिए यहाँ आने वाला हर छोटा-बड़ा झटका वैज्ञानिकों और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

तिब्बत भूकंप (6 फरवरी 2026) –  ताज़ा अपडेट और विवरण

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार तिब्बत में आए इस भूकंप की मुख्य जानकारी निम्नलिखित है-

  • समय –  शुक्रवार 6 फरवरी 2026 भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 02:30 बजे।
  • तीव्रता – रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई।
  • केंद्र (Epicenter) – अक्षांश 33.27 N और देशांतर 83.39 E तिब्बत का आंतरिक क्षेत्र।
  • गहराई – जमीन से 25 किलोमीटर नीचे।

हताहत और नुकसान की वर्तमान स्थिति

4.5 तीव्रता के भूकंप को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है। 25 किमी की गहराई इसे एक उथला भूकंप (Shallow Earthquake) बनाती है। उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में सतह पर अधिक कंपन पैदा करते हैं।

  • हताहत –  अभी तक मिली प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। चूंकि केंद्र अक्सर कम आबादी वाले पहाड़ी इलाकों में होता है इसलिए मानवीय नुकसान की संभावना कम रहती है।
  • नुकसान –  स्थानीय बुनियादी ढांचे जैसे कच्चे मकानों या पुरानी इमारतों में मामूली दरारें आने की खबरें आ सकती हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन और आपदा राहत टीमें दूरदराज के गांवों से डेटा एकत्र कर रही हैं।

तिब्बत में भूकंप क्यों आते हैं? (वैज्ञानिक कारण)

तिब्बत को दुनिया की छत कहा जाता है लेकिन यह छत बहुत ही अस्थिर नींव पर टिकी है। यहाँ भूकंप आने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं|

टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव (Tectonic Collision)-लगभग 5 करोड़ साल पहले भारतीय टेक्टोनिक प्लेट (Indian Plate) उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate) से टकराई थी। यह टकराव आज भी जारी है। भारतीय प्लेट प्रति वर्ष लगभग 40-50 मिलीमीटर की दर से उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है।

दबाव का संचय और विमोचन-जब दो विशाल प्लेटें आपस में टकराती हैं तो उनके किनारों पर भारी मात्रा में दबाव (Stress) जमा हो जाता है। जब चट्टानें इस दबाव को और अधिक सहन नहीं कर पातीं तो वे अचानक टूट जाती हैं या खिसक जाती हैं। इसी ऊर्जा के अचानक निकलने से भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं।

फॉल्ट लाइन्स (Fault Lines)-तिब्बत का पठार कई बड़ी फॉल्ट लाइन्स (दरारों) से घिरा हुआ है। यहाँ मुख्य रूप से स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट्स पाए जाते हैं। इनमें चट्टानें क्षैतिज रूप से एक-दूसरे के विपरीत खिसकती हैं जिससे बड़े भूकंप आते हैं।

पठार का विस्तार (Extensional Tectonics)-आश्चर्यजनक रूप से जबकि भारत उत्तर की ओर धक्का दे रहा है तिब्बत का मध्य और दक्षिणी हिस्सा पूर्व की ओर फैल रहा है। इस खिंचाव के कारण उत्तर-दक्षिण दिशा में दरारें (Grabens) बन जाती हैं जो छोटे और मध्यम स्तर के भूकंपों का कारण बनती हैं।

तिब्बत में आए प्रमुख ऐतिहासिक भूकंपों का विवरण

तिब्बत और हिमालयी क्षेत्र का इतिहास विनाशकारी भूकंपों से भरा रहा है। यहाँ कुछ सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण दिया गया है

वर्ष स्थान/नाम तीव्रता (Mw)प्रभाव और विवरण 
1950असम-तिब्बत भूकंप8.6यह इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक था। इसने ब्रह्मपुत्र घाटी और तिब्बत में भारी तबाही मचाई थी। 
1920हाइयुआन (Gansu) 8.3हालांकि यह चीन के सीमावर्ती क्षेत्र में था लेकिन इसका प्रभाव तिब्बती पठार तक महसूस किया गया।
2010 युशू (Yushu) भूकंप6.9इसमें लगभग 2,700 लोग मारे गए थे और युशू शहर का 90% हिस्सा तबाह हो गया था। 
2015टिंगरी (Tingri) 7.1पिछले वर्ष जनवरी में आए इस भूकंप ने सैकड़ों घरों को नष्ट कर दिया था और भारी संख्या में आफ्टशॉक्स (Aftershocks) आए थे। 

तिब्बत के भूकंपों की विशिष्टता –  गहराई और प्रभाव

तिब्बत में भूकंपों को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है

उथले भूकंप (0-70 किमी) –  ये सबसे आम हैं और सतह पर सबसे अधिक तबाही मचाते हैं। 6 फरवरी का भूकंप इसी श्रेणी का है।

गहरे भूकंप (70 किमी से अधिक) –  हाल के शोधों से पता चला है कि तिब्बत के नीचे भारतीय प्लेट के टूटने के कारण यहाँ बहुत गहराई में भी भूकंप आते हैं जो वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है।

भविष्य की चेतावनी और जोखिम

भूवैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी बेल्ट और तिब्बती पठार में एक मेगा-भूकंप (Magnitude 8.0+) आने की प्रबल संभावना हमेशा बनी रहती है। इसका कारण यह है कि कई क्षेत्रों में लंबे समय से संचित तनाव (Elastic Strain) अभी तक मुक्त नहीं हुआ है।

सुरक्षा के उपाय

  • भूकंपरोधी निर्माण – तिब्बत जैसे क्षेत्रों में पारंपरिक मिट्टी के घरों के बजाय भूकंपरोधी तकनीक का उपयोग अनिवार्य है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली –  चीन और भारत दोनों इस क्षेत्र में सेंसर्स का जाल बिछा रहे हैं ताकि भूकंप आने से कुछ सेकंड पहले अलर्ट जारी किया जा सके।

तिब्बत में 4.5 तीव्रता का यह भूकंप एक सामान्य भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा है जो हमें याद दिलाता है कि हमारे पैरों के नीचे की जमीन लगातार गतिशील है। हालांकि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन टेक्टोनिक प्लेटों की यह हलचल भविष्य के बड़े खतरों की ओर संकेत करती है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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