मुंबई की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में दशकों से चले आ रहे एक ही परिवार और दल के वर्चस्व को तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना पहला महापौर बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। भारी मंथन और लंबी चर्चाओं के बाद महायुति गठबंधन ने रितु तावड़े को महापौर और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के संजय शंकर घाड़ी को उप महापौर पद का उम्मीदवार घोषित किया है।
मुंबई महानगर पालिका चुनाव 2026 – एक नज़र में
मुंबई के स्थानीय निकाय चुनाव 15 जनवरी 2026 को आयोजित किए गए थे। 227 सीटों वाली इस महापालिका के नतीजे ऐतिहासिक रहे, क्योंकि लगभग 25-30 वर्षों के बाद शिवसेना (अविभाजित या UBT) के हाथ से सत्ता फिसल गई।
सीटों का गणित (BMC Result 2026)
चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया था कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है। मुख्य दलों की राजनीतिक दल व जीती गई सीटें स्थिति इस प्रकार रही|
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) – 89
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे) – 29
- शिवसेना (UBT – उद्धव ठाकरे) – 65
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – 24
- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) – 06
- अन्य (NCP, SP, निर्दलीय आदि) – 14
बहुमत का आंकड़ा: 114
महायुति का कुल योग (BJP + शिंदे सेना): 118 (जो कि बहुमत के 114 के आंकड़े से अधिक है)
जानिए भाजपा का क्या है कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के पीछे का मास्टर प्लान
रितु तावड़े- भाजपा की ओर से पहली महापौर
मुंबई के इतिहास में भाजपा का कोई पूर्णकालिक महापौर पहले कभी नहीं रहा (1982-83 में प्रभाकर पाई को छोड़ दें, तो शिवसेना का दबदबा ही रहा है)। रितु तावड़े का चयन भाजपा के लिए एक रणनीतिक और ऐतिहासिक कदम है।
रितु तावड़े का राजनीतिक सफर
- अनुभव- रितु तावड़े घाटकोपर (वार्ड नंबर 132) से लगातार तीसरी बार पार्षद (Corporator) चुनी गई हैं।
- शिक्षा और प्रशासनिक पकड़ – वह बीएमसी की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक ‘शिक्षा समिति’ की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें निगम की कार्यप्रणाली की गहरी समझ है।
- महिला चेहरा- इस बार मुंबई महापौर का पद ‘सामान्य श्रेणी (महिला)’ के लिए आरक्षित था, जिसके लिए रितु तावड़े सबसे अनुभवी और उपयुक्त चेहरा साबित हुईं।
- लोकप्रियता- मराठा समुदाय से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने गुजराती और हिंदी भाषी बहुल क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।
संजय शंकर घाड़ी – शिंदे गुट के उप महापौर
महायुति में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए उप महापौर का पद एकनाथ शिंदे की शिवसेना को दिया गया है। संजय शंकर घाड़ी को इस पद के लिए चुना गया है।
- पृष्ठभूमि – संजय घाड़ी दहिसर क्षेत्र से एक अनुभवी नेता हैं। वह पहले उद्धव ठाकरे गुट के साथ थे, लेकिन बाद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए।
- कार्यकाल का समझौता- शिंदे गुट में आंतरिक असंतोष न हो, इसलिए चर्चा है कि उप महापौर का कार्यकाल सवा-सवा साल (1.25 वर्ष) के लिए बांटा जा सकता है, ताकि पार्टी के अन्य वरिष्ठ पार्षदों को भी मौका मिले।
सहमति कैसे बनी? (राजनीतिक मंथन)
चुनाव के नतीजे 17-18 जनवरी तक साफ हो गए थे, लेकिन महापौर के नाम पर मुहर लगने में लगभग 20 दिन का समय लगा। इस देरी के पीछे कई कारण थे|
- शक्ति प्रदर्शन- भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, इसलिए उसने महापौर पद पर अपना दावा मजबूती से ठोका।
- शिंदे गुट की मांग- एकनाथ शिंदे की पार्टी चाहती थी कि चूंकि वे राज्य में मुख्यमंत्री हैं, इसलिए मुंबई में भी उनका उचित सम्मान हो। अंततः ‘उप महापौर’ और कुछ महत्वपूर्ण वैधानिक समितियों (जैसे स्थायी समिति) के पदों पर समझौते के बाद बात बनी।
- आरक्षण का पेंच – 22 जनवरी को हुए लॉटरी सिस्टम में जब महापौर पद ‘महिला’ के लिए आरक्षित हुआ, तो भाजपा ने रितु तावड़े और शीतल गंभीर देसाई जैसे नामों पर गंभीरता से विचार किया।
ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि “पहली बार भाजपा का मेयर बनेगा”?
तकनीकी रूप से 1982-83 में भाजपा के प्रभाकर पाई महापौर रहे थे, लेकिन वह गठबंधन राजनीति का एक अलग दौर था। पिछले तीन दशकों (1995 से अब तक) से बीएमसी पर केवल ‘शिवसेना’ का कब्जा रहा है।
- स्वतंत्र वर्चस्व- यह पहली बार है जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अपने दम पर गठबंधन का नेतृत्व करते हुए ‘मेयर’ की कुर्सी हासिल कर रही है।
- ठाकरे परिवार का गढ़ ढहना- मातोश्री और उद्धव ठाकरे के गढ़ (मुंबई) में भाजपा का मेयर बैठना महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े शक्ति परिवर्तन का संकेत है।
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आगे क्या होगा?
महापौर और उप महापौर के चुनाव के लिए 11 फरवरी 2026 की तारीख तय की गई है।
रितु तावड़े और संजय घाड़ी अपना नामांकन दाखिल करेंगे। चूंकि महायुति के पास 118 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत है और विपक्षी (MVA) ने अभी तक किसी साझा उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, इसलिए रितु तावड़े का चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
मुंबई नगर निगम में भाजपा का महापौर बनना केवल एक पद की प्राप्ति नहीं है, बल्कि यह 2029 के विधानसभा चुनावों के लिए भी एक बड़ी बिसात है। रितु तावड़े के सामने अब एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका के बजट (करीब ₹50,000 करोड़ से अधिक) और मुंबई की ढांचागत समस्याओं को सुलझाने की बड़ी चुनौती होगी।







