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15 मार्च 2026 पापमोचनी एकादशी और मीना संक्रांति  मनाई जाएगी 

15 मार्च 2026 पापमोचनी एकादशी और मीना संक्रांति  मनाई जाएगी 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 7, 2026 5:38 अपराह्न
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15 मार्च 2026 का दिन आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन पापमोचनी एकादशी और मीन संक्रांति का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जहाँ एकादशी पापों के क्षय और मानसिक शुद्धि का पर्व है वहीं मीन संक्रांति सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रतीक है।

पापमोचनी एकादशी –  अर्थ और महत्व

पापमोचनी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है पाप + मोचनी मुक्त करने वाली यह वह तिथि है जो मनुष्य को जाने-अनजाने में किए गए पापों के बंधन से मुक्त करती है।

पौराणिक कथा और पृष्ठभूमि

भविष्योत्तर पुराण के अनुसार इस एकादशी की महिमा भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। कथा के अनुसार च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि घोर तपस्या में लीन थे। उनकी तपस्या भंग करने के लिए इंद्र ने मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा। मेधावी ऋषि अप्सरा के मोहपाश में बंध गए और कई वर्षों तक तपस्या से विमुख रहे।

जब उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ तो उन्होंने क्रोध में आकर मंजुघोषा को पिशाचिनी होने का श्राप दे दिया। बाद में पश्चाताप होने पर ऋषि ने अपने पिता च्यवन से मुक्ति का मार्ग पूछा। च्यवन ऋषि ने उन्हें पापमोचनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से न केवल मंजुघोषा पिशाच योनि से मुक्त हुई बल्कि मेधावी ऋषि के भी सभी पाप नष्ट हो गए और उनकी तपस्या का तेज वापस लौट आया।

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क्या करें (Do’s)

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान – सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • संकल्प –  भगवान विष्णु (चतुर्भुज रूप) के समक्ष हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • जागरण –  संभव हो तो रात्रि में सोएं नहीं  बल्कि भजन-कीर्तन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • दान – ब्राह्मणों और निर्धनों को अन्न, वस्त्र और तिल का दान करें।
  • सात्विकता – पूरे दिन मन में शांत और परोपकारी विचार रखें।

क्या न करें (Don’ts)

  • अन्न का त्याग –  एकादशी के दिन चावल (अक्षत) का सेवन वर्जित है। मान्यता है कि इस दिन चावल में अशुद्धियों का वास होता है।
  • क्रोध और निंदा – किसी की बुराई न करें और न ही अपशब्द बोलें।
  • तुलसी दल न तोड़ें – एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए; इन्हें एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें।
  • नशा और तामसिक भोजन –  लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा से पूर्णतः दूर रहें।

मीन संक्रांति –  आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

जब सूर्य कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे मीन संक्रांति कहा जाता है। यह सौर वर्ष का अंतिम महीना होता है।

खरमास का प्रारंभ

मीन संक्रांति के साथ ही खरमास या मलूमास प्रारंभ हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य गुरु की राशियों धनु या मीन में होते हैं तो उनका तेज कुछ कम हो जाता है। इस कारण इस अवधि में मांगलिक कार्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश  वर्जित माने जाते हैं।

महत्व

  • पितृ तर्पण – इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • परिवर्तन का प्रतीक –  यह ऋतु परिवर्तन का भी सूचक है जो शीत ऋतु की विदाई और ग्रीष्म के आगमन की आहट देता है।

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15 मार्च 2026 का विशेष संयोग

2026 में 15 मार्च को एकादशी और संक्रांति का एक साथ होना दुग्ध-शर्करा योग के समान है। एकादशी जहां मन को शुद्ध करती है वहीं संक्रांति ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह को बदलती है।

इस दिन की दिनचर्या (शेड्यूल)

समय गतिविधि 
प्रात सुबह5-00 – 6-30  – स्नान और सूर्य को अर्घ्य (मीन संक्रांति निमित्त) 
प्रात सुबह8-00 – 10-00  –  भगवान विष्णु की षोडशोपचार पूजा और एकादशी व्रत कथा 
दोपहरमौन व्रत या धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन
संध्या तुलसी के क्यारे में घी का दीपक जलाना और आरती 

  पापमोचनी एकादशी व्रत के लाभ

  • मानसिक शांति – यह व्रत आत्म-ग्लानि और पुराने अपराध बोध (Guilt) को कम करने में सहायक है।
  • अनुशासन – उपवास शरीर को डिटॉक्स (Detox) करता है और इंद्रियों पर नियंत्रण सिखाता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति – भगवान विष्णु की कृपा से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 विशेष टिप –  15 मार्च 2026 को पूजा के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान को पीले फूल भगवान को अर्पित करें

इस दिन के लिए पूजा की विशेष सामग्री सूची (Checklist) 

15 मार्च 2026 को पापमोचनी एकादशी और मीन संक्रांति का एक साथ होना बहुत ही शुभ संयोग है। इस दिन भगवान विष्णु (लक्ष्मी-नारायण) और सूर्य देव की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की सूची 

पापमोचनी एकादशी पूजा सामग्री 

  • मूर्ति/चित्र – भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र।
  • वस्त्र – भगवान के लिए पीले वस्त्र (विष्णु जी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है)।
  • पुष्प –  पीले फूल, कमल का फूल और फूलों की माला।
  • तुलसी दल –  एकादशी पूजा में तुलसी के पत्ते अनिवार्य हैं।
  • पंचामृत –  दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण।
  • अभिषेक सामग्री –  गंगाजल और शुद्ध जल।
  • धूप-दीप –  शुद्ध देसी घी का दीपक, अगरबत्ती और कपूर।
  • नैवेद्य (भोग) – पीले फल जैसे केला , मिठाई बेसन के लड्डू या केसरिया खीर और सूखे मेवे।
  • अन्य सामग्री – अक्षत बिना टूटे चावल, रोली/चंदन, सुपारी, लौंग, इलायची और नारियल।

    मीन संक्रांति सामग्री (सूर्य देव हेतु)

  • तांबे का लोटा –  सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए।
  • अर्घ्य सामग्री – जल में डालने के लिए लाल चंदन, कुमकुम, लाल फूल और अक्षत।
  • दान सामग्री – सक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। इसके लिए अन्न चावल, गेहूं , तिल, गुड़, वस्त्र और तांबे के बर्तन।

महत्वपूर्ण बातें

  • व्रत संकल्प –  सुबह स्नान के बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • तुलसी सावधानी – एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, इसलिए इन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
  • पारण (व्रत खोलना) – इस एकादशी का पारण 16 मार्च 2026 को सुबह 05-58 से 08-22 के बीच करना शुभ रहेगा।

15 मार्च 2026 का दिन केवल एक कैलेंडर तिथि नहीं है बल्कि स्वयं को पुनर्जीवित करने का अवसर है। पापमोचनी एकादशी के माध्यम से हम अपने अतीत की गलतियों का मार्जन कर सकते हैं और मीन संक्रांति के माध्यम से प्रकृति के चक्र के साथ तालमेल बिठा सकते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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