लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार आंधी-तूफान, तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का सिलसिला जारी है। मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने पूरे प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन अलग-अलग हादसों में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, फतेहपुर, बांदा और कौशाम्बी जिलों में देखा गया है। इन जिलों के ग्रामीण इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक हैं।
दिन में भीषण गर्मी और शाम को अचानक आफत
प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से मौसम का मिजाज लगातार अप्रत्याशित बना हुआ है। दिन के समय तेज धूप निकलती है और भीषण गर्मी के साथ लू चलती है, जिससे आम जनजीवन बेहाल रहता है। लेकिन शाम होते-होते अचानक आसमान में घने काले बादल छा जाते हैं और तेज हवाएं चलने लगती हैं। कई जिलों में धूलभरी आंधी के बाद मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है। मौसम इतनी तेजी से बदलता है कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिल पा रहा है।ग्रामीण इलाकों में तेज हवाओं के कारण मकानों के छप्पर और टिन शेड उड़ने की घटनाएं आम हो गई हैं। कई जगहों पर विशालकाय पेड़ मुख्य सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। बिजली के खंभे उखड़ने और तार टूटने से सैकड़ों गांवों में कई घंटों तक बिजली गुल रही। कुछ इलाकों में रेलवे ट्रैक पर पेड़ और बिजली के तार गिरने से ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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भीषण गर्मी और पश्चिमी विक्षोभ बनी मुख्य वजह
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार आया आंधी-तूफान सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह पिछले कई दिनों से पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी है। उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्रों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था, जिससे जमीन और निचले वातावरण में अत्यधिक गर्मी जमा हो गई थी।इसी दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाएं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक पहुंच गईं। जब यह गर्म और नमी वाली हवा तेजी से ऊपर उठी और ऊंचाई पर मौजूद ठंडी हवा से टकराई, तो वायुमंडल में तीव्र अस्थिरता पैदा हो गई। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ भी इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य भूमिका निभा रहा है।
बिजली गिरने और मकान ढहने से हुईं सबसे ज्यादा मौतें
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, अधिकांश लोगों की मौत आकाशीय बिजली गिरने, पेड़ पलटने और कच्चे मकानों की दीवारें ढहने के कारण हुई है। हादसे के वक्त कई लोग खेतों में काम कर रहे थे, जबकि कुछ लोग खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे मौजूद थे। अचानक मौसम खराब होने के कारण वे किसी सुरक्षित पक्के ठिकाने तक नहीं पहुंच सके।ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकान और झुग्गियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। कई जगहों पर सोते समय दीवार गिरने से लोग मलबे में दब गए। इन हादसों में न केवल इंसानी जानें गईं, बल्कि बड़ी संख्या में मवेशियों की भी मौत हुई है। पशुओं की मौत से ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, प्रयागराज जिले में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा मिर्जापुर और फतेहपुर में भी मौतों का आंकड़ा काफी ऊपर है।
शासन-प्रशासन अलर्ट, राहत और बचाव कार्य तेज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा प्रबंधन में किसी भी तरह की कोताही न बरतने की हिदायत दी है।राज्य सरकार ने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ ही घायलों के उचित इलाज की व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में मुफ्त करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी आदेश दिया है कि फसलों और मकानों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए ताकि प्रभावितों को समय पर मुआवजा राशि दी जा सके।जमीनी स्तर पर प्रशासनिक टीमें, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस गांव-गांव पहुंचकर नुकसान का जायजा ले रही हैं।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट, सावधानी बरतने की अपील
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का यह खतरनाक रुख जारी रह सकता है। विभाग ने कई जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी करते हुए तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई है।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण अब इस तरह की चरम मौसमी घटनाएं पहले के मुकाबले अधिक तीव्र और नुकसानदेह होती जा रही हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि मौसम खराब होने पर अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। आंधी या बिजली चमकने के दौरान बड़े पेड़ों, पुराने मकानों, बिजली के खंभों और ट्रांसफार्मर से उचित दूरी बनाकर रखें ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।







