भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब भी एक जुझारू, साहसी और कम उम्र में देश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ी की बात होगी तो पार्थिव अजय पटेल का नाम अग्रिम पंक्ति में आएगा। उन्होंने अपनी छोटी सी कद-काठी और मासूम चेहरे के पीछे छिपे असाधारण हौसले से विश्व क्रिकेट के दिग्गज गेंदबाजों का सामना किया।
जन्म, बचपन और संघर्षमय जनजीवन
पार्थिव अजय पटेल का जन्म 9 मार्च 1985 को अहमदाबाद गुजरात में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन आम बच्चों की तरह ही था लेकिन जब वह मात्र 6 वर्ष के थे तब एक दुर्घटना में उनके बाएं हाथ की अनामिका (ring finger) कट गई थी। एक विकेटकीपर के लिए उंगली का न होना सबसे बड़ा अभिशाप माना जाता है क्योंकि गेंद सीधे हाथों में आकर लगती है। लेकिन पार्थिव ने हार नहीं मानी। उन्होंने बिना उंगली के ही घंटों अभ्यास किया, दर्द सहा और अंततः विकेटकीपिंग की कला में महारत हासिल की।
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पढ़ाई-लिखाई और करियर की शुरुआत
पार्थिव ने अपनी स्कूली शिक्षा अहमदाबाद से पूरी की। क्रिकेट के प्रति उनके जुनून को देखते हुए उनके परिवार ने उन्हें पूरा सहयोग दिया। घरेलू क्रिकेट में गुजरात के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बाद साल 2002 में महज 17 साल 153 दिन की उम्र में उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में चुन लिया गया। वह टेस्ट इतिहास में भारत के सबसे युवा विकेटकीपर बने। उन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम में किया जहां उन्होंने पहली ही पारी में जुझारू बल्लेबाजी कर मैच ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई।
पारिवारिक विवरण – माता-पिता, पत्नी और बच्चे
- पिता – अजय पटेल (जिन्होंने पार्थिव के क्रिकेट करियर को हमेशा आगे बढ़ाया)।
- शादी व पत्नी – पार्थिव पटेल ने साल 2008 में अपनी पुरानी दोस्त अवनि झवेरी से विवाह किया।
- बच्चे – उनकी एक प्यारी बेटी है, जिसका नाम वेनिका पटेल है।
मुख्य मित्र
भारतीय क्रिकेट टीम में पार्थिव पटेल के सबसे करीबी दोस्तों में सौरव गांगुली जिन्होंने उन्हें कप्तान के तौर पर पूरा बैक किया अनिल कुंबले, वीरेंद्र सहवाग और गुजरात टीम के उनके पुराने साथी खिलाड़ी शामिल हैं। महेंद्र सिंह धोनी के साथ भी उनके संबंध हमेशा बेहद सम्मानजनक और दोस्ताना रहे।
मैच करियर के आंकड़े (अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू)
| फॉर्मेट | मैच | रन | औसत | अर्धशतक / शतक | कैच / स्टंपिंग |
| टेस्ट | 25 | 934 | 31.13 | 6 / 0 | 62 / 10 |
| वनडे (ODI) | 38 | 736 | 23.74 | 4 / 0 | 30 / 9 |
| टी20 (T20I) | 2 | 36 | 18.00 | 0 / 0 | 1 / 0 |
| प्रथम श्रेणी (FC) | 194 | 11,240 | 43.39 | 62 / 27 | 486 / 77 |
| IPL | 139 | 2848 | 22.60 | 13 / 0 | 69 / 16 |
टीम में आगे जगह न मिल पाने का कारण
2002 से 2004 तक पार्थिव भारतीय टीम के नियमित सदस्य थे। हालांकि शुरुआती दौर में उनकी विकेटकीपिंग में कुछ कमियां थीं और कई अहम मौकों पर उनसे कैच छूटे। इसी दौरान साल 2004 के अंत में महेंद्र सिंह धोनी का भारतीय टीम में आगमन हुआ। धोनी ने आते ही अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और बेहतरीन विकेटकीपिंग से टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। धोनी की कप्तानी और निरंतरता के कारण पार्थिव, दिनेश कार्तिक और रिद्धिमान साहा जैसे बेहतरीन विकेटकीपरों को राष्ट्रीय टीम में खेलने के ज्यादा मौके नहीं मिल सके।
उपलब्धियां और पुरस्कार
- टेस्ट इतिहास में सबसे युवा विकेटकीपर के रूप में डेब्यू करने का विश्व रिकॉर्ड।
- साल 2016-17 में गुजरात टीम के कप्तान के तौर पर इतिहास रचा और रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता।
- वह भारत के पहले ऐसे कप्तान बने जिन्होंने घरेलू क्रिकेट के तीनों प्रमुख खिताब (रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और देवधर ट्रॉफी) जीते हैं।
- आईपीएल में मुंबई इंडियंस (2015, 2017) और चेन्नई सुपर किंग्स के साथ विजेता टीम का हिस्सा रहे।
वर्तमान से जुड़ी संपूर्ण जानकारी
दिसंबर 2020 में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने के बाद भी पार्थिव खेल से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वह एक सफल क्रिकेट विश्लेषक और हिंदी कमेंटेटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा आईपीएल में वह गुजरात टाइटंस (GT) के असिस्टेंट कोच के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं
पार्थिव अजय पटेल की कहानी केवल रनों और कैचों के आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह कहानी एक कटी हुई उंगली के साथ दुनिया के सबसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले अटूट जज्बे की है। एमएस धोनी के युग में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और जब भी मौका मिला जैसे 2016-18 की वापसी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उनका योगदान उन्हें भारतीय क्रिकेट का एक अमर योद्धा बनाता है।







