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गणित के जादूगर- श्रीनिवास रामानुजन का असाधारण जीवन और उनकी अमर विरासत

गणित के जादूगर- श्रीनिवास रामानुजन का असाधारण जीवन और उनकी अमर विरासत
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 20, 2026 3:57 अपराह्न
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​परिचय

​श्रीनिवास रामानुजन भारत के ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास के सबसे महान और दूरदर्शी गणितज्ञों में से एक हैं। उन्होंने बिना किसी औपचारिक उच्च शिक्षा या विशेष प्रशिक्षण के गणित के क्षेत्र में ऐसी अभूतपूर्व खोजें कीं जिन्होंने आधुनिक विज्ञान और गणित की दिशा बदल दी। उन्हें “द मैन हू न्यू इनफिनिटी” (वह व्यक्ति जो अनंत को जानता था) कहा जाता है। रामानुजन की विशेषता यह थी कि वे जटिल गणितीय प्रमेयों (theorems) को बिना किसी मानवीय सहायता के सीधे अपनी अंतःप्रेरणा से लिख देते थे जिसे दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक आज तक पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।

 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

  • जन्म तिथि और स्थान- रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के ईरोड नामक एक छोटे से गाँव में हुआ था।
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि- वे एक बेहद साधारण और गरीब ब्राह्मण परिवार से थे। उनके पिता कुप्पुस्वामी श्रीनिवास अय्यंगर एक कपड़े की दुकान में मुनीम थे और माता कोमलताम्मल एक गृहिणी थीं।
  • बचपन और प्रतिभा- रामानुजन का बचपन अभावों में बीता लेकिन उनकी प्रतिभा अलौकिक थी। बचपन में वे एकाकी और शांत स्वभाव के थे लेकिन गणित को लेकर उनकी जिज्ञासा असीम थी। मात्र 11वर्ष की आयु में उन्होंने अपने घर पर रहने वाले कॉलेज के छात्रों को गणित पढ़ाना शुरू कर दिया था। 13 वर्ष की आयु में उन्होंने ‘लोoney’ की प्रसिद्ध त्रिकोणमिति (Trigonometry) की पुस्तक को पूरी तरह रट लिया और स्वयं के प्रमेय विकसित करने लगे।

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 व्यक्तिगत चुनौतियाँ और आर्थिक संघर्ष

​रामानुजन का जीवन संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों की एक दर्दनाक दास्तां है

  • अत्यधिक गरीबी- घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास गणित के सवाल लगाने के लिए कागज खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। वे स्लेट पर खड़िया (चौक) से गणना करते थे और जब स्लेट भर जाती तो अपनी कोहनी से उसे मिटाते थे। इस वजह से उनकी कोहनी हमेशा काली या सूजी रहती थी।
  • शैक्षणिक असफलता- रामानुजन को गणित से इतना लगाव था कि वे अन्य सभी विषयों (जैसे अंग्रेजी, इतिहास, विज्ञान) को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते थे। परिणामस्वरुप, वे कॉलेज की परीक्षाओं में गणित को छोड़कर बाकी सभी विषयों में फेल हो गए जिससे उनकी छात्रवृत्ति छिन गई।
  • स्वास्थ्य और सामाजिक उपेक्षा- नौकरी न मिलने के कारण उन्हें कई दिनों तक भूखा रहना पड़ा। बाद में मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में एक क्लर्क के रूप में काम करते हुए उन्होंने अपना शोध जारी रखा।

करियर और जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ (कैंब्रिज की यात्रा)

​रामानुजन के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 1913 में उन्होंने अपने गणितीय सूत्रों के कुछ पन्ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध गणितज्ञ जी. एच. हार्डी (G.H. Hardy) को भेजे। प्रोफेसर हार्डी उन सूत्रों को देखकर दंग रह गए। उन्होंने पहचान लिया कि यह कोई सामान्य युवक नहीं बल्कि एक असाधारण जीनियस है। हार्डी के प्रयासों से 1914 में रामानुजन इंग्लैंड (कैंब्रिज) पहुंचे।

​वहां प्रोफेसर हार्डी और रामानुजन की जोड़ी ने गणित की दुनिया में तहलका मचा दिया। रामानुजन की असाधारण प्रतिभा के कारण उन्हें रॉयल सोसाइटी का फेलो (FRS) चुना गया और यह सम्मान पाने वाले वे इतिहास के सबसे कम उम्र के व्यक्तियों में से एक थे।

श्रीनिवास रामानुजन

​महत्वपूर्ण योगदान और प्रमुख उपलब्धियाँ

​रामानुजन ने अपने छोटे से जीवनकाल में गणित के लगभग 3900 प्रमेयों और समीकरणों का संकलन किया। उनके प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं

  • रामानुजन प्राइम और रामानुजन थीटा फलन (Theta Function)
  • विभाजन सूत्र (Partition Formula)- किसी संख्या को अलग-अलग जोड़ के रूपों में कैसे लिखा जा सकता है (जैसे 4 = 4, 3+1, 2+2, 2+1+1, 1+1+1+1).
  • मॉक थीटा फंक्शन्स (Mock Theta Functions)- जीवन के अंतिम दिनों में खोजी गई यह थ्योरी आज ब्लैक होल (Black Holes) को समझने और क्वांटम फिजिक्स में इस्तेमाल हो रही है।
  • रामानुजन नंबर (1729)- इसे ‘हार्डी-रामानुजन संख्या’ कहा जाता है। यह वह सबसे छोटी संख्या है जिसे दो अलग-अलग घनों (cubes) के योग के रूप में दो तरीकों से लिखा जा सकता है (1729 = 1^3 + 12^3 और 9^3 + 10^3).

​व्यक्तित्व और चरित्र- विनम्रता और अटूट विश्वास

​रामानुजन अत्यधिक विनम्र, सरल और सात्विक स्वभाव के व्यक्ति थे। वे कभी भी अपनी प्रतिभा पर अहंकार नहीं करते थे। वे पूरी तरह से शाकाहारी और धार्मिक थे। उनका मानना था कि उनके गणित के ज्ञान का स्रोत उनकी कुलदेवी “नमागिरी देवी” हैं। उनका एक प्रसिद्ध कथन है

​”मेरे लिए उस गणितीय समीकरण का कोई मूल्य नहीं है, जिससे ईश्वर के विचार व्यक्त न होते हों।”

 कम ज्ञात और रोचक तथ्य

  • ​रामानुजन जब कैंब्रिज में थे तब प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था। वहां शाकाहारी भोजन न मिलने के कारण वे अक्सर खुद खाना बनाते थे और कई बार केवल उबले हुए चावल खाकर दिन गुजारते थे।
  • ​उनकी मृत्यु के बाद उनकी तीन नोटबुक मिलीं, जिन्हें “रामानुजन की खोई हुई नोटबुक” (Lost Notebook) कहा जाता है। इसमें लिखे सैकड़ों सूत्रों को सुलझाने में आज भी दुनिया के गणितज्ञ शोध कर रहे हैं।

​अंतिम वर्ष, निधन और विरासत

​इंग्लैंड की कड़ाके की ठंड और खराब खान-पान के कारण रामानुजन गंभीर रूप से बीमार हो गए। उन्हें तपेदिक (Tuberculosis) हो गया था।1919 में वे भारत लौट आए लेकिन उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता रहा। 26 अप्रैल 1920 को मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में इस महान विभूति का निधन हो गया।

विरासत-  भारत सरकार हर साल उनके जन्मदिन (22 दिसंबर) को राष्ट्रीय गणित दिवस (National Mathematics Day) के रूप में मनाती है।

  • ​उनके जीवन पर प्रसिद्ध फिल्म “The Man Who Knew Infinity” बनी है।

​श्रीनिवास रामानुजन का जीवन हमें सिखाता है कि सुख-सुविधाओं और संसाधनों का अभाव आपकी आंतरिक प्रतिभा को रोक नहीं सकता। यदि आपके भीतर अपने काम के प्रति सच्ची लगन, अटूट एकाग्रता और दृढ़ संकल्प है तो आप इतिहास के पन्नों पर अपना नाम अमर कर सकते हैं। रामानुजन आज भी हर उस भारतीय और वैश्विक युवा के लिए प्रेरणा हैं जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर आसमान छूने का सपना देखता है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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