कोलकाता: इंडियन फुटबॉल लीग (IFL) 2025-26 का आखिरी हफ्ता भारतीय फुटबॉल फैंस के लिए किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा। कल्याणी स्टेडियम में खेले गए सीजन के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक में शिलांग लाजोंग एफसी ने वो कर दिखाया जिसकी उम्मीद शायद खुद डायमंड हार्बर के फैंस ने भी नहीं की थी। लाजोंग के युवा और फुर्तीले खिलाड़ियों ने खिताबी रेस में सबसे आगे चल रही डायमंड हार्बर एफसी की मजबूत रक्षापंक्ति के परखच्चे उड़ाते हुए उसे 3-0 के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी। हालांकि, इस करारी और एकतरफा हार के बावजूद फुटबॉल के दीवानों के लिए एक और बड़ी खबर मैदान से आई। इस मैच को गंवाने के बाद भी डायमंड हार्बर एफसी ने आधिकारिक तौर पर आईएफएल 2025-26 का चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया।
दरअसल, डायमंड हार्बर ने अपने पिछले हाई-वोल्टेज मुकाबले में डेम्पो एससी के खिलाफ एक कड़ा ड्रॉ खेला था, जिसने उनकी खिताबी स्थिति को पहले ही अभेद्य बना दिया था। जब इस लंबे और थकाऊ सत्र की अंतिम अंक तालिका (Points Table) सामने आई, तो डायमंड हार्बर 29 अंकों के साथ शीर्ष पर काबिज रही। वहीं, आज का मैच जीतकर चमत्कार करने वाली शिलांग लाजोंग की टीम महज एक अंक के मामूली अंतर से पिछड़ गई और 28 अंकों के साथ उसे दूसरे स्थान यानी उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा।
पहले हाफ का रोमांच: साना का जादू और ग्लैडी का पंच
मैच की शुरुआत से ही कल्याणी स्टेडियम का माहौल गरमाया हुआ था। रेफरी की पहली सीटी बजते ही शिलांग लाजोंग के खिलाड़ियों ने साफ कर दिया था कि वे यहाँ सिर्फ औपचारिकता पूरी करने नहीं आए हैं। लाजोंग के मिडफील्डर्स ने खेल के पहले मिनट से ही गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और छोटे-छोटे, सटीक पासों के सहारे डायमंड हार्बर के बॉक्स में सेंध लगाना शुरू कर दिया। डायमंड हार्बर के डिफेंडर्स शुरुआत में थोड़े सुस्त नजर आए, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।मैच के 30वें मिनट में आखिरकार वह पल आया जिसने कल्याणी स्टेडियम में बैठे लाजोंग के फैंस को झूमने पर मजबूर कर दिया।
शिलांग के फॉरवर्ड खिलाड़ी एवरब्राइटसन साना माइलिएम्पदाह ने विंग से मिले एक बेहतरीन क्रॉस को अपने नियंत्रण में लिया और विपक्षी टीम के दो डिफेंडर्स को छकाते हुए एक बेहद खूबसूरत मैदानी शॉट लगाया। गेंद सीधे नेट के कोने में जा धंसी और शिलांग लाजोंग ने मैच में 1-0 की मानसिक बढ़त हासिल कर ली।इस गोल के बाद डायमंड हार्बर की टीम गहरे दबाव में आ गई। उनकी फॉरवर्ड लाइन पूरी तरह बिखर चुकी थी। पहले हाफ का खेल खत्म होने ही वाला था और चौथे अंपायर ने अतिरिक्त समय का बोर्ड दिखाया। ठीक इसी समय, शिलांग के ग्लैडी नेल्सन खारबुली ने डायमंड हार्बर के कीपर की एक छोटी सी गलती का फायदा उठाया और गेंद को गोलपोस्ट के अंदर धकेल दिया। इस दूसरे गोल के साथ हाफ टाइम तक शिलांग लाजोंग 2-0 से आगे हो चुकी थी।

दूसरे हाफ की कहानी: फ्रांगकी बुआम ने की डायमंड हार्बर की छुट्टी
हाफ टाइम के दौरान डायमंड हार्बर के खेमे में गहरी चिंता साफ देखी जा सकती थी। कोच ने अपनी रणनीति बदलते हुए दूसरे हाफ की शुरुआत में ही दो नए और आक्रामक खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा। डायमंड हार्बर ने काउंटर-अटैक करने की कोशिशें तेज कीं, लेकिन शिलांग लाजोंग के बैकलाइन और उनके गोलकीपर पूरे खेल के दौरान मुस्तैद दिखे।अभी डायमंड हार्बर अपनी रणनीति को मैदान पर उतार ही रही थी कि 54वें मिनट में उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम फ्रांगकी बुआम ने कर दिया।
काउंटर-अटैक पर निकले बुआम ने मिडफील्ड से मिली एक थ्रू-बॉल को हवा में ही लपका और डायमंड हार्बर के गोलकीपर के ऊपर से एक शानदार चिप शॉट खेलते हुए स्कोर 3-0 कर दिया। यह गोल इतना शानदार था कि विपक्षी टीम के खिलाड़ी भी बस देखते रह गए। इस तीसरे गोल ने डायमंड हार्बर की वापसी की बची-कुची उम्मीदों को भी पूरी तरह दफन कर दिया। इसके बाद बचे हुए 36 मिनटों में शिलांग ने बेहद रक्षात्मक और परिपक्व खेल दिखाया और मैच को इसी स्कोर पर समाप्त किया।
हारकर भी बाजीगर बनी डायमंड हार्बर, शिलांग ने जीता दिल
भले ही स्कोरबोर्ड पर शिलांग लाजोंग 3-0 से विजेता बनकर उभरी हो, लेकिन लीग का असली सरताज डायमंड हार्बर एफसी ही बनी। फुटबॉल में अक्सर कहा जाता है कि आप एक मैच हारकर भी जंग जीत सकते हैं, और आज डायमंड हार्बर के साथ ठीक ऐसा ही हुआ। पूरे सीजन में उनके निरंतर प्रदर्शन का इनाम उन्हें इस ट्रॉफी के रूप में मिला।मैच खत्म होने के बाद कल्याणी स्टेडियम का नजारा देखने लायक था। एक तरफ शिलांग लाजोंग के खिलाड़ी इस बड़ी जीत का जश्न मना रहे थे, तो दूसरी तरफ डायमंड हार्बर के खिलाड़ी हार के कड़वे स्वाद को भूलकर चैंपियन की ट्रॉफी उठाने की तैयारी कर रहे थे।
शिलांग लाजोंग ने इस सीजन का अंत जिस आक्रामक अंदाज में किया है, उसने आने वाले सीजन के लिए बाकी टीमों को एक कड़ा संदेश दे दिया है। निश्चित रूप से, इंडियन फुटबॉल लीग का यह सीजन भारतीय घरेलू फुटबॉल के इतिहास में अपने रोमांच और अप्रत्याशित नतीजों के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा।







