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नौतपा 2026 – सूर्य का रोहिणी प्रवेश भीषण गर्मी के 9 दिन कृषि महत्व और धार्मिक उपाय

नौतपा 2026 - सूर्य का रोहिणी प्रवेश भीषण गर्मी के 9 दिन कृषि महत्व और धार्मिक उपाय
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 24, 2026 1:15 अपराह्न
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​भारतीय संस्कृति और ज्योतिष विज्ञान में ‘नौतपा’ का विशेष स्थान है। यह साल का वह समय होता है जब पृथ्वी पर सबसे भीषण गर्मी पड़ती है। साल 2026 में नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो रही है, जो 2 जून तक चलेगी। मान्यताओं के अनुसार इन 9 दिनों में सूर्य देव का प्रचंड रूप देखने को मिलता है। 

​नौतपा क्या है और यह क्यों पड़ता है? (ज्योतिषीय कारण)

​ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव राशि चक्र का भ्रमण करते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो ‘नौतपा’ की शुरुआत होती है। सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों के लिए रहते हैं, लेकिन इसके शुरुआती 9 दिन सबसे अधिक प्रभावशाली और गर्म होते हैं। इसी कारण इसे ‘नौतपा’ कहा जाता है।

वैज्ञानिक और ज्योतिषीय मत- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ‘चंद्रमा’ को माना गया है, जो शीतलता का प्रतीक है। जब उग्र और अत्यंत गर्म ग्रह सूर्य, चंद्रमा के इस शीतल नक्षत्र में आते हैं, तो वे इसके प्रभाव को सोख लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी का तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है और भयंकर लू (Heat Wave) चलती है।

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​नौतपा 2026 की अवधि और समय

​इस वर्ष नौतपा की समयावधि नीचे दी गई तालिका के अनुसार रहेगी-

कार्यक्रमदिनांक
नौतपा का प्रारंभ (सूर्य का रोहिणी प्रवेश)25 मई 2026
नौतपा का समापन02 जून 2026
कुल अवधि09 दिन

नौतपा का प्राकृतिक और कृषि महत्व

​आम तौर पर लोग भीषण गर्मी से परेशान होते हैं, लेकिन सनातन परंपरा और कृषि विज्ञान में नौतपा का अधिक तपना बेहद शुभ माना गया है।

  • अच्छी वर्षा का संकेत- एक पुरानी कहावत है“नो दिन तपे नौतपा, तो होवे सावन हरा-भरा।” ज्योतिष और मौसम विज्ञान (पारंपरिक) के अनुसार, नौतपा के दौरान जितनी तेज गर्मी पड़ती है, समुद्र के पानी का वाष्पीकरण (Evaporation) उतनी ही तेजी से होता है। इससे मॉनसून के बादल घने बनते हैं और आगे चलकर देश में अच्छी बारिश होती है।
  • फसलों के लिए वरदान- तेज धूप के कारण खेतों की मिट्टी की नमी पूरी तरह सूख जाती है, जिससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। यह प्राकृतिक रूप से भूमि को उपजाऊ और आगामी खरीफ फसलों (धान, मक्का आदि) के लिए तैयार करता है।
  • पर्यावरण का संतुलन- यदि नौतपा के दौरान बारिश हो जाए या ठंडी हवाएं चलें, तो इसे ‘नौतपा का गलना’ कहते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, अगर नौतपा गल जाता है, तो उस वर्ष वर्षा की कमी या सूखा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

​भारत और वैश्विक स्तर पर नौतपा का प्रभाव

​भारत में धार्मिक और भौगोलिक प्रभाव

​भारत में नौतपा का सबसे ज्यादा प्रभाव और धार्मिक पालन मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़), उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, हरियाणा) और पश्चिमी भारत (गुजरात) में देखा जाता है। इन राज्यों में पारंपरिक रूप से लोग नौतपा के नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं, प्यासों को पानी पिलाते हैं और सूर्य देव की विशेष पूजा करते हैं।

​क्या यह भारत के बाहर भी होता है?

​खगोलीय रूप से सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश वैश्विक घटना है। इसलिए, भारतीय उपमहाद्वीप के पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान (विशेषकर सिंध और पंजाब प्रांत) में भी इस दौरान अत्यधिक गर्मी पड़ती है। इसके अलावा, दुनिया भर में बसे अप्रवासी भारतीय (Indo-Asians) जो मॉरीशस, सूरीनाम, गयाना, त्रिनिदाद और मध्य-पूर्व (यूएई, ओमान) में रहते हैं, वे भी इस अवधि को धार्मिक कैलेंडर के अनुसार मानते हैं और सूर्य उपासना करते हैं।

​नौतपा में क्या करें और क्या न करें?

​इस भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ के लिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है-

​क्या करें-

  • जल का दान- राहगीरों, पक्षियों और पशुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करें। प्यासे को पानी पिलाना इस समय सबसे बड़ा पुण्य है।
  • शीतल वस्तुओं का दान- ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को घड़ा (मटका), सत्तू, तरबूज, खरबूजा, खीरा, पंखा (हाथ का) और छाता दान करें।
  • हल्का भोजन- इस दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए नारियल पानी, छाछ, लस्सी, नींबू पानी और आम पना का सेवन करें।

​क्या न करें-

  • मांसाहार और तामसिक भोजन- अत्यधिक गर्मी के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इसलिए हैवी, ऑयली, मसालेदार या तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें।
  • दोपहर की यात्रा- बहुत जरूरी न हो, तो दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें।
  • जल की बर्बादी- पानी की एक भी बूंद बर्बाद न करें, क्योंकि प्रकृति इस समय पानी की कमी से जूझ रही होती है।

​सूर्य देव को प्रसन्न करने के अचूक ज्योतिषीय उपाय

​नौतपा के दौरान सूर्य देव अपने पूर्ण तेज में होते हैं। यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है या आप उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो इन 9 दिनों में निम्नलिखित उपाय अवश्य करें-

  • अर्घ्य दान- रोज सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन, कुमकुम और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
  • आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ- नौतपा के सभी 9 दिनों में सुबह के समय ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करने से यश, कीर्ति, आत्मविश्वास और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
  • गायत्री मंत्र का जाप- प्रतिदिन दोपहर या सुबह के समय कम से कम 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक शांति मिलती है और शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है।
  • नमक का कम सेवन- संभव हो तो इन 9 दिनों में रविवार के दिन या नियमित रूप से भोजन में नमक का प्रयोग कम करें।

​नौतपा 2026 केवल भीषण गर्मी का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के कायाकल्प और आगामी खुशहाली का आधार है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह मौसम परिवर्तन और अच्छी फसल के लिए जरूरी है, तो धार्मिक दृष्टिकोण से यह दान, संयम और सूर्य उपासना का पावन काल है। सूर्य देव की आराधना करें, जीवों की प्यास बुझाएं और इस नौतपा को प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर सुरक्षित रूप से बिताएं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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