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आसमान में और मजबूत होगी भारत की पकड़- 114 राफेल विमानों की खरीद की तैयारी फ्रांस को जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव

आसमान में और मजबूत होगी भारत की पकड़- 114 राफेल विमानों की खरीद की तैयारी फ्रांस को जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 25, 2026 1:25 अपराह्न
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भारतीय आसमान की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और दुश्मनों को कड़ा संदेश देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय के गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, वायुसेना के लिए 114 मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया को सुपरफास्ट ट्रैक पर डाल दिया गया है। इस महा-सौदे के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज, यानी ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ को अंतिम रूप दे दिया गया है। 

सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ ही दिनों में इसे आधिकारिक तौर पर फ्रांस सरकार को सौंप दिया जाएगा।रक्षा क्षेत्र के जानकार इस कदम को भारतीय वायुसेना के इतिहास का पासा पलटने वाला फैसला मान रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर एक साथ अपनी हवाई ताकत को मजबूत बनाए रखने की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

क्यों पड़ी इतने बड़े सौदे की जरूरत?

इस पूरी कवायद को समझने के लिए भारतीय वायुसेना की वर्तमान स्थिति को देखना होगा। वायुसेना के पास इस समय स्वीकृत लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या 42 होनी चाहिए, ताकि देश दोनों सीमाओं पर एक साथ किसी भी चुनौती का जवाब दे सके। लेकिन हकीकत यह है कि पुराने हो चुके मिग-21, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों के धीरे-धीरे रिटायर होने के कारण यह संख्या घटकर करीब 30-31 स्क्वाड्रन पर आ गई है।

वायुसेना के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हमने तुरंत नए और आधुनिक विमानों को अपने बेड़े में शामिल नहीं किया, तो आने वाले सालों में यह अंतर और गहरा हो जाएगा। तेजस जैसे स्वदेशी विमान वायुसेना में आ रहे हैं, लेकिन भारी और लंबी दूरी तक मार करने वाले लड़ाकू विमानों की कमी को तुरंत पूरा करने के लिए राफेल जैसा आजमाया हुआ मंच सबसे बेहतरीन विकल्प है।

भारत इससे पहले साल 2016 में फ्रांस के साथ आपातकालीन तौर पर 36 राफेल विमानों का सौदा कर चुका है। ये सभी विमान भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन चुके हैं और अंबाला तथा हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। इन विमानों ने लद्दाख गतिरोध के दौरान चीन की सीमाओं के पास रात-दिन गश्त लगाकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। यही वजह है कि वायुसेना अब इसी बेड़े को और बड़ा करना चाहती है।

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इस 114 विमानों वाले सौदे की सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात इसका निर्माण फॉर्मूला है। सरकार इस बार सिर्फ सीधे विमान खरीदने के मूड में नहीं है। योजना के मुताबिक, इस सौदे के तहत शुरुआती लगभग 18 से 24 विमान ही फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी से सीधे उड़ने के लिए तैयार हालत में भारत आएंगे।

बाकी बचे करीब 90 विमानों का निर्माण पूरी तरह से भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी को किसी भारतीय रणनीतिक साझेदार के साथ हाथ मिलाना होगा। इसमें देश की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ-साथ कुछ निजी रक्षा कंपनियां भी रेस में शामिल हो सकती हैं।इस कदम से न केवल भारत में अत्याधुनिक विमान बनाने की तकनीक आएगी, बल्कि देश के रक्षा उद्योग को एक नई दिशा मिलेगी। हजारों की संख्या में कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

राफेल ही क्यों है भारत की पहली पसंद?

वैसे तो इस रेस में अमेरिका, स्वीडन और यूरोपीय संघ की दूसरी कंपनियों के विमान भी दावेदार रहे हैं, लेकिन राफेल का पलड़ा कई वजहों से भारी है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत के पास पहले से ही राफेल को संभालने का बुनियादी ढांचा, ट्रेनिंग सेंटर और रख-रखाव की व्यवस्था मौजूद है। नए विमान आने पर अलग से ज्यादा तामझाम नहीं करना पड़ेगा और लॉजिस्टिक्स का खर्च बचेगा। इसके अलावा राफेल हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों से लैस है, जिसकी रेंज 150 किलोमीटर से ज्यादा है। यानी भारतीय पायलट दुश्मन के विमान को उसकी सीमा में घुसे बिना ही मार गिरा सकते हैं। यह विमान जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियार ले जाने और सटीक हमला करने में भी सक्षम है।

समंदर से आसमान तक फ्रांस के साथ दोस्ती

यह मेगा डील केवल वायुसेना तक सीमित नहीं है। भारतीय नौसेना भी अपने नए स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों की खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही है। इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में भारत के आसमान से लेकर हिंद महासागर की लहरों तक, फ्रांस के राफेल विमान भारत के सबसे बड़े सुरक्षा कवच के रूप में दिखाई देंगे।हालांकि, रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा सौदों की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होती है। प्रस्ताव भेजे जाने के बाद कीमत पर बातचीत और कांट्रैक्ट साइन होने में अभी कुछ समय लगेगा। लेकिन सरकार ने जिस तेजी से इस फाइल को आगे बढ़ाया है, उससे साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। यह सौदा पूरा होते ही भारतीय वायुसेना की ताकत में जो इजाफा होगा, वह दुश्मनों के हौसले पस्त करने के लिए काफी है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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