विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। तकनीकी खराबी कभी भी और किसी भी विमान में आ सकती है लेकिन पायलटों की सूझबूझ और सटीक निर्णय क्षमता ही बड़े हादसों को टालने का काम करती है। ऐसा ही एक मामला केरल के कन्नूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से सामने आया जहाँ एअर इंडिया एक्सप्रेस की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को तकनीकी गड़बड़ी के कारण बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल और पायलटों के धैर्य की परीक्षा ली।
क्या है पूरा मामला? (उड़ान का विवरण)
यह घटना एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट संख्या IX 789 से जुड़ी है। यह बोइंग विमान केरल के कन्नूर (CNN) से सऊदी अरब के जेद्दा (JED) के लिए अपनी नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर था। विमान में 180 से अधिक यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे।
विमान ने सुबह लगभग 7:03 बजे कन्नूर हवाई अड्डे से जेद्दा के लिए उड़ान भरी थी। टेक-ऑफ के समय सब कुछ सामान्य था और यात्री अपनी लंबी यात्रा के लिए तैयार थे। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद (लगभग 30 मिनट के भीतर) जब विमान आसमान में ऊंचाई पर था तब कॉकपिट में पायलटों को इंजन से संबंधित चेतावनी (इंजन वॉर्निंग) दिखाई दी।
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खराबी का कारण- फ्यूल फिल्टर में आई समस्या
प्रारंभिक जांच और हवाई अड्डे के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विमान के फ्यूल फिल्टर (Fuel Filter) में खराबी आ गई थी। ईंधन फिल्टर में आई इस गड़बड़ी के कारण इंजन को होने वाली फ्यूल सप्लाई बाधित होने की आशंका थी जिससे इंजन के फेल होने का खतरा बढ़ सकता था।
गंभीर अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा को जारी रखना बेहद जोखिम भरा हो सकता था क्योंकि विमान को अरब सागर के ऊपर से होते हुए एक लंबा सफर तय करना था। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए अनुभवी पायलटों ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत उड़ान को बीच में ही रद्द करने और वापस मूल हवाई अड्डे (कन्नूर) की ओर मोड़ने (डायवर्ट करने) का एक बेहद महत्वपूर्ण व एहतियाती निर्णय लिया।
हवा में लगाए 18 चक्कर- ईंधन का वजन कम करने की चुनौती
पायलटों के सामने विमान को वापस सुरक्षित उतारने की एक बड़ी तकनीकी चुनौती थी विमान का भारी वजन। जेद्दा तक की लंबी अंतरराष्ट्रीय दूरी को तय करने के लिए विमान में भारी मात्रा में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) भरा गया था।
सुरक्षा नियम (Aviation Safety Protocol)- किसी भी विमान का टेक-ऑफ वजन (Take-off Weight) उसके अधिकतम लैंडिंग वजन (Maximum Landing Weight) से बहुत अधिक होता है। यदि अत्यधिक ईंधन से भारी विमान को तुरंत लैंड कराया जाए तो उसके लैंडिंग गियर टूटने, रनवे पर फिसलने या विमान के पिछले हिस्से में आग लगने का गंभीर खतरा रहता है।
इस खतरे से बचने के लिए विमान को कन्नूर हवाई क्षेत्र के ऊपर ही हवा में रोक दिया गया। पायलटों ने विमान का वजन सुरक्षित स्तर पर लाने के लिए ईंधन को जलाने (Fuel Burn) की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए विमान को कन्नूर के आसमान में लगभग 15 से 18 बार गोल-गोल चक्कर (Hold/Circle) लगाने पड़े। करीब दो घंटे तक विमान हवा में ही घूमता रहा ताकि ईंधन कम हो सके और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षित लैंडिंग और यात्रियों की स्थिति
लगातार चक्कर काटने और ईंधन का भार कम करने के बाद सुबह लगभग 9-00 बजे विमान को कन्नूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर सुरक्षित रूप से उतार लिया गया। विमान की लैंडिंग के समय हवाई अड्डे पर आपातकालीन सेवाएं, दमकल गाड़ियां और एम्बुलेंस पूरी तरह अलर्ट मोड पर थीं जो कि किसी भी आपातकालीन लैंडिंग के लिए मानक प्रक्रिया है।
लैंडिंग के बाद विमान में सवार सभी 180 से अधिक यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने राहत की सांस ली। एअर इंडिया एक्सप्रेस के अधिकारियों ने पुष्टि की कि सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को कोई चोट नहीं आई है।
घटना के बाद की कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था
विमान के सुरक्षित उतरने के बाद उसे तुरंत तकनीकी जांच के लिए हैंगर में भेज दिया गया। इंजीनियरिंग टीम और विमानन विशेषज्ञों द्वारा फ्यूल फिल्टर और सहायक ऊर्जा इकाई (APU) की गहन जांच की जा रही है।
एअर इंडिया एक्सप्रेस प्रशासन ने फंसे हुए यात्रियों की परेशानी को देखते हुए तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी। यात्रियों के लिए हवाई अड्डे पर ही जलपान और आराम की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही जेद्दा जाने वाले इन यात्रियों को उनके गंतव्य तक समय पर पहुंचाने के लिए एयरलाइन द्वारा एक वैकल्पिक विमान (Alternative Aircraft) की व्यवस्था की गई जिससे सभी यात्रियों को जेद्दा के लिए दोबारा रवाना किया गया।
एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 789 के साथ घटी यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक विमानन प्रणाली में सुरक्षा मानकों और तकनीकी प्रणालियों को कितनी कड़ाई से लागू किया जाता है। हालांकि इस तकनीकी खराबी के कारण यात्रियों को कुछ घंटों के मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ा लेकिन पायलटों द्वारा समय पर लिया गया समझदारी भरा निर्णय और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सटीक पालन ही इस सफल लैंडिंग का मुख्य आधार बना। विमान का हवा में चक्कर लगाकर वजन कम करना और सुरक्षित रूप से 180 जिंदगियों को वापस जमीन पर लाना भारतीय विमानन क्रू की उच्च स्तरीय ट्रेनिंग और व्यावसायिकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।







