भारत और चीन के बीच दलाई लामा के उत्तराधिकारी मामले में विवाद बढ़ता जा रहा है। चीन दलाई लामा के उत्तराधिकारी और उनके पुनर्जन्म के मामले को हमेशा से अपना बताते आया है। वह तिब्बत मुद्दे पर भी यह कहते आया है कि यह मुद्दा उनका है इसलिए बाहरी देशों का हस्ताक्षेप वह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने अपने X अकाउंट पर लिखा कि – “दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परम्पराओं और ऐतिहासिक नियमों के अनुसार होती है, जिसमें चीन के केंद्रीय सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है।
भारत को तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर सावधानी बरतना चाहिए। यह चीन का आंतरिक मामला है अतः इस मुद्दे पर दूसरे देश का दखल मंजूर नहीं है।” अभी तक भारत ने अपनी तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान नहीं दिया है। चीन दूतावास की तरफ से यह बयान तन सामने आया है जब 27 मई को धर्मशाला में सेंट्रल तिब्बतन ऐडमिनिस्ट्रेशन (CTA) अर्थात निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रमुख के रूप में पेनपा दूसरी बार शपथ लेंगे।
दलाई लामा मामले में चीन की चिंता
सेंट्रल तिब्बत एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख पेनपा ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। चीन यह चाहता है कि दलाई लामा उत्तराधिकारी के मामले में पूरा अधिकार चीन के अधीन ही रहे। पेनपा के CTA का प्रमुख बनने से चीन को यह चिंता है कि पेनपा खुद से निर्णय लेंगे तो चीन इसमें दखल नहीं दे पाएगा। चीन यह भी चाहता है कि तिब्बत से जुड़ा हर मुद्दा चीन ही सुलझाए। दूसरे देश अगर उसके मामले में दखल देंगे तो उनके साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं। चीन ने इसे संप्रभुता का खतरा बताया है।
दलाई लामा के उत्तराधिकारी की खोज दलाई लामा के मृत्यु के बाद ही चालू हो जाती है। उनके उत्तराधिकारी की खोज उनके अनुयाई ही करते है। दलाई लामा द्वारा छोड़े गए कुछ चिन्हों के माध्यम से नए दलाई लामा की खोज होती है। अब चीन यही चाहता है कि इस मामले से जुड़े सारे पहलुओं को चीन ही सुलझाए, अन्य देश नहीं।
read also :
- ईरान से तेल खरीद पर भिड़े बीजिंग-वॉशिंगटन
- समंदर के बीच बदला दांव भारत आ रहा ईरानी तेल जहाज
- भारत में चीन के CCTV कैमरों पर लगेगा प्रतिबंध
दलाई लामा चुनाव की प्रक्रिया
दलाई लामा के चुनाव की प्रक्रिया कुछ इन चरणों में होती है –
- पुनर्जन्म – ऐसी मान्यता है कि दलाई लामा की मृत्यु के बाद नए दलाई लामा की खोज पूर्व दलाई लामा के द्वारा दिए गए चिन्हों से होती है।
- धार्मिक संकेत – यह भी मान्यता है कि अगर कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसके पास जाकर दलाई लामा की कुछ वस्तुएं दिखाई जाती है अगर वह बच्चा दिखाए गए वस्तु को पहचान लेता है तो यह मान लिया जाता है कि वह लड़का दलाई लामा का पुनर्जन्म है।
- धार्मिक मठ का प्रभाव – धार्मिक मठ के नेता मिलकर नए दलाई लामा का चुनाव करते है। यह नेता धार्मिक परंपराओं को मानने व समझने वाले होते हैं।
- चीजें पहचानना – नए दलाई लामा के चुनाव प्रक्रिया में एक चरण होता है चीजे पहचानने की। अगर कोई बच्चा दलाई लामा के पूर्व जन्म की वस्तुओं को पहचान लेता है तो उस बच्चे को दलाई लामा का पुनर्जन्म माना जाता है।
चीन का चिड़चिड़ाहट
भारत में चीनी दूतावास द्वारा जारी बयान में भारत को भले ही दलाई लामा मुद्दे से अलग रहने को कहा गया है लेकिन चीन पहले भी कई मुद्दों में भारत से चिढ़ता आया है। कुछ वर्ष पूर्व गलवान घाटी विवाद में भी चीन खूब चिढ़ा था। चीन गलवान घाटी में कुछ भूमि को अपने अधीन करना चाहता था लेकिन भारत के सैनिकों ने चीन के जवानों को खदेड़ दिया था। चीन यह हार बर्दाश्त नहीं कर पाया, तब से अलग-अलग मुद्दों पर भारत को आंख दिखाते आ रहा है।
वर्तमान दलाई लामा भारत के हिमाचल प्रदेश में बसे हैं। उनका जन्म चीन में ही हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने भारत में शरण ले ली थी। वर्तमान दलाई लामा को शांति के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार भी मिल चुका है। तिब्बत मुद्दे पर भी चीन लगातार भारत के साथ विवाद करते आया है। अक्साई चीन में भी चीन अपना कब्जा किए हुए बैठा है। अक्साई चीन का कई भाग पहले भारत में हुआ करता था लेकिन लगता है चीन भूमि को कब्जाने का भूखा है जो वह भारत से भूमि विवाद करते आ रहा है।







