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यूनिटी कप- सेमीफाइनल में जमैका ने रोका भारत का रथ अब जिम्बाब्वे से होगी ‘ब्रॉन्ज’ की जंग

यूनिटी कप- सेमीफाइनल में जमैका ने रोका भारत का रथ अब जिम्बाब्वे से होगी 'ब्रॉन्ज' की जंग
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 28, 2026 2:57 अपराह्न
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लंदन के द वैली स्टेडियम में भारतीय फुटबॉल फैंस का दिल टूट गया। यूनिटी कप 2026 के फाइनल में जगह बनाने का जो सपना टीम इंडिया देख रही थी, उसे जमैका ने सेमीफाइनल में 2-0 से हराकर चकनाचूर कर दिया। इस हार के बाद अब भारतीय टीम को तीसरे स्थान के मुकाबले के लिए जिम्बाब्वे से भिड़ना होगा, जबकि जमैका की टीम चमचमाती ट्रॉफी के लिए नाइजीरिया के खिलाफ फाइनल खेलने उतरेगी।मैच का मिजाज शुरू से ही जमैका के पक्ष में रहा। रेफरी की पहली सीटी बजते ही जमैका के खिलाड़ियों ने इतना आक्रामक खेल दिखाया कि भारतीय टीम शुरुआती मिनटों में ही दबाव में बिखर गई। विपक्षी विंगर्स ने इतनी तेजी से अटैक किए कि भारतीय डिफेंस लाइन को संभलने और अपनी पोजीशन सेट करने का मौका ही नहीं मिला।

मैच के 8वें मिनट में लगा पहला झटका

भारत की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब मैच के महज आठवें मिनट में जमैका ने खाता खोल लिया। कोर्टनी क्लार्क ने बॉक्स के बाहर से एक ऐसा कड़क शॉट लगाया कि गेंद सीधे नेट के कोने में जा धंसी। सीनियर गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने पूरी ताकत लगाकर डाइव मारी, लेकिन गेंद की रफ्तार के आगे उनकी एक न चली। 1-0 से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम पूरी तरह बैकफुट पर आ गई।कप्तान संदेश झिंगन और राहुल भेके ने जैसे-तैसे रक्षापंक्ति को संभालने की कोशिश की, पर जमैका के फॉरवर्ड्स की स्पीड के सामने वो बेबस दिखे। सबसे बड़ी दिक्कत यह रही कि भारतीय मिडफील्ड गेंद को अपने पास होल्ड नहीं रख पा रहा था, जिसके चलते टीम सिर्फ क्लियरेंस और डिफेंस करने में ही व्यस्त रही।

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छांगते की रफ्तार और रहीम अली के प्रयास

पहले हाफ के बीच में भारत ने काउंटर-अटैक करने की कुछ कोशिशें जरूर कीं। लालियानजुआला छांगते ने राइट विंग से अपनी चिर-परिचित रफ्तार दिखाते हुए कुछ अच्छे चांस बनाए। निखिल पूजारि और रहीम अली ने भी डी-बॉक्स के आसपास जमैका के डिफेंडर्स को छकाने की कोशिश की, लेकिन गोलपोस्ट के पास में सटीक फिनिशिंग की कमी साफ नजर आई।

टीम को कुछ कॉर्नर और फ्री-किक भी मिले, लेकिन जमैका के लंबे-चौड़े डिफेंडर्स ने हर हवाई खतरे को आसानी से टाल दिया। पहला हाफ खत्म होने तक जमैका ने 1-0 की लीड बनाए रखी।

अगर गुरप्रीत न होते, तो स्कोरलाइन कुछ और होती!

भले ही भारत यह मैच हार गया, लेकिन गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने अपने प्रदर्शन से लाज रख ली। उन्होंने पहले हाफ में दो ऐसे गजब के ‘वन-ऑन-वन’ सेव किए, जिसने भारत को मैच से बाहर होने से बचाए रखा। जमैका के खिलाड़ी लगातार गोलपोस्ट पर गोलियां दाग रहे थे, पर गुरप्रीत चट्टान की तरह डटे रहे। उनके इसी खेल की बदौलत भारत दूसरे हाफ में वापसी की उम्मीद लेकर मैदान पर उतर सका।

ऑफसाइड का वो एक फैसला… और सब खत्म

दूसरे हाफ में कोच खालिद जमील ने रणनीति बदली। उन्होंने लड़कों को थोड़ा खुलकर और अटैकिंग फुटबॉल खेलने को कहा। रहीम अली के आने से फॉरवर्ड लाइन में हलचल बढ़ी और भारत ने गेंद पर कंट्रोल बनाना शुरू किया।मैच का टर्निंग पॉइंट 53वें मिनट में आया। भारतीय खिलाड़ियों ने एक बेहतरीन पासिंग गेम के जरिए गेंद को जमैका के गोलपोस्ट में डाल दिया था। पूरे स्टेडियम में जश्न का माहौल था, लेकिन तभी लाइन-रेफरी ने ऑफसाइड का झंडा उठा दिया। यह फैसला भारतीय टीम के मनोबल को तोड़ने वाला साबित हुआ। इसके बाद छांगते की एक फ्री-किक और नौफल के प्रयास भी नाकाम रहे।

रयान विलियम्स की चोट ने बढ़ाई टेंशन

मैच के दौरान टीम इंडिया को एक और बड़ा झटका लगा जब इन-फॉर्म फॉरवर्ड रयान विलियम्स चोटिल हो गए। उन्हें मैदान पर लंगड़ाते हुए देखा गया, जिसके बाद मेडिकल टीम को मैदान पर आना पड़ा। रयान पिछले कुछ समय से भारतीय अटैक की रीढ़ रहे हैं। ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ अगले मैच से पहले उनकी यह चोट कोच खालिद जमील की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है।

78वें मिनट में जमैका का ‘नॉकआउट पंच’

आखिरी मिनटों में जब भारत बराबरी के लिए ऑल-आउट अटैक कर रहा था, जमैका ने काउंटर-अटैक पर दूसरा गोल दाग दिया। 78वें मिनट में काहीम डिक्सन ने अकेले दम पर भारतीय डिफेंडर्स को ड्रिबल करते हुए छकाया और स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल ने भारत की वापसी की रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। रेफरी की आखिरी सीटी बजते ही जमैका ने फाइनल का जश्न मनाना शुरू कर दिया।

युवाओं के भरोसे उतरे थे कोच खालिद

हार के बावजूद इस युवा भारतीय टीम की तारीफ करनी होगी। मोहन बागान के कई मुख्य खिलाड़ियों की अनुपलब्धता के कारण कोच खालिद जमील को एक बेहद युवा और कम अनुभवी टीम के साथ उतरना पड़ा था। खिलाड़ियों को विदेशी कंडीशन में तालमेल बिठाने का वक्त भी नहीं मिला। मिडफील्ड में कॉर्डिनेशन की कमी और खराब फिनिशिंग भले ही भारी पड़ी, लेकिन इन युवाओं ने जज्बा पूरा दिखाया।

अब सारा फोकस जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले ‘तीसरे स्थान’ के मैच पर है। उम्मीद है कि भारतीय टीम इस हार से सबक लेकर टूर्नामेंट का अंत एक जीत के साथ करेगी।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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