मैड्रिड। फीफा विश्व कप 2026 के लिए स्पेन ने अपनी अंतिम टीम घोषित कर दी है। टीम चयन के बाद पूरे यूरोप के फुटबॉल जगत में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इस बार स्पेन की टीम में रियल मैड्रिड का एक भी खिलाड़ी जगह नहीं बना सका है। दूसरी ओर युवा स्टार लामिन यामाल को टीम का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है। स्पेन के मुख्य कोच लुइस डी ला फुएंते ने अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलित मिश्रण तैयार किया है और साफ कहा है कि चयन केवल मौजूदा प्रदर्शन और फिटनेस को ध्यान में रखकर किया गया है।स्पेन पिछले कुछ समय से लगातार शानदार फॉर्म में चल रहा है। यूरो 2024 का खिताब जीतने के बाद टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। इसी कारण विश्व कप में भी स्पेन को खिताब का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। टीम की घोषणा के साथ ही फुटबॉल प्रशंसकों के बीच खिलाड़ियों को लेकर बहस शुरू हो गई है।
युवा यामाल पर सबसे ज्यादा नजर
स्पेन की टीम में सबसे ज्यादा चर्चा 17 वर्षीय लामिन यामाल की हो रही है। बार्सिलोना के इस युवा खिलाड़ी ने बेहद कम उम्र में अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। पिछले एक साल में उन्होंने क्लब और देश दोनों के लिए शानदार प्रदर्शन किया है। तेज रफ्तार, शानदार ड्रिब्लिंग और गोल बनाने की क्षमता के कारण उन्हें स्पेन के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है।कोच डी ला फुएंते ने भी यामाल की तारीफ करते हुए कहा कि वह दबाव में भी बेहतर खेल दिखाने की क्षमता रखते हैं। टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर भी यामाल अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभाएंगे।यामाल के अलावा निको विलियम्स, पेड्री, गावी, रोड्री और डानी ओल्मो जैसे खिलाड़ी भी टीम की ताकत माने जा रहे हैं। मिडफील्ड में रोड्री की मौजूदगी स्पेन को मजबूती देती है, जबकि आक्रमण में यामाल और निको विलियम्स विरोधी टीमों के लिए परेशानी बन सकते हैं।
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रियल मैड्रिड के खिलाड़ियों का पत्ता साफ होना चौंकाने वाला
इस पूरे चयन में जो बात सबसे ज्यादा खटक रही है, वो है रियल मैड्रिड के खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी। दानी कार्वाजाल जैसे तजुर्बेकार डिफेंडर को भी इस बार टीम में जगह नहीं मिल पाई है। फुटबॉल के जानकारों का कहना है कि स्पेन की नेशनल टीम बिना किसी रियल मैड्रिड प्लेयर के मैदान पर उतरे, ऐसा मंजर दशकों में कभी-कभार ही देखने को मिलता है।हालांकि, कोच डी ला फुएंते ने इस विवाद को तूल देने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था, “जब आप देश की टीम चुनते हैं, तो खिलाड़ी का क्लब नहीं, उसकी मौजूदा फॉर्म और टीम की जरूरत मायने रखती है।” कई विशेषज्ञ इसे स्पेनिश फुटबॉल के एक नए युग की शुरुआत मान रहे हैं, जहां अब केवल नाम या बड़े क्लब के रसूख पर टिकट नहीं मिलता।
बार्सिलोना के ‘यंग ब्लड’ का दबदबा
इस नई टीम को देखकर साफ है कि फिलहाल स्पेनिश फुटबॉल पर बार्सिलोना की युवा ब्रिगेड का राज है। लामिन यामाल, पेड्री, गावी और फेरान टोरेस जैसे नाम इस टीम की रीढ़ हैं। इससे यह भी पता चलता है कि बार्सिलोना की ला मासिया से निकले युवा खिलाड़ी इस समय किस कदर छाए हुए हैं। कोच को भरोसा है कि युवाओं का यह जोश और उनका कॉन्फिडेंस टीम को चैंपियन बनाने में बड़ा रोल निभाएंगे।

चोटों का डर, लेकिन राहत भी बड़ी है
टूर्नामेंट से ठीक पहले कुछ प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर थोड़ी चिंता जरूर थी, क्योंकि हाल के महीनों में कई खिलाड़ी चोटिल रहे हैं। लेकिन स्पेनिश कैंप से आ रही खबरें राहत देने वाली हैं। टीम मैनेजमेंट के मुताबिक, वर्ल्ड कप का पहला मैच शुरू होने तक सभी खिलाड़ी पूरी तरह मैच-फिट हो जाएंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि रोड्री और पेड्री जैसे मैच-विनर पूरी तरह रिकवर हो चुके हैं, जो मिडफील्ड को संभालेंगे।
एक बार फिर विश्व विजेता बनने का सपना
स्पेन ने 2010 में पहली बार फुटबॉल विश्व कप जीता था। उसके बाद टीम कई बड़े टूर्नामेंटों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन पिछले दो वर्षों में स्पेन ने जिस तरह वापसी की है, उससे टीम को फिर से खिताब का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
टीम की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज पासिंग गेम और युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास है। स्पेन की कोशिश होगी कि वह शुरुआत से आक्रामक खेल दिखाए और विरोधी टीमों पर दबाव बनाए रखे।अब फुटबॉल प्रेमियों की नजर इस बात पर टिकी है कि युवा सितारों से सजी यह स्पेनिश टीम विश्व कप में कितना आगे तक जाती है। खासकर लामिन यामाल पर पूरे देश की उम्मीदें टिकी हैं, जिनके पास कम उम्र में इतिहास रचने का बड़ा मौका होगा।







