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क्या ईरान की जगह इटली खेलेगा विश्वकप ? नई मांग से खड़ा हुआ बखेड़ा

क्या ईरान की जगह इटली खेलेगा विश्वकप ? नई मांग से खड़ा हुआ बखेड़ा
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 23, 2026 2:02 अपराह्न
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फीफा विश्वकप फुटबॉल 2026 के शुरू होने से पहले ही एक विवाद खड़ा हो गया है, जिसने खेल जगत को दो हिस्सों में बांट दिया है। खबर है कि ईरान की टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर उसकी जगह इटली को शामिल करने की मांग उठ रही है। हालांकि यह सुनने में हैरान करने वाला लगता है, लेकिन इस मांग के पीछे की कहानी काफी पेचीदा है। इस मुद्दे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या खेल के मैदान पर राजनीति का दखल होना चाहिए?रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दूत पाउलो जामपोली ने फीफा से कहा है कि अगर ईरान किसी कारण से विश्व कप में नहीं खेल पाता, तो उसकी जगह इटली को मौका दिया जाए।यह प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन यह मांग एक चर्चा का विषय जरूर बन गई। 

इटली का दर्द 

चार बार की विश्व चैंपियन इटली  के लिए पिछला कुछ समय किसी त्रासदी से कम नहीं रहा है। पिछले तीन बार से यह टीम विश्वकप के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर पा रही है।इटली के फैंस और वहां का मीडिया इस मांग को एक ‘चमत्कार’ की तरह देख रहा है।तर्क यह दिया जा रहा है कि इटली जैसी बड़ी टीम के होने से टूर्नामेंट की व्यूअरशिप, ब्रॉडकास्टिंग रेवेन्यू और ग्लैमर कई गुना बढ़ जाएगा। लेकिन खेल के जानकार इसे एक खतरनाक मिसाल मानते हैं। यदि नियमों को दरकिनार कर किसी ‘बड़ी’ टीम को सिर्फ उसके नाम के आधार पर प्रवेश दिया गया, तो छोटे देशों के लिए क्वालिफिकेशन की मेहनत के कोई मायने नहीं रह जाएंगे।

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ईरान का दर्द

पश्चिम एशिया में जारी संकट के केंद्र बिंदु में ईरान और अमेरिका हैं , फीफा विश्वकप फुटबॉल 2026 अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के संयुक्त मेजबानी में आयोजित किया जाना है ऐसे में ईरान फीफा से सुरक्षा कारणों से अपने मैच अमरीका से बाहर आयोजित करने की मांग कर चुका है लेकिन फीफा ने ईरान की इस मांग को ठुकरा दिया था।ईरान ने एशियन क्वालिफायर्स में बेहतरीन प्रदर्शन किया और अपने दम पर विश्व कप का टिकट हासिल किया है। ईरान के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की फौज है जिन्होंने मैदान पर पसीना बहाकर यह मुकाम पाया है। नियमों के मुताबिक, जो टीम क्वालिफाई कर चुकी है, उसे बिना किसी ठोस तकनीकी कारण के बाहर नहीं किया जा सकता।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फीफा किसी राजनीतिक दबाव में आकर ईरान को हटाता है, तो यह खेल के इतिहास का सबसे विवादास्पद फैसला होगा। इससे यह संदेश जाएगा कि ताकतवर मुल्क अपनी मर्जी से किसी भी देश का करियर बर्बाद कर सकते हैं।

क्या कहते हैं फीफा के नियम ?

फीफा की नियमावली काफी सख्त है। नियम कहते हैं कि विश्व कप में वही टीम खेलती है जिसने क्वालिफिकेशन राउंड जीता हो। अगर किसी कारण से कोई टीम टूर्नामेंट से हट जाती है, तो उसकी जगह लेने का फैसला फीफा की काउंसिल करती है।आमतौर पर, जिस क्षेत्र (कॉन्फेडरेशन) की टीम बाहर होती है, उसी क्षेत्र की अगली सर्वश्रेष्ठ टीम को मौका मिलता है। ईरान एशिया (AFC) की टीम है। अगर उसे हटाया जाता है, तो हक एशिया की ही किसी अन्य टीम, जैसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का बनता है। इटली यूरोप (UEFA) का हिस्सा है, इसलिए तकनीकी रूप से इटली को शामिल करना फीफा के अपने ही बनाए भौगोलिक नियमों के खिलाफ होगा।

खेल और राजनीति का पुराना विवाद

यह कोई पहली बार नहीं है जब खेल में राजनीति घुसी हो। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रूस की टीम पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन ईरान का मामला थोड़ा अलग है। यहां मांग एक ऐसी टीम को लाने की हो रही है जो क्वालिफाई ही नहीं कर पाई। खेल समीक्षकों का मानना है कि फीफा को ‘नो पॉलिटिक्स इन स्पोर्ट्स’ की अपनी टैगलाइन पर कायम रहना चाहिए। यदि खेल के फैसलों में दूतावासों और सरकारों का दखल बढ़ने लगा, तो खेल की निष्पक्षता खत्म हो जाएगी।

आगे क्या ? 

ईरान की जगह इटली को शामिल करने की मांग फिलहाल एक ‘प्रस्ताव’ ही है। लेकिन इसने यह साफ कर दिया है कि 2026 वर्ल्ड कप के मंच पर सिर्फ फुटबॉल ही नहीं, बल्कि डिप्लोमेसी का मैच भी खेला जाएगा। आने वाले महीनों में फीफा काउंसिल की बैठक होनी है, जिसमें इस मुद्दे पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।क्या फीफा दुनिया के दबाव में झुकेगा? या वह नियमों की रक्षा करेगा? पूरी दुनिया की नजरें अब ज्यूरिख स्थित फीफा मुख्यालय पर हैं। फुटबॉल फैंस बस यही उम्मीद कर रहे हैं कि अंत में जीत खेल की हो, न कि राजनीति की। क्योंकि अंततः फुटबॉल का मजा मैदान के भीतर के गोल में है, बाहर के बयानों में नहीं।

कुल मिलाकर, यह विवाद 2026 विश्व कप की सबसे बड़ी हेडलाइन बन चुका है। ईरान अपनी मेहनत के दम पर खड़ा है, तो इटली अपनी साख और रसूख के सहारे। अब देखना यह है कि 11 जून को जब अमेरिका की धरती पर फुटबॉल का महाकुंभ शुरू होगा, तो वहां तिरंगे के साथ ईरान का राष्ट्रगान गूंजेगा या इटली की नीली जर्सी का जलवा दिखेगा।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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