ब्रिस्टल | पहले मैच में करारी शिकस्त झेलने के बाद इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीम ने जबरदस्त वापसी की है। दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मेजबान टीम ने भारत को 26 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली। इस जीत की सबसे बड़ी स्टार रहीं 21 साल की ऑलराउंडर फ्रेया केम्प, जिन्होंने पहले बल्ले से तबाही मचाई और फिर गेंद से भी भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी,भारत के सामने जीत के लिए 169 रन का टारगेट था, लेकिन टीम इंडिया निर्धारित 20 ओवरों में 9 विकेट खोकर 142 रन ही बना सकी। अब दोनों टीमों के बीच होने वाला तीसरा और आखिरी मैच निर्णायक बन गया है, जहां सीरीज की ट्रॉफी दांव पर होगी।
आखिरी ओवरों में केम्प की आंधी, पलट गया मैच
टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद साधारण रही थी। भारतीय गेंदबाजों ने सटीक लाइन-लेंथ से कसी हुई गेंदबाजी की और नियमित अंतराल पर विकेट चटकाए। एक समय तो ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की टीम 150 रन का आंकड़ा भी नहीं छू पाएगी।लेकिन डेथ ओवरों में फ्रेया केम्प के इरादे कुछ और ही थे। इस बाएं हाथ की बल्लेबाज ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर क्लास ली और महज 13 गेंदों पर नाबाद 39 रनों की तूफानी पारी खेल डाली। अपनी इस पारी में केम्प ने मैदान के हर कोने में चौके-छक्के बरसाए। उनकी इस विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर इंग्लैंड ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 168 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा कर दिया, जिसने मैच का मोमेंटम पूरी तरह इंग्लैंड की तरफ शिफ्ट कर दिया। भारतीय टीम आखिरी ओवरों में रनों की इस रफ्तार को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई।
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भारतीय गेंदबाजों ने अच्छी शुरुआत के बाद गंवाई लय
मैच के शुरुआती और मिडिल ओवरों में भारतीय गेंदबाजों का दबदबा साफ देखने को मिल रहा था। खासकर स्पिनर श्री चरणी ने अपनी फिरकी से इंग्लिश बल्लेबाजों को काफी परेशान किया और महत्वपूर्ण समय पर बड़े विकेट निकाले। चरणी की सधी हुई गेंदबाजी के सामने इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज भी रन बनाने के लिए संघर्ष करते दिखे।लेकिन कहानी डेथ ओवरों में पूरी तरह बदल गई। भारतीय तेज गेंदबाज आखिरी के ओवरों में अपनी लय भटक गए और उन्होंने जमकर रन लुटाए। फुल टॉस और शॉर्ट गेंदों का इंग्लैंड के निचले क्रम ने पूरा फायदा उठाया। यही वो टर्निंग पॉइंट था जहां से मैच भारत की पकड़ से धीरे-धीरे फिसलता चला गया और इंग्लैंड एक मजबूत स्कोर तक पहुंच गया।
मंधाना-यास्तिका की मेहनत पर फिरा पानी
169 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को स्टार ओपनर स्मृति मंधाना और विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने सधी हुई शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए उपयोगी साझेदारी की और पावरप्ले का अच्छा इस्तेमाल किया। 10 ओवर के खेल तक भारतीय टीम काफी मजबूत स्थिति में थी और लक्ष्य तक आसानी से पहुंचती दिख रही थी। मंधाना जहां अपने सिग्नेचर शॉट्स खेल रही थीं, वहीं यास्तिका ने दूसरे छोर को संभाले रखा था। लेकिन जैसे ही यह साझेदारी टूटी, इंग्लैंड के गेंदबाजों ने मैच पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
मिडिल ऑर्डर का सरेंडर और यास्तिका का ‘रिटायर आउट’ ड्रामा
भारतीय टीम की हार की सबसे बड़ी वजह मिडिल ऑर्डर का पूरी तरह कोलैप्स होना रहा। रन रेट का दबाव जैसे ही बढ़ा, आने वाले बल्लेबाज गैर-जिम्मेदाराना शॉट्स खेलकर पवेलियन लौटते गए। इंग्लैंड की स्पिन तिकड़ी के सामने भारतीय मध्यक्रम का कोई भी बल्लेबाज टिककर खेलने का जज्बा नहीं दिखा सका और कोई बड़ी साझेदारी नहीं बन सकी।इस दौरान भारतीय टीम मैनेजमेंट का एक फैसला मैदान के अंदर और बाहर काफी चर्चा में रहा।
रन गति तेज करने के चक्कर में सेट बल्लेबाज यास्तिका भाटिया को ‘रिटायर आउट’ बुलाकर वापस पवेलियन बुला लिया गया। रणनीति यह थी कि नया बल्लेबाज आकर पहली ही गेंद से तेजी से रन बनाएगा, लेकिन यह दांव बिल्कुल उल्टा पड़ गया। नया बल्लेबाज भी कुछ खास नहीं कर सका और टीम दबाव में बिखर गई। क्रिकेट पंडितों के बीच इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है और इसे एक गैर-जरूरी जोखिम माना जा रहा है।

गेंदबाजी में भी चमकीं फ्रेया केम्प
बल्लेबाजी में जलवा बिखेरने के बाद फ्रेया केम्प ने गेंद से भी भारतीय खेमे में तबाही मचाई। उन्होंने भारतीय बैटिंग लाइन-अप के दो सबसे बड़े विकेट—स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स को आउट कर भारत की जीत की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। केम्प की गेंदों में गति और उछाल दोनों था, जिसे पढ़ने में भारतीय बल्लेबाज पूरी तरह नाकाम रहे। इंग्लैंड की पूरी गेंदबाजी यूनिट ने बेहद अनुशासित प्रदर्शन किया और भारतीय टीम को 142 रन पर ही रोक दिया।
अब फाइनल मुकाबले पर नजरें
इस जीत के साथ इंग्लैंड ने न सिर्फ सीरीज में वापसी की है, बल्कि भारतीय टीम के आत्मविश्वास को भी झटका दिया है। सीरीज अब 1-1 की रोमांचक बराबरी पर है। भारत के लिए डेथ ओवरों की गेंदबाजी और मिडिल ऑर्डर की बल्लेबाजी सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई है, जिसे आखिरी मैच से पहले हर हाल में ठीक करना होगा। दूसरी ओर, इंग्लैंड की टीम फ्रेया केम्प के इस जादुई प्रदर्शन से सातवें आसमान पर होगी। अब देखना होगा कि ब्रिस्टल की इस हार से सबक लेकर भारतीय टीम फाइनल मुकाबले में कैसी वापसी करती है।







