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जापान की धरती पर लहराया तिरंगा- आशीष पूर्ति की हैट्रिक से अंडर-18 एशिया कप पर टीम इंडिया का कब्ज़ा

जापान की धरती पर लहराया तिरंगा- आशीष पूर्ति की हैट्रिक से अंडर-18 एशिया कप पर टीम इंडिया का कब्ज़ा
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 7, 2026 11:46 पूर्वाह्न
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टोक्यो। एशियाई जूनियर हॉकी के नक्शे पर भारतीय युवाओं ने एक बार फिर अपनी बादशाहत का डंका बजा दिया है। जापान में खेले गए अंडर-18 एशिया कप के हाई-वोल्टेज खिताबी मुकाबले में भारतीय जूनियर टीम ने मेजबान और डिफेंडिंग चैंपियन जापान को उसी के घर में 4-1 से रौंदकर चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस ऐतिहासिक खिताबी जीत के असली हीरो रहे स्टार फॉरवर्ड आशीष पूर्ति, जिन्होंने जापानी डिफेंस के परखच्चे उड़ाते हुए शानदार हैट्रिक दागी। पूरे टूर्नामेंट में भारत का दबदबा इस कदर रहा कि विरोधी टीमें सिर्फ तमाशबीन बनी रह गईं। इस खिताबी जीत ने साफ कर दिया है कि भारतीय हॉकी का भविष्य बेहद सुरक्षित और सुनहरे हाथों में है।

शुरुआत ऐसी कि जापान को संभलने का मौका ही नहीं मिला

फाइनल मुकाबला शुरू होते ही भारतीय शेरों ने मैदान पर वो आक्रामकता दिखाई, जिसकी उम्मीद शायद जापानी टीम को भी नहीं रही होगी। रेफरी की सीटी बजने के ठीक दूसरे मिनट में—जब दर्शक अभी अपनी सीटों पर ठीक से बैठे भी नहीं थे—भारत ने एक बेहद सटीक मूव बनाते हुए पहला गोल दाग दिया। इस शुरुआती झटके ने मेजबान टीम की रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। 1-0 की बढ़त मिलते ही भारतीय खिलाड़ियों ने मैच की रफ्तार अपने हाथ में ले ली। मिडफील्डर्स ने जापानी खिलाड़ियों को खुलकर सांस तक नहीं लेने दी। तेज-तर्रार पासिंग, डी के भीतर सटीक टैकल और अभेद्य डिफेंस के दम पर भारत ने पूरे मैच में जापान को अपनी उंगलियों पर नचाया।

आशीष पूर्ति: विरोधी टीम के लिए काल बने भारतीय स्ट्राइकर

अगर इस खिताबी मुकाबले को सिर्फ ‘आशीष पूर्ति बनाम जापान’ कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आशीष ने फाइनल जैसे बड़े और दबाव वाले मैच में जो क्लास दिखाई, उसने मैदान पर मौजूद हर खेल प्रेमी का दिल जीत लिया। उन्होंने जापानी रक्षापंक्ति के व्यूह को भेदते हुए एक के बाद एक तीन गोल दागे और अपनी शानदार हैट्रिक पूरी की। आशीष की बिजली जैसी रफ्तार, गजब के स्टिक वर्क और गोल पोस्ट के सामने उनके ठंडे दिमाग ने विपक्षी टीम के हौसले पस्त कर दिए। जब भी जापान वापसी की कोशिश करता, आशीष का कोई न कोई मूव उनके अरमानों पर पानी फेर देता।आशीष का यह प्रदर्शन सिर्फ फाइनल तक सीमित नहीं था। वे पूरे टूर्नामेंट में भारतीय आक्रमण की रीढ़ बने रहे। विपक्षी टीमों के कोचों के पास आशीष की रफ्तार और सटीक निशानों का कोई तोड़ नहीं था।गौरतलब है कि सेमीफाइनल के हाई-वोल्टेज मैच में भी जब सामने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान की टीम थी, तब भी आशीष ने अकेले दम पर चार गोल दागकर पाकिस्तान को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया था।

सेमीफाइनल में पाकिस्तान को चटाई थी धूल

फाइनल की डगर भारत के लिए इतनी आसान नहीं थी, लेकिन सेमीफाइनल में मिली बड़ी जीत ने टीम के हौसलों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था। पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए उस नॉकआउट मुकाबले में भारतीय टीम ने अनुशासन और आक्रामकता का बेजोड़ नमूना पेश किया था। खिलाड़ियों के बीच की लाजवाब केमिस्ट्री और आशीष पूर्ति के चार गोलों की मदद से भारत ने पाकिस्तान को एकतरफा अंदाज में शिकस्त दी थी। उस बड़ी जीत से मिले आत्मविश्वास का सीधा फायदा टीम को फाइनल में मिला, जहां उन्होंने दबाव को अपने पास फटकने भी नहीं दिया।

आशीष पूर्ति की हैट्रिक से अंडर-18 एशिया कप पर टीम

सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, टीम वर्क से जीता मैदान

भले ही अखबारों की सुर्खियां और ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का सेहरा आशीष पूर्ति के सिर बंधा हो, लेकिन भारतीय टीम की इस सफलता की असली कुंजी उनका मजबूत टीम वर्क रहा। फॉरवर्ड लाइन को लगातार गेंद सप्लाई करने वाले मिडफील्डर्स और गोलपोस्ट के आगे दीवार बनकर खड़े रहने वाले डिफेंडर्स ने पूरे टूर्नामेंट में कमाल का अनुशासन दिखाया। कोच की बनाई रणनीति को मैदान पर हूबहू लागू करना और मुश्किल पलों में एक-दूसरे का बैकअप बनना, इस टीम की सबसे बड़ी ताकत रही। यही वजह है कि टूर्नामेंट की हर मजबूत टीम भारत के इस चक्रव्यूह में फंसकर रह गई।

सीनियर टीम के लिए तैयार हो रही है नई खेप

अंडर-18 के स्तर पर मिली यह धमाकेदार जीत भारतीय हॉकी के लिए एक बेहद शुभ संकेत है। पिछले कुछ सालों में जमीनी स्तर पर जूनियर खिलाड़ियों को तराशने के लिए जो निवेश और मेहनत की गई है, यह स्वर्ण पदक उसी का नतीजा है। इन युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव को झेलने और बड़ी टीमों को डोमिनेट करने का जो जज्बा दिखाया है, वह आने वाले दिनों में सीनियर नेशनल टीम को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

जापान की धरती पर मिली इस गूंजती हुई जीत ने करोड़ों भारतीय खेल प्रशंसकों को जश्न मनाने का मौका दे दिया है। इन युवा हीरों ने यह साबित कर दिया है कि एशिया में हॉकी का असली किंग कौन है। अब देश को उम्मीद है कि ये खिलाड़ी जूनियर लेवल के इस सफर को सीनियर स्तर पर भी इसी तरह जारी रखेंगे और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी तिरंगा लहराएंगे।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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