सिएटल ।मैदान पर न तो क्रिस्टियन पुलिसिक थे और न ही किसी को उम्मीद थी कि मुकाबला इतना एकतरफा हो जाएगा। लेकिन सिएटल के खचाखच भरे स्टेडियम में जो हुआ, उसने इतिहास के पन्नों को पलट कर रख दिया। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के एक बेहद हाई-वोल्टेज मुकाबले में सह-मेजबान अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से चारों खाने चित कर दिया। इस धमाकेदार जीत के साथ ही अमेरिकी टीम ने राउंड ऑफ 32 का अपना टिकट पक्का कर लिया है। ग्रुप-डी के इस मैच में शुरू से लेकर अंत तक अमेरिकी खिलाड़ियों ने मैच को अपनी उंगलियों पर नचाया।यह जीत सिर्फ तीन अंकों की कहानी नहीं है, बल्कि इस मैच ने पूरे 96 साल पुराना एक ऐसा रिकॉर्ड तोड़ डाला है जिसे सुनकर अमेरिकी फैंस झूम उठे हैं। पुरुष फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास में करीब एक सदी बीत जाने के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिका ने लगातार दो बैक-टू-बैक मैचों में जीत का स्वाद चखा है।
ऑस्ट्रेलिया का आत्मघाती ब्लंडर और पहला झटका
मैच की शुरुआत से ही अमेरिका ने अपनी मंशा साफ कर दी थी। उनकी फॉरवर्ड लाइन ने ऑस्ट्रेलियाई खेमे पर ऐसा धावा बोला कि विपक्षी टीम संभल ही नहीं पाई। लगातार बढ़ते प्रेशर के बीच मैच का पहला टर्निंग पॉइंट तब आया जब ऑस्ट्रेलियाई डिफेंडर कैमरून बर्गेस एक भारी भूल कर बैठे। अमेरिकी फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन के आक्रामक मूव को रोकने के चक्कर में बर्गेस ने गेंद को अपने ही गोलपोस्ट की राह दिखा दी। इस आत्मघाती गोल ने सिएटल के दर्शकों को जश्न मनाने का पहला मौका दे दिया।पहला गोल खाने के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम एकदम बिखरी-बिखरी नजर आई। उनके पास अमेरिका के काउंटर-अटैक का कोई जवाब नहीं था। मिडफील्ड में वेस्टन मैकेनी, टायलर एडम्स और मलिक टिलमैन की तिकड़ी ने गेंद पर ऐसा कब्जा जमाया कि कंगारू टीम सिर्फ गेंद के पीछे भागती रह गई।
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फ्रीमैन का हेडर और हाई-वोल्टेज ड्रामा
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। पहले हाफ के खत्म होने में बस कुछ ही मिनट बचे थे कि तभी स्टेडियम में मौजूद हर शख्स अपनी सीट से उछल पड़ा। युवा डिफेंडर एलेक्स फ्रीमैन ने हवा में छलांग लगाते हुए एक कड़क हेडर के जरिए गेंद को सीधे जाल में धकेल दिया। पूरा स्टेडियम गूंज उठा, लेकिन तभी लाइंसमैन ने ऑफसाइड का झंडा उठाकर सन्नाटा खींच दिया।इसके बाद शुरू हुआ वीएआर का सविस्तार रिव्यू। कुछ मिनटों की सांस रोक देने वाली कशमकश के बाद मुख्य रेफरी ने इशारा किया—गोल बिल्कुल सही है! 2-0 की बढ़त मिलते ही पूरा अमेरिकी खेमा खुशी से पागल हो गया। वर्ल्ड कप में अपना पहला इंटरनेशनल गोल दागने वाले फ्रीमैन ने मैच के बाद अपनी रुलाई रोकते हुए कहा, “जब रेफरी ने गोल का इशारा किया, तो मुझे लगा मेरा कोई पुराना सपना सच हो गया। यह फीलिंग शब्दों में बयान नहीं हो सकती।”
दूसरे हाफ में कोच पोपोविच के पैंतरे भी रहे बेअसर
दो गोल से पिछड़ने के बाद ऑस्ट्रेलियाई कोच टोनी पोपोविच के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थीं। मैच बचाने के लिए उन्होंने दूसरे हाफ में पूरी ताकत झोंक दी। नेस्टोरी इरांकुंडा और कॉनर मेटकाफ जैसे तेज-तर्रार खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा गया। कुछ देर के लिए ऑस्ट्रेलिया ने मैच की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश भी की और अमेरिकी डिफेंस पर हमले बोले।लेकिन, अमेरिकी गोलकीपर और बैकलाइन के इरादे कुछ और ही थे। टिम रीम और क्रिस रिचर्ड्स की अगुआई में अमेरिकी डिफेंस ने मैदान पर एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी थी, जिसे भेद पाना ऑस्ट्रेलियाई स्ट्राइकर्स के बस की बात नहीं दिखी। अमेरिका ने चतुराई से खेल की रफ्तार को धीमा किया, गेंद को अपने पास होल्ड किया और ऑस्ट्रेलिया की वापसी की बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।

पोचेटिनो की राहत और नॉकआउट का रास्ता
इस पूरी जीत का एक सबसे बड़ा पहलू यह रहा कि पिछले नौ इंटरनेशनल मैचों से चले आ रहे खराब सिलसिले को तोड़ते हुए अमेरिका ने आखिरकार एक ‘क्लीन शीट’ (बिना कोई गोल खाए मैच जीतना) हासिल की। नए कोच मौरिसियो पोचेटिनो के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।अब ग्रुप-डी की अंक तालिका में 6 अंकों के साथ अमेरिका शान से सबसे आगे है और नॉकआउट की रेस में सबसे पहले पहुंचने वाले देशों में शुमार हो चुका है। अमेरिकी टीम का अगला इम्तिहान अब तुर्की के खिलाफ होगा। वहीं दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के लिए अब करो या मरो वाली स्थिति बन गई है, उन्हें टूर्नामेंट में बने रहने के लिए पराग्वे को हर हाल में हराना ही होगा।मैच खत्म होने के बाद कोच पोचेटिनो ने बेहद संतुलित बयान देते हुए कहा, “यह जीत बेहतरीन है, लेकिन हमें जमीन पर पैर टिकाए रखने होंगे। यह सिर्फ शुरुआत है, इस टीम में विश्व कप के मंच पर कुछ बहुत बड़ा करने की भूख साफ दिख रही है।” बहरहाल, बिना पुलिसिक के मिली इस एकतरफा जीत ने यह तो साफ कर दिया है कि घरेलू मैदान पर खेल रही अमेरिकी टीम को इस बार हल्के में लेना किसी भी टीम के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।







