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Mustard Oil in US: अमेरिका में खाने के लिए क्यों बैन है सरसों का तेल? जानिए FDA के नियम, वजह और इसके फायदे

Mustard Oil in US: अमेरिका में खाने के लिए क्यों बैन है सरसों का तेल? जानिए FDA के नियम, वजह और इसके फायदे
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 29, 2026 12:06 अपराह्न
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भारतीय रसोई में सरसों का तेल स्वाद और सेहत दोनों के लिए खास माना जाता है, लेकिन अमेरिका में इसे खाद्य तेल के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। वहां बिकने वाली सरसों के तेल की बोतलों पर “For External Use Only” लिखा होता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह, FDA के नियम और इस तेल को लेकर वैज्ञानिकों की अलग-अलग राय।

अमेरिका में सरसों का तेल खाने पर क्यों है रोक?

अमेरिका में सरसों के तेल पर लगे प्रतिबंध का मुख्य कारण इसमें पाया जाने वाला इरुसिक एसिड (Erucic Acid) है। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के अनुसार, सरसों के तेल में इस फैटी एसिड की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है।

1970 के दशक में चूहों पर किए गए कुछ शोधों में दावा किया गया था कि अत्यधिक मात्रा में इरुसिक एसिड का सेवन हार्ट मसल्स में फैट जमा कर सकता है। इस स्थिति को मायोकार्डियल लिपिडोसिस (Myocardial Lipidosis) कहा जाता है। इन्हीं अध्ययनों के आधार पर अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने सरसों के तेल को खाद्य तेल के रूप में असुरक्षित मानते हुए इसके खाने पर प्रतिबंध लगा दिया।

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बैन के बावजूद अमेरिका में हार्ट डिजीज के मामले अधिक

हालांकि अमेरिका में सरसों के तेल के खाद्य उपयोग पर रोक है, लेकिन American Heart Association (AHA) की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार वहां हृदय संबंधी बीमारियां अब भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल करीब 9,33,782 लोगों की मौत कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों, जिनमें हार्ट डिजीज और स्ट्रोक शामिल हैं, के कारण होती है। औसतन हर 34 सेकंड में एक व्यक्ति की जान हृदय संबंधी बीमारी से जाती है।

यदि केवल हार्ट अटैक की बात करें, तो अमेरिका में हर वर्ष लगभग 8,05,000 मामले सामने आते हैं। इनमें करीब 6,05,000 लोगों को पहली बार हार्ट अटैक आता है, जबकि लगभग 2,00,000 लोग पहले भी हार्ट अटैक झेल चुके होते हैं।

हार्ट रोगों की प्रमुख वजह क्या है?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में हृदय रोगों की अधिक संख्या का कारण सरसों का तेल नहीं बल्कि वहां की जीवनशैली मानी जाती है। सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट, रिफाइंड शुगर, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, धूम्रपान और अत्यधिक कैलोरी वाली डाइट हार्ट डिजीज के प्रमुख कारण बताए गए हैं।

सरसों के तेल के क्या हैं फायदे?

हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है

American Heart Association (AHA) के अनुसार, सरसों के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFA) और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA) का संतुलन पाया जाता है। ये हेल्दी फैट माने जाते हैं, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

हार्वर्ड की क्या है राय?

हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ का कहना है कि रिफाइंड तेलों की तुलना में MUFA और PUFA से भरपूर तेलों को आहार में शामिल करना कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

इम्यूनिटी और पाचन के लिए भी लाभकारी

सरसों के तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी मौजूद होते हैं। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। कई बड़ी स्टडीज के अनुसार, सीमित मात्रा में सरसों के तेल का उपयोग हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने से भी जुड़ा हुआ माना गया है। यह रिफाइंड ऑयल्स की तुलना में अधिक प्राकृतिक माना जाता है क्योंकि इसे अक्सर कोल्ड-प्रेस्ड या कच्ची घानी विधि से तैयार किया जाता है

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क्या सरसों के तेल पर लगा बैन सही है?

सरसों के तेल पर प्रतिबंध को लेकर वैज्ञानिकों और न्यूट्रिशन विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि 1970 के दशक में चूहों पर किए गए अध्ययन इंसानों पर सीधे लागू नहीं किए जा सकते, क्योंकि उनमें इरुसिक एसिड की मात्रा बहुत अधिक दी गई थी।

दिलचस्प बात यह भी है कि सरसों के तेल में मौजूद इरुसिक एसिड की मात्रा कम करके ही कैनोला ऑयल विकसित किया गया, जिसे अमेरिका में सुरक्षित खाद्य तेल माना जाता है।

कुछ विशेषज्ञ इस प्रतिबंध को केवल वैज्ञानिक सावधानी नहीं बल्कि आर्थिक कारणों से भी जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि अमेरिका में सरसों का तेल मुख्य रूप से आयुर्वेदिक उपयोग या मालिश जैसे बाहरी इस्तेमाल के लिए बेचा जाता है।

भारत में क्या है स्थिति

भारत में सरसों का तेल वर्षों से भोजन का हिस्सा रहा है और सीमित मात्रा में इसके उपयोग को हृदय के लिए लाभकारी माना जाता है। हालांकि अमेरिका में इसे खाद्य तेल के रूप में बेचना आज भी गैर-कानूनी है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि सरसों के तेल का उपयोग किया जाए तो कोल्ड-प्रेस्ड या कच्ची घानी वाला तेल चुनना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट अधिक सुरक्षित रहते हैं। कई विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में इसका सेवन हृदय के लिए नुकसानदायक नहीं माना जाता।

Conclusion

अमेरिका में सरसों के तेल पर लगा प्रतिबंध मुख्य रूप से इरुसिक एसिड से जुड़ी पुरानी रिसर्च पर आधारित है। वहीं दूसरी ओर, कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ सीमित मात्रा में इसके उपयोग को सुरक्षित और लाभकारी मानते हैं। हार्ट हेल्थ पर असर केवल किसी एक तेल से नहीं बल्कि संपूर्ण जीवनशैली, खान-पान और शारीरिक गतिविधियों पर भी निर्भर करता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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