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India’s Global Stride in Supercomputing – सुपरकंप्यूटिंग में भारत का वैश्विक मुकाम

सुपरकंप्यूटिंग में भारत
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 11, 2025 7:36 अपराह्न
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भारत की तकनीकी दुनिया आज एक नए युग में प्रवेश कर रही है। सुपरकंप्यूटिंग, यानी अति-उच्च-शक्ति वाली कंप्यूटिंग, अब भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुकी है। सरकार की नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) ने देश को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक मज़बूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। आज के राष्ट्रीय समाचार के अनुसार, भारत ने 37 स्वदेशी सुपरकंप्यूटरों को तैनात किया है और आगे के “NSM 2.0” कार्यक्रम के तहत प्रि-एक्सास्केल (Pre-Exascale) सुपरकंप्यूटर हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जो देश को विश्वस्तरीय वैज्ञानिक गणना क्षमताओं की सूची में ऊपर ले जाएगा।

सुपरकंप्यूटिंग में भारत

नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) — भारत की उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग यात्रा

भारत में नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन की शुरुआत 2015 में हुई थी, जिसका लक्ष्य था देश में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (High Performance Computing – HPC) क्षमताएँ विकसित करना और शोध, विज्ञान तथा उद्योग में इसका व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना। मिशन के तहत देश भर के शोध संस्थानों, उच्च-शिक्षा केंद्रों और आर-एंड-डी लैब्स में सुपरकंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

2025 तक इस मिशन के चरण-1 में 37 सुपरकंप्यूटरों को तैनात किया गया है, जिनकी कुल संयुक्त क्षमता लगभग 40 पेटाफ्लॉप्स है — यानी एक सेकंड में 40 गुणा 101510^151015 ऑपरेशन। इन मशीनों को स्वदेशी Rudra सर्वर और PARAM श्रृंखला का उपयोग करके बनाया गया है, जो भारतीय तकनीकी क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। 

ये सुपरकंप्यूटर देश के कई प्रमुख संस्थानों — जैसे IISc बेंगलुरु, IITs, C-DAC पुणे, GMRT-NCRA पुणे और कई Tier-II/III शहरों में भी स्थापित किए गए हैं। इन मशीनों का उपयोग मौसम पूर्वानुमान, सामग्री विज्ञान, दवा खोज, जलवायु मॉडलिंग, भूकंपीय अनुसंधान, एरोस्पेस इंजीनियरिंग और जैविक विज्ञान जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रहा है।

NSM 2.0 — प्रि-एक्सास्केल की ओर भारत का लक्ष्य

अब NSM का अगला चरण, जिसे NSM 2.0 कहा जा रहा है, 2027-28 तक प्रि-एक्सास्केल कंप्यूटिंग क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है। प्रि-एक्सास्केल से मतलब है कि कंप्यूटर हर सेकंड 101710^{17}1017 से 101810^{18}1018 तक ऑपरेशन कर सकता है — यह क्षमता आज के अधिकांश सुपरकंप्यूटरों से कहीं अधिक है। इस लक्ष्य के साथ भारत एक्सास्केल के दायरे में कदम रखने की दिशा में अग्रसर होगा, जिससे वैश्विक कंप्यूटिंग शक्ति के शीर्ष स्तर का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।

NSM 2.0 के तहत विकसित होने वाली प्रणालियाँ भारत को दुनिया के शीर्ष चार-पांच देश में ला सकती हैं जिनके पास इस स्तर की कंप्यूटिंग शक्ति उपलब्ध होगी। इस क्षमता से वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भारत का मुकाम और मजबूती से उभर सकता है।

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वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत का महत्व

दुनिया भर में सुपरकंप्यूटिंग शक्ति का उपयोग दशकों से शोध और उद्योग के लिए हो रहा है — उदाहरण के लिए मौसम मॉडलिंग, औषधि विकास, एआई ट्रेनिंग मॉडल, तथा भूकंपीय-भौतिकी जैसे क्षेत्रों में। अब इसी तकनीक के तेजी से विकास के साथ, भारत भी इस प्रतियोगिता का हिस्सा बन चुका है।

हालांकि अभी तक कुछ वैश्विक सुपरकंप्यूटर्स (जैसे अमेरिका, चीन और जापान में उच्च-स्तरीय मशीनें) टॉप-500 सूचि में मौजूद हैं, भारत की प्रगति भी संरचनात्मक रूप से उल्लेखनीय है। यह केवल मशीन लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वदेशी कंप्यूटिंग स्टैक बनाना, स्थानीय इकाइयों का विकास, और भारतीय शोध समुदाय को संसाधन देना भी शामिल है।

इस दिशा में सरकार और इंडस्ट्री दोनों मिलकर काम कर रहे हैं। India Semiconductor Mission (ISM) का लक्ष्य भी 2030 तक पूरी तरह से स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम्स विकसित करना है, जिसमें CPUs, GPUs, और AI एक्सेलेरेटर्स जैसे महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। इससे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे।

सुपरकंप्यूटिंग के लाभ — विज्ञान, उद्योग और अनुसंधान में तेजी

भारत में सुपरकंप्यूटिंग के विस्तार के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:

  1. अनुसंधान और नवाचार में वृद्धि: शोधकर्ता अत्यंत बड़े डेटा और जटिल मॉडल चलाने के लिए इन मशीनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे नई खोजों और वैज्ञानिक प्रकाशनों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है।
  2. उद्योगों का सुदृढ़ीकरण: दवा खोज, सामग्री विज्ञान, एयरोस्पेस, मौसम पूर्वानुमान और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अधिक तेज़ और सटीक कंप्यूटेशन संभव हुआ है।
  3. शिक्षा और कौशल विकास: Tier-II और Tier-III शहरों के शोध संस्थान और विद्यार्थी भी राष्ट्रीय संसाधनों का लाभ उठा रहे हैं, जिससे देश में HPC और AI कौशल का विस्तार हो रहा है।
  4. राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीति: उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग शक्ति का उपयोग रक्षा अनुसंधान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और ऊर्जा संरचना में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

चुनौतियाँ और आगे का मार्ग

जहाँ भारत ने सुपरकंप्यूटिंग में उल्लेखनीय प्रगति की है, वहीं कुछ चुनौतियाँ भी हैं। पूरी तरह से स्वदेशी कंप्यूटिंग हार्डवेयर का विकास, जैसे घरेलू CPU और AI एक्सेलेरेटर्स, अभी भी लंबी अवधि के कार्य हैं। इसके लिए नीतिगत सहयोग, निवेश और तकनीकी साझेदारियों की आवश्यकता होगी।

लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत का लक्ष्य केवल मौजूदा संसाधनों का उपयोग नहीं है — बल्कि एक ऐसा स्वावलंबी और नवीन सुपरकंप्यूटिंग इकोसिस्टम विकसित करना है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को लीडरशिप प्रदान करे।

निष्कर्ष

आज भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। 37 सुपरकंप्यूटरों का तैनात होना, 40 पेटाफ्लॉप क्षमता, NSM 2.0 के लिए लक्ष्य, और 2030 तक पूरी तरह से स्वदेशी सिस्टम विकसित करने की योजना — ये सभी संकेत हैं कि भारत तकनीकी शक्ति के क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल कर रहा है। उस मुकाम से न केवल शोध और उद्योग को लाभ मिलेगा, बल्कि भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में भी अग्रसर होगा।

Shivanshu Mehta

मैं एक अनुभवी समाचार सामग्री लेखक हूँ, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर गहन, सटीक और प्रभावी लेखन में विशेषज्ञता रखता हूँ। ताज़ा खबरों, विश्लेषणात्मक रिपोर्टों और विशेष फीचर स्टोरीज़ को स्पष्टता और विश्वसनीयता के साथ पाठकों तक पहुँचाना मेरी प्राथमिकता है।

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