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PM Modi with Alexandr Wang – एलेक्‍जेंडर वांग, MIT से ड्रॉपआउट से AI अरबपति बनने तक कीअसाधारण यात्रा, PM मोदी नें मुलाकात की तस्वीर की साझा

एलेक्‍जेंडर वांग
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 12, 2025 1:31 अपराह्न
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पेरिस में हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक्शन समिट में दुनियाभर के नेता और टेक दिग्गज एआई के भविष्य पर चर्चा करने जुटे। इस समिट की मेजबानी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। स्केल एआई के संस्थापक और सीईओ एलेक्‍जेंडर वांग की मौजूदगी ने एआई इंडस्ट्री में उनके प्रभाव को दर्शाया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रॉन के साथ दिखाई दिए।

PM Modi with Alexandr Wang

वांग ने खुद सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट करके बताया, ‘पेरिस में नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रॉन से मिलकर बहुत अच्छा लगा!’ जिसके बाद न सिर्फ तस्वीरें लगातार साझा की जा रही है बल्कि सोशल मीडिया में लगातार एलेक्‍जेंडर वांग सर्च किये जा रहे हैं और लोग उनके बारें में जानना चाहते है। तो चलिये आपको विस्तार से बताते हैं कि एलेक्‍जेंडर वांग कौन है और भारत सहित समूची दुनियां में वह क्यों चर्चाओं में है।

न्यू मैक्सिको के वैज्ञानिक परिवार में जन्म

लॉस अलामोस, न्यू मैक्सिको के 1997 में जन्मे एलेक्जेंडर वांग का जन्म किसी साधारण परिवार में नहीं, बल्कि दो वैज्ञानिक माता-पिता के घर हुआ। पिता और मां दोनों नाभिकीय अनुसंधान और भौतिकी के क्षेत्र से जुड़े रहे। बचपन से ही वांग में गणित और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का असाधारण कौशल दिखा, जिसने भविष्य में उनके करियर की दिशा तय की।

शिक्षा और शुरुआती रुचि

एलेक्जेंडर ने अपनी कक्षा की पढ़ाई सामान्य से थोड़ा आगे जाकर की। उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया,लेकिन यह वह जगह नहीं बनी जहां वे अपना भविष्य बिताना चाहते थे। तकनीक और खोज की अस्पष्ट संभावनाओं ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के बजाए कार्यकारी दुनिया में उतरने का निर्णय लिया।

MIT छोड़कर उद्यमिता की ओर बढ़ाया कदम

MIT से हटने के बाद वांग ने अकेले नहीं, बल्कि साझेदारी में Scale AI की स्थापना 2016 में की। शुरुआत केवल एक छोटे AI डेटा-लेबलिंग और मॉडल संभाव्य मूल्यांकन (model evaluation) कंपनी के रूप में हुई, लेकिन इसकी क्षमता बहुत तेज़ी से बढ़ने लगी। Scale AI का मुख्य लक्ष्य था मशीन लर्निंग और एआई सिस्टम को वास्तविक दुनिया के डेटा से प्रशिक्षित करना, जो उस समय तकनीकी जगत में विशेषकर बड़े-बड़े AI मॉडलों के निर्माण के लिए एक अभूतपूर्व आवश्यकता बन चुकी थी।

Scale AI, बढ़ती शक्ति और वैश्विक विस्तार

Scale AI ने शुरुआती वर्षों में ही उद्योग के दिग्गजों के साथ बड़े समझौते किए।जिनमें अमेरिकी सेना, बड़े टेक कंपनियां तथा सरकारी एजेंसियां शामिल रहीं। यह बहुराष्ट्रीय स्तर पर AI तकनीकों के लिए डेटा सेवाएं और मॉडल मूल्यांकन प्रदान करता है।

फोर्ब्स के अनुसार “सबसे कम उम्र के सेल्फ-मेड अरबपति”

2021 में वांग की हिस्सेदारी और Scale AI की बढ़ती वैल्यूएशन ने उन्हें 24 साल की उम्र में दुनिया के सबसे यंग सेल्फ-मेड अरबपतियों में शामिल कर दिया। Scale AI की वैल्यूएशन उस समय $7.3 बिलियन तक पहुंच चुकी थी, जिससे वांग के पास लगभग 15% हिस्सेदारी थी। यह उपलब्धि न केवल तकनीक-उद्योग में सामर्थ्य का सूचक थी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उद्यमिता और नवाचार में पारंपरिक शिक्षा पथ से हटकर भी दुनिया-स्तरीय सफलता संभव है।

Meta से साझेदारी, Superintelligence Labs का नेतृत्व, 2025 में आया एक बड़ा मोड़

Meta (पूर्व में Facebook) ने Scale AI में भारी निवेश किया और वांग को अपनी Superintelligence Labs का नेतृत्व देने का निर्णय लिया। Meta ने Scale AI में लगभग $14.3 बिलियन का निवेश किया, और इसके साथ ही वांग को Meta के AI विभाग का प्रमुख (Chief AI Officer) नियुक्त किया गया। Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने सार्वजनिक रूप से कहा कि आने वाले दशक में AI, जवाहरातों के समान, Meta की मुख्य तकनीकी दिशा होगी, और ऐसे में वांग जैसे युवा प्रतिभाशाली नेतृत्व की भूमिका केंद्रीय होगी। इस साझेदारी के तहत वांग न केवल Meta की AI प्रोडक्ट्स टीम को संचालित कर रहे हैं, बल्कि AI सुरक्षा, पर्यवेक्षण और मानव-मूल्यांकन विधियों के लिए भी रणनीति विकसित कर रहे हैं।जो कि भविष्य के ‘Artificial Superintelligence (ASI)’ की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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एलेक्जेंडर वांग की नेट वर्थ और वित्तीय परख

वांग की व्यक्तिगत संपत्ति और नेट वर्थ को लेकर कई आंकड़े सार्वजनिक हैं, जो अलग-अलग स्रोतों से आते हैं। Forbes के अनुसार, 2025 में उनकी नेट वर्थ लगभग $3.6 बिलियन (लगभग ₹30,000 करोड़+) थी। कुछ वित्तीय विश्लेषणों के अनुसार, Meta और Scale AI के निवेशों तथा उनके शेयर पैकेज की वजह से यह आंकड़ा $2.8 से $3.2 बिलियन के बीच भी आंका गया है।
ये संख्याएँ दर्शाती हैं कि वांग दुनिया के सबसे कम उम्र के टेक अरबपतियों में से एक हैं, और तकनीक उद्योग में उनकी आर्थिक स्थिति लगातार प्रगति पर है।

वैश्विक AI नीति, सुरक्षा, अनुसंधान नेटवर्क के भी मुख्य चेहरा बनें वांग

वांग का दौड़ केवल धन तक सीमित नहीं है; वे वैश्विक AI नीति, सुरक्षा तथा अनुसंधान नेटवर्क के भी मुख्य चेहरे बन चुके हैं। 2023 में उन्होंने Expedia Group के बोर्ड में भी जगह बनाई, और अमेरिकी सरकार के सामने AI के संदर्भ में महत्वपूर्ण गवाही भी दी। उनका नेतृत्व न केवल तकनीकी निष्पादन पर केंद्रित है, बल्कि AI नैतिकता, डेटा-सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों में भी प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। जो आज तकनीकी दुनिया के सर्वाधिक चर्चित मुद्दों में से एक हैं।

MIT छोड़कर स्पष्ट लक्ष्य, योजना और जुनून को किया पूरा

एलेक्जेंडर वांग की कहानी अक्सर ’MIT ड्रॉपआउट’ कहकर सामने आती है, लेकिन इस कहानी का मतलब केवल पढ़ाई छोड़ देना नहीं है, बल्कि जोखिम लेना, दिशा बदलना और अवसर का सही समय पहचानना भी है। उन्होंने दिखाया कि कभी-कभी पारंपरिक शिक्षा से हटकर व्यावहारिक दुनिया में उतर जाना भी सफलता की कुंजी हो सकता है, बशर्ते व्यक्ति में स्पष्ट लक्ष्य, योजना और जुनून हो।

आज वांग युवा एंटरप्रेन्यूरों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। विशेषकर उन लोगों के लिए जो AI, मशीन लर्निंग और तकनीक के क्षेत्र में नए विचार और प्रतिस्पर्धी उत्पाद लेकर आएंगे।

जहाँ तकनीकी उन्नति और AI के अवसर विश्व को नई दिशाएँ दे रहे हैं, वहीं नैतिकता, गोपनीयता, सामाजिक प्रभाव और वैश्विक AI सुरक्षा जैसे मुद्दे भी चुनौती बनकर सामने हैं। एलेक्जेंडर वांग Meta के Superintelligence Labs का नेतृत्व करते हुए इन समीकरणों पर काम कर रहे हैं। एक ऐसा क्षेत्र जहाँ मानव-स्तरीय AI (Artificial General Intelligence/ASI) के निर्माण, उपयोग और नियंत्रण के बीच संतुलन स्थापित करना शामिल है। यह केवल तकनीक का नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य का भी सवाल है,और वांग जैसे युवा तकनीक नेताओं की भूमिका इसमें निर्णायक हो सकती है।

एलेक्जेंडर वांग की कहानी यह साबित करती है कि परंपरागत शिक्षा पथ से हटकर भी, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और जोखिम उठाने की क्षमता हो, तो व्यक्ति असाधारण सफलता हासिल कर सकता है। MIT का छात्र छोड़कर AI के सबसे बड़े मंचों पर और Meta जैसे वैश्विक दिग्गज के साथ काम करने तक की यात्रा न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह आज के डिजिटल युग में सपने सच करने की नई परिभाषा भी बन चुकी है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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