गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय तकनीकी सम्मेलन-2025 में दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय (DDU) के पांच विद्यार्थियों का चयन किया गया है। यह सभी छात्र 5 और 6 फरवरी 2025 को ISRO के यू.आर. राव उपग्रह केंद्र, बंगलूरु में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तरीय सम्मेलन में भाग लेंगे और अपनी शोध-प्रस्तुतियाँ साझा करेंगे। इस उपलब्धि ने न केवल विश्वविद्यालय के शैक्षणिक समुदाय में उत्साह और गर्व की लहर पैदा की है, बल्कि यह भारत के युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी स्थापित करती है।

अखिल भारतीय तकनीकी सम्मेलन 2025 का परिचय
अखिल भारतीय तकनीकी सम्मेलन 2025, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा आयोजित किया जा रहा है, विज्ञान, तकनीक, नवप्रवर्तन और युवा प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने का एक बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल शोध-पत्र प्रस्तुत करना नहीं बल्कि प्रतिभागियों को प्रमुख वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और अंतरिक्ष अनुसंधान के अग्रणी विचारकों के साथ संवाद और नेटवर्किंग का अवसर प्रदान करना भी है।
ISRO जैसे संस्थान द्वारा आयोजित इस तरह के आयोजन वैज्ञानिक कौशल, अनुसंधान की गुणवत्ता और वास्तविक-विश्व तकनीकी चुनौतियों से निपटने की क्षमता को विकसित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं। सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागी विभिन्न प्रस्तुति सत्रों, तकनीकी चर्चाओं, और इंटरैक्टिव कार्यशालाओं का हिस्सा बनेंगे, जिनसे उन्हें अपने कैरियर, शोध और पेशेवर नेटवर्क दोनों के विकास में मदद मिलेगी।
DDU विश्वविद्यालय के चयनित छात्रों की है उल्लेखनीय उपलब्धियाँ
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकी विभाग के पाँच छात्र-छात्राओं को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया है। जिनमें प्रियांश यादव, विजय कुमार, तन्वी राव, अंकिता मौर्या, अमन मौर्या है।
ये सभी विद्यार्थी बी.एससी. (गणित) के तृतीय सेमेस्टर के छात्र हैं और उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी शोध-प्रस्तुतियाँ तैयार की हैं। उनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर इसरो के सम्मेलन में शोध-पत्र प्रस्तुत करने के लिए हुआ है, जो कि उनके लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है।
क्या है चयन की प्रक्रिया और इसके पीछे की मेहनत
इन छात्रों के चयन के पीछे न केवल व्यक्तिगत प्रतिभा और परिश्रम है, बल्कि उनके विभाग और मार्गदर्शक का समर्पित योगदान भी रहा है। इनके शोध-पत्रों के निर्देशन एवं मार्गदर्शन के लिए डॉ. राजेश कुमार का नाम उल्लेखनीय है, जिन्होंने इन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सक्षम और पेशेवर रूप से तैयार किया। चयन की प्रक्रिया काफी कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक मानी जाती है। देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों ने अपने शोध-पत्र भेजे, जिनमें से श्रेष्ठ विषयों और शोध-कार्य को राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए चुना गया।
एक संस्थान से 5 का चयन ISRO में, बड़ी उपलब्धि
DDU के छात्रों का चयन एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि यह संख्या एक ही संस्थान से इतनी बड़ी समूह की है। जो यह संकेत देता है कि भारतीय युवा छात्र अंतरिक्ष विज्ञान तथा प्रौद्योगिकियों में गंभीरता से रुचि ले रहे हैं और तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर हैं।
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सम्मेलन का तकनीकी और शैक्षणिक महत्व
ISRO का अखिल भारतीय तकनीकी सम्मेलन युवा वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष विज्ञान, शोध के सिद्धांतों, प्रयोगात्मक तकनीकों और वास्तविक-विश्व वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने का एक मंच प्रदान करता है। सम्मेलन में प्रशिक्षण सत्र, नवाचार प्रदर्शन, और तकनीकी वार्ता शामिल होती है, जिनमें शीर्ष वैज्ञानिक, शोधकर्ता और तकनीकी उद्योग के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
इस आयोजन का लक्ष्य तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच, नवप्रवर्तन की संस्कृति और अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। यह सम्मेलन प्रतिभागियों को एक वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के अंदर संवाद स्थापित करने,सहयोगी अनुसंधान के अवसर देखने और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग का अनुभव प्राप्त करने का मौका देता है।
प्रतिभागियों को मिलने वाले अवसर और अनुभव
5–6 फरवरी के दौरान आयोजित इस सम्मेलन के आयोजन में छात्र-छात्राओं को बहुत सी महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। जिसमें शोध-पत्र प्रस्तुतिकरण सत्र,वरिष्ठ वैज्ञानिकों से प्रत्यक्ष संवाद, प्रयोगशाला एवं उपग्रह केंद्र का भ्रमण,कार्यशालाओं और तकनीकी चर्चाओं में भागीदारी, के साथ सम्मान और प्रमाणपत्र प्राप्ति होगी।
ये गतिविधियाँ विद्यार्थियों को उनके कैरियर की दिशा तय करने और आगे की तकनीकी खोजों के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
DDU में उत्साह, राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय मंच के खुल रहे विकल्प
विश्वविद्यालय में इस उपलब्धि के बाद एक उत्साह भरा वातावरण बना हुआ है। विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्यों ने इन छात्रों को बधाई दी है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।भारत के युवा आज विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भागीदारी बढ़ा रहे हैं। ISRO जैसे राष्ट्रीय संस्थान द्वारा आयोजित सम्मेलन जैसे कार्यक्रम इन प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं। युवाओं का अनुसंधान. आधारित शिक्षा में भाग लेना और अंतरिक्ष विज्ञान के जटिल विषयों को समझना भारत के विज्ञान-भविष्य की दिशा में सकारात्मक कदम है।
देश को मिलेगी तकनीकि प्रगति
खास बात यह भी है कि अंतरिक्ष अनुसन्धान केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की सुरक्षा, संचार प्रणालियों, मौसम पूर्वानुमान, कृषि प्रौद्योगिकी एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे क्षेत्रों में सीधे योगदान देता है। इसरो द्वारा युवा प्रतिभाओं को मंच देना वैज्ञानिक क्षमता और कौशल निर्माण को बढ़ावा देता है, जो देश की तकनीकी प्रगति के लिए आवश्यकता है।
भविष्य की दिशा के साथ राष्ट्रीय व वैश्विक योगदान
सम्मेलन में भाग लेने वाले छात्र भविष्य में अनुसंधान आधारित करियर (ISRO), अकादमिक सहयोग, और प्रगतिशील वैज्ञानिक समुदाय में योगदान दे सकेंगे। यह अनुभव उन्हें न केवल तकनीकी खिताबों तक सीमित रखता है, बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान की दिशा में भी एक मजबूत आधार देता है। एसे कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक प्रतिभाओं को खोजने, विकसित करने और उन्हें वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए एक प्रारंभिक साधन भी साबित होते हैं।






