बिहार में प्रतियोगिता परीक्षाओं के दौरान कानून-व्यवस्था और परीक्षार्थियों की भारी भीड़ को संभालना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। हाल ही में आयोजित हुई बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान राजधानी पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर एक ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया जिसने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी। परीक्षा देकर लौट रहे हजारों छात्रों ने ट्रेनों की अपर्याप्त व्यवस्था और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए रेलवे स्टेशन पर भारी हंगामा और प्रदर्शन किया। देखते ही देखते यह प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया जिसके बाद पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग का सहारा लेना पड़ा।
घटनाक्रम की शुरुआत- स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब
बिहार पुलिस परीक्षा की समाप्ति के बाद राज्य के विभिन्न जिलों से आए लाखों अभ्यर्थी अपने-अपने घरों को लौटने के लिए रेलवे स्टेशनों की ओर बढ़े। पटना का पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन भी परीक्षार्थियों से पूरी तरह पट गया था।
- सीमित ट्रेनें और भारी भीड़- स्टेशन पर मौजूद छात्रों का आरोप था कि परीक्षार्थियों की संख्या के अनुपात में रेलवे द्वारा विशेष ट्रेनों (Exam Special Trains) की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई थी।
- ट्रेनों में जगह न मिलना- जो नियमित ट्रेनें आ भी रही थीं वे पहले से ही खचाखच भरी हुई थीं। उनमें तिल रखने की भी जगह नहीं थी। कई घंटों के इंतजार के बाद भी जब छात्रों को घर लौटने का कोई साधन नजर नहीं आया तो उनका धैर्य जवाब दे गया।
- प्रशासनिक लापरवाही- छात्रों का कहना था कि परीक्षा की तारीखें पहले से तय होने के बावजूद रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने समन्वय नहीं बनाया जिसके कारण यह अव्यवस्था पैदा हुई।
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विरोध से हिंसा तक- तोड़फोड़ और पथराव
शुरुआत में छात्रों ने स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर शांतिपूर्ण ढंग से नारेबाजी करते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग की। लेकिन जब काफी समय बीत जाने के बाद भी रेलवे के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली और कोई अतिरिक्त ट्रेन नहीं लगाई गई तो छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।
- रेलवे संपत्ति को नुकसान- आक्रोशित छात्रों ने रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया जिससे ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया। इसके बाद भीड़ ने स्टेशन मास्टर के कार्यालय, पूछताछ केंद्र और टिकट काउंटरों पर धावा बोल दिया।
- तोड़फोड़- स्टेशन परिसर में लगी कुर्सियों, वेंडिंग मशीनों, साइनबोर्ड और खिड़कियों के शीशों को उपद्रवियों ने पूरी तरह चकनाचूर कर दिया।
- सुरक्षा बलों पर पथराव- स्थिति को संभालने के लिए जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेल पुलिस (GRP) के जवान मौके पर पहुंचे तो उग्र भीड़ ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले में कई पुलिसकर्मी और कुछ आम यात्री भी घायल हो गए।
पुलिस की कार्रवाई- लाठीचार्ज, हवाई फायरिंग और गिरफ्तारियां
पाटलिपुत्र स्टेशन पर हालात पूरी तरह बेकाबू होते देख जिला प्रशासन और पटना पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया। स्टेशन परिसर एक तरह से युद्ध के मैदान में तब्दील हो चुका था।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कड़े कदम
- हल्का बल प्रयोग और लाठीचार्ज- पुलिस ने सबसे पहले उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया। पुलिस के लाठी भांजते ही स्टेशन पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
- आंसू गैस और हवाई फायरिंग- जब लाठीचार्ज के बाद भी पथराव नहीं रुका और उपद्रवी पुलिस को निशाना बनाते रहे तो सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षार्थ और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हवा में कई राउंड फायरिंग की। हवाई फायरिंग की आवाज सुनते ही उपद्रवी पीछे हटने को मजबूर हुए।
- उपद्रवियों की गिरफ्तारी- पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मौके पर की गई वीडियोग्राफी के आधार पर उपद्रवियों को चिह्नित करना शुरू किया। घटना स्थल से ही दर्जनों हुड़दंगी छात्रों और असामाजिक तत्वों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि भीड़ की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर हिंसा भड़काई थी।
यात्री सेवाएं प्रभावित और भारी नुकसान
इस पूरे घटनाक्रम के कारण पाटलिपुत्र स्टेशन से गुजरने वाली और वहां से खुलने वाली कई ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोकना पड़ा। लगभग 3 से 4 घंटे तक रेल यातायात पूरी तरह बाधित रहा जिससे आम यात्रियों को भीषण गर्मी और उमस के बीच भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। रेलवे को इस हिंसा और तोड़फोड़ के कारण लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति के नुकसान का अनुमान है।
पटना के पाटलिपुत्र स्टेशन पर हुई यह हिंसक घटना प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी और छात्रों के अनियंत्रित आक्रोश का एक दुखद उदाहरण है। जब भी राज्य में इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते हैं तो परिवहन विभाग और रेलवे को पहले से ही अतिरिक्त बसों और ट्रेनों का पुख्ता ब्लूप्रिंट तैयार रखना चाहिए ताकि ऐसी नौबत न आए। हालांकि अपनी जायज मांगों के लिए हिंसा, तोड़फोड़ और पथराव का रास्ता चुनना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और कानून को हाथ में लेना छात्रों के भविष्य को ही अंधकार में डालता है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रशासनिक प्रबंधन और संयमित नागरिक व्यवहार दोनों की अत्यंत आवश्यकता है।







