जनवरी 2026 से टेलीविजन (TV) खरीदना उपभोक्ताओं के लिए महंगा साबित हो सकता है। उद्योग जगत से मिल रहे संकेतों के अनुसार नए साल की शुरुआत के साथ ही टीवी की कीमतों में तीन से चार प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। इस संभावित मूल्य वृद्धि के पीछे दो प्रमुख कारक सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं पहला वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की भारी कमी और दूसरा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का लगातार कमजोर होना।

भारत में टीवी का बाजार विशेष रूप से स्मार्ट टीवी सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि एलईडी टीवी (LED TV) के उत्पादन में उपयोग होने वाले अधिकांश महत्वपूर्ण घटक जैसे कि ओपन सेल पैनल सेमीकंडक्टर चिप्स और मदरबोर्ड विदेशों से आयात किए जाते हैं। यही कारण है कि यह उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
रुपये की गिरावट आयात लागत में वृद्धि
भारतीय रुपया पिछले कुछ समय से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है। हाल ही में रुपये का मूल्य 90 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के पार चला गया है। चूंकि टीवी के लगभग 70% घटक आयात किए जाते हैं जैसे ओपन सेल सेमीकंडक्टर चिप्स और मदरबोर्ड रुपये के कमजोर होने से इन आयातित हिस्सों की लागत में सीधे तौर पर वृद्धि हो जाती है।
जब भारतीय मुद्रा कमजोर होती है तो कंपनियों को विदेशी विक्रेताओं को भुगतान करने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस बढ़ी हुई आयात लागत का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में डाला जाता है। टीवी निर्माताओं के लिए लागत का यह दबाव इतना बढ़ चुका है कि अब इसे सहन करना मुश्किल हो रहा है।
हायर अप्लायंसेज इंडिया के अध्यक्ष एन एस सतीश जैसे उद्योग विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि रुपये की गिरावट और मेमोरी चिप्स की कमी के संयुक्त प्रभाव से एलईडी टीवी की कीमतों में लगभग 3% की वृद्धि हो सकती है।
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मेमोरी चिप संकट मांग और आपूर्ति का असंतुलन
टीवी की कीमतों पर असर डालने वाला दूसरा प्रमुख कारण मेमोरी चिप (DRAM और फ्लैश मेमोरी) की वैश्विक कमी और उनकी बढ़ती कीमतें हैं। AI की बढ़ती मांग इस कमी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्वरों के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई है चिप निर्माता कंपनियां अब उच्च लाभ वाले एआई-संबंधित चिप्स के उत्पादन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं|जिससे टेलीविजन स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे पारंपरिक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के लिए इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की आपूर्ति सीमित हो गई है।
कीमतों में भारी उछाल मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होने के कारण इन मेमोरी चिप्स की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। उद्योग जगत के कुछ सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में 500% तक की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
यह अप्रत्याशित वृद्धि टीवी निर्माताओं की उत्पादन लागत को सीधे प्रभावित कर रही है। घटती आपूर्ति एआई डेटा केंद्रों की ओर आपूर्ति मोड़े जाने से टीवी जैसे उपभोक्ता उत्पादों के लिए आवश्यक DRAM और फ्लैश मेमोरी की उपलब्धता घट गई है जिससे निर्माताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
थॉमसन कोडक और ब्लॉपनक जैसे ब्रांडों के लाइसेंसहोल्डर सुपर प्लास्ट्रोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (SPPL) के सीईओ अवनीत सिंह मारवाह ने अनुमान जताया है कि मेमोरी चिप संकट और रुपये के अवमूल्यन के मिले-जुले असर के कारण जनवरी से टेलीविजन की कीमतों में 7 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी भी हो सकती है। पर अधिकांश उद्योग विश्लेषक 3 से 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की आशंका जता रहे हैं।
जीएसटी कटौती का प्रभाव बेअसर
यह मूल्य वृद्धि ऐसे समय में होने की आशंका है जब हाल ही में जीएसटी परिषद द्वारा स्मार्ट टीवी पर जीएसटी दर को कम करने से उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली थी। जीएसटी की दर मे कमी होने से टीवी की कीमतों में लगभग 4000 से 5000 रुपये तक की कमी आई थी। हालांकि चिप संकट और कमजोर रुपये से उत्पन्न हुई लागत वृद्धि इस जीएसटी कटौती के लाभों को बेअसर कर सकती है जिससे उपभोक्ताओं को अंततः महंगी खरीद करनी पड़ेगी।
उपभोक्ताओं के लिए संदेश
जो उपभोक्ता नया टेलीविजन खरीदने की योजना बना रहे हैं उनके लिए यह एक चेतावनी भरी खबर है। जनवरी 2026 से पहले खरीदारी करना उन्हें संभावित मूल्य वृद्धि से बचा सकता है। सभी टीवी निर्माताओं ने भी इस मूल्य वृद्धि के बारे में अपने डीलरों को पहले ही सूचित कर दिया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में जल्द ही बदलाव आने वाला है।
यदि वैश्विक स्तर पर रुपये की स्थिति में स्थिरता नहीं आती है और मेमोरी चिप की आपूर्ति में सुधार नहीं होता है तो यह दबाव आने वाले महीनों में भी जारी रह सकता है जिससे उपभोक्ता को इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में महंगाई का दौर देखने मिल सकता है।






