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एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान में आई तकनीकी समस्या के बाद प्लेन में लगी रोक

एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान में आई तकनीकी समस्या के बाद प्लेन में लगी रोक
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 3, 2026 6:33 अपराह्न
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एयर इंडिया की उड़ान AI 132 (लंदन हीथ्रो से बेंगलुरु) में हाल ही में आई तकनीकी खराबी ने विमानन सुरक्षा और रखरखाव प्रोटोकॉल पर एक नई बहस छेड़ दी है। इस घटना में ‘फ्यूल कंट्रोल स्विच’ (Fuel Control Switch) की विफलता मुख्य कारण रही, जिसने एक संभावित बड़े हादसे की आशंका पैदा कर दी थी।

घटना का घटनाक्रम – क्या हुआ AI 132 के साथ?

एयर इंडिया की फ्लाइट AI 132, जो लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट (LHR) से बेंगलुरु (BLR) के लिए उड़ान भरने वाली थी, को अंतिम क्षणों में रनवे पर जाने से रोक दिया गया। विमान के कॉकपिट में पायलटों को फ्यूल कंट्रोल स्विच से संबंधित एक महत्वपूर्ण अलर्ट मिला।

मुख्य बिंदु

  • विमान का मॉडल – बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर।
  • समस्या – फ्यूल कंट्रोल स्विच में मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक खराबी।
  • सुरक्षा निर्णय –  चूंकि यह स्विच इंजन शुरू करने और ईंधन की आपूर्ति काटने के लिए जिम्मेदार होता है, इसलिए ग्राउंड इंजीनियरिंग टीम ने उड़ान को असुरक्षित घोषित कर दिया।
  • यात्रियों की स्थिति –  यात्रियों को विमान से उतारा गया और उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

फ्यूल कंट्रोल स्विच – यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

एक आधुनिक जेट इंजन, जैसे कि बोइंग 787 में लगे जनरल इलेक्ट्रिक (GE) या रोल्स-रॉयस इंजन, में ईंधन की आपूर्ति को नियंत्रित करना सबसे संवेदनशील कार्य होता है।

फ्यूल कंट्रोल स्विच के कार्य

  • इंजन स्टार्ट – यह इंजन में ईंधन के प्रवाह को चालू करता है।
  • इमरजेंसी शटडाउन – आग लगने या तकनीकी खराबी की स्थिति में, यह एकमात्र तरीका है जिससे पायलट तुरंत ईंधन की आपूर्ति रोक सकता है।
  • हादसे का डर –  यदि यह स्विच उड़ान के दौरान ‘शॉर्ट सर्किट’ या जाम हो जाता है, तो पायलट इंजन को बंद नहीं कर पाएंगे, जो लैंडिंग के समय घातक हो सकता है।

क्या “अहमदाबाद जैसा हादसा” था

जब हम अहमदाबाद हादसे का जिक्र करते हैं, तो यह अक्सर विमान में ईंधन रिसाव या लैंडिंग के दौरान आग लगने की घटनाओं से जुड़ा होता है। AI 132 के मामले में डर यह था कि यदि ईंधन नियंत्रण प्रणाली खराब होती, तो टेक-ऑफ के दौरान इंजन में आग लग सकती थी या विमान अनियंत्रित गति से दौड़ सकता था। समय पर स्विच की खराबी पकड़ में आने से एक बड़ा “रनवे एक्सकर्शन” (विमान का रनवे से बाहर जाना) टल गया।

बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर की तकनीकी संरचना

बोइंग 787 एक ‘इलेक्ट्रिक विमान’ के रूप में जाना जाता है। इसमें पारंपरिक विमानों की तुलना में अधिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ हैं।

विमान की विशेषताएं

  • मटीरियल –  इसका 50% हिस्सा कार्बन फाइबर कंपोजिट से बना है।
  • इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर – इसमें “ब्लीड-लेस” इंजन तकनीक का उपयोग होता है, जिसका अर्थ है कि अधिकांश प्रणालियाँ सीधे बिजली से चलती हैं।
  • जोखिम – अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक्स होने के कारण, छोटे से “सेंसर एरर” या “स्विच फॉल्ट” के कारण पूरा सिस्टम सुरक्षा मोड (Safe Mode) में जा सकता है।

विमान सुरक्षा और एयर इंडिया का रखरखाव प्रोटोकॉल

इस घटना ने एयर इंडिया के इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस (MRO) विभाग की सतर्कता को भी दर्शाया है।

चरणसुरक्षा जांच (Checks)AI 132 में क्या हुआ? 
Pre-flight Checkपायलट और इंजीनियर हर स्विच की जांच करते हैं।स्विच में ‘स्टिकी’ या रिस्पॉन्स न मिलने की समस्या दिखी। 
Taxiing रनवे पर जाते समय सिस्टम की मॉनिटरिंग।अलर्ट वार्निंग आने पर विमान को वापस गेट पर लाया गया। 
MRO Inspectionगहन तकनीकी जांच।स्विच असेंबली को बदलने का निर्णय लिया गया। 

भविष्य की राह

एयर इंडिया अपनी छवि सुधारने के लिए अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर रही है, लेकिन बोइंग 787 जैसे विमानों में आने वाली ये तकनीकी खामियां चिंता का विषय हैं। हालांकि, इस मामले में पायलटों की सूझबूझ और ऑन-बोर्ड कंप्यूटर की चेतावनी ने सैकड़ों जानों को सुरक्षित रखा।

विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि बोइंग को अपने 787 बेड़े के ‘स्विच गियर’ और ‘ईंधन मॉड्यूल’ की वैश्विक स्तर पर समीक्षा करनी चाहिए ताकि “अहमदाबाद” या अन्य गंभीर हादसों की पुनरावृत्ति न हो।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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