व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों मार गिराया

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों मार गिराया
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 5, 2026 3:01 अपराह्न
Follow Us:

जम्मू-कश्मीर का उधमपुर जिला हाल के दिनों में सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहा है। हाल ही में एक साहसिक सैन्य अभियान में, भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त बलों ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के दो खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया। ये आतंकवादी एक प्राकृतिक गुफा के भीतर छिपे हुए थे, जिसे सुरक्षाबलों ने ग्रेनेड विस्फोटों के जरिए ध्वस्त कर दिया।

ऑपरेशन की पृष्ठभूमि और खुफिया जानकारी

इस ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब सैन्य खुफिया (Military Intelligence) और स्थानीय पुलिस को उधमपुर के ऊंचे पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली।

सटीक सूचना – खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि विदेशी मूल के दो आतंकवादी, जिनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद से है, इलाके में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में हैं।

इलाके की घेराबंदी –  सूचना मिलते ही भारतीय सेना की ‘राष्ट्रीय राइफल्स’ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के ‘स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप’ (SOG) ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी।

मुठभेड़ का घटनाक्रम –  गुफा का मोर्चा-उधमपुर के दुर्गम इलाकों में घने जंगल और प्राकृतिक गुफाएं आतंकवादियों के लिए छिपने का सबसे सुरक्षित स्थान मानी जाती हैं।

घेराबंदी और संपर्क-जब सुरक्षाबल संदिग्ध ठिकाने के करीब पहुंचे, तो आतंकवादियों ने उन पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। घने कोहरे और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए आतंकवादी एक गहरी प्राकृतिक गुफा के भीतर जा छिपे।

आत्मसमर्पण की अपील-भारतीय सेना की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत, आतंकवादियों को पहले आत्मसमर्पण करने का अवसर दिया गया। मेगाफोन के माध्यम से उन्हें बाहर आने को कहा गया, लेकिन उन्होंने गोलीबारी जारी रखी और ग्रेनेड फेंके।

निर्णायक प्रहार (ग्रेनेड विस्फोट)-गुफा की बनावट ऐसी थी कि सीधी गोलीबारी का उन पर कोई असर नहीं हो रहा था। ऐसे में सुरक्षाबलों ने एक रणनीतिक फैसला लिया। गुफा के मुहाने पर रणनीतिक ग्रेनेड विस्फोट किए गए। इन विस्फोटों का उद्देश्य गुफा के भीतर छिपे आतंकियों को बेअसर करना या उन्हें बाहर आने पर मजबूर करना था। धमाकों की तीव्रता और धुएं के कारण आतंकी संभल नहीं पाए और अंततः मार गिराए गए।

जैश-ए-मोहम्मद का लिंक और बरामदगी

मारे गए आतंकवादी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे। जैश अपनी क्रूरता और फिदायीन हमलों के लिए जाना जाता है।

बरामद हथियार और गोला-बारूद

मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में युद्ध जैसा सामान बरामद हुआ

  • AK-47 राइफल्स –  आधुनिक हथियारों से लैस थे आतंकी।
  • विदेशी ग्रेनेड – उनके पास उच्च क्षमता वाले विस्फोटक थे।
  • संचार उपकरण –  सैटेलाइट फोन और पाकिस्तानी सिम कार्ड।
  • सूखी रसद – इससे पता चलता है कि वे लंबे समय तक जंगलों में छिपने की तैयारी के साथ आए थे।

उधमपुर में उभरता हुआ खतरा

पिछले कुछ वर्षों में, आतंकवाद का केंद्र दक्षिण कश्मीर से हटकर जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ और उधमपुर की ओर स्थानांतरित हुआ है।

  • भौगोलिक स्थिति  – पीर पंजाल की पहाड़ियां और घने जंगल छिपने में मदद करते हैं। 
  • घुसपैठ की कोशिशें  – अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा (LoC) से घुसपैठ की नई लहर। 
  • रणनीतिक महत्व  –  उधमपुर सेना के उत्तरी कमान का मुख्यालय है, जो इसे एक प्रमुख लक्ष्य बनाता है। 

सुरक्षाबलों की रणनीति और नई तकनीक का उपयोग

इस ऑपरेशन की सफलता केवल वीरता का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक का भी समावेश था

  • ड्रोन निगरानी – गुफा के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हाई-टेक ड्रोन्स का उपयोग किया गया।
  • स्निफर डॉग्स – आतंकवादियों के भागने के रास्तों का पता लगाने के लिए सेना के प्रशिक्षित कुत्तों की मदद ली गई।
  • समन्वय –  थल सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस के बीच वास्तविक समय (Real-time) सूचना साझाकरण।

स्थानीय आबादी पर प्रभाव और सुरक्षा

आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।

  • इलाके को खाली कराना –  ऑपरेशन शुरू होने से पहले आसपास के चरवाहों और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।
  • विश्वास बहाली –  सेना और पुलिस लगातार ग्रामीणों के संपर्क में हैं ताकि आतंकवादियों को मिलने वाली किसी भी संभावित रसद या सूचना को रोका जा सके।

एक स्पष्ट संदेश

उधमपुर का यह सफल ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का प्रमाण है। गुफाओं में छिपकर वार करने वाले कायर आतंकवादियों को यह संदेश मिल चुका है कि वे अब सुरक्षित नहीं हैं। सुरक्षाबलों की मुस्तैदी ने एक संभावित बड़े हमले को टाल दिया है।

 “जब तक सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा मिलता रहेगा, हमारी सेना इसी तरह कठोर और निर्णायक कार्रवाई करती रहेगी।”  सुरक्षा विशेषज्ञ का मत

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment