डेलीबार्ता, नई दिल्ली।देश के 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर इस बार परेड कुछ अलग और खास होने जा रही है। परंपरा, तकनीक, शौर्य और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम इस ऐतिहासिक आयोजन में देखने को मिलेगा। शनिवार को गणतंत्र दिवस परेड का भव्य पूर्वाभ्यास किया गया, जिसमें कई ऐसे दृश्य नजर आए, जिन्होंने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस बार परेड में जहां आधुनिक हथियार प्रणालियां और सैन्य ताकत का प्रदर्शन होगा, वहीं पहली बार लद्दाख के डबल-हंप बैक्ट्रियन ऊंट और जवानों के हाथों पर बैठे बाज भी परेड की शोभा बढ़ाएंगे।
पूर्वाभ्यास में दिखी बदली हुई झलक
गणतंत्र दिवस से पहले आयोजित फुल ड्रेस रिहर्सल में ही यह साफ हो गया कि इस वर्ष की परेड पहले से कहीं अधिक भव्य और संदेशात्मक होगी। कर्तव्य पथ पर सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य टुकड़ियों की सधी हुई चाल, अनुशासन और तालमेल ने देश की सैन्य शक्ति की झलक पेश की। इस बार परेड में कुछ ऐसे तत्व शामिल किए गए हैं, जो न सिर्फ दर्शनीय हैं, बल्कि भारतीय सेना की कार्यशैली और विविध परिस्थितियों में उसकी क्षमता को भी दर्शाते हैं।
लद्दाख के डबल-हंप ऊंट पहली बार परेड में
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की सबसे खास झलक लद्दाख के डबल-हंप यानी दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट होंगे। ये ऊंट भारतीय सेना के पशु दस्ते का हिस्सा हैं और पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में शामिल किए जा रहे हैं।
बैक्ट्रियन ऊंट अत्यंत ठंडे और दुर्गम इलाकों में सेना के लिए रसद ढोने, गश्त करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही के लिए बेहद उपयोगी होते हैं। ये ऊंट -40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को सहन करने की क्षमता रखते हैं। लद्दाख जैसे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां आधुनिक वाहन भी कई बार असफल हो जाते हैं, वहां ये ऊंट सेना के लिए भरोसेमंद साथी साबित होते हैं। कर्तव्य पथ पर मार्च करते ये ऊंट भारत की भौगोलिक विविधता और सेना की जमीनी मजबूती का प्रतीक होंगे।
जवानों के हाथों पर बाज, पहली बार दिखेगा यह दृश्य
इस बार परेड में एक और अनोखा दृश्य देखने को मिलेगा, जब जवान अपने हाथों पर प्रशिक्षित बाज लेकर मार्च करते नजर आएंगे। यह दृश्य न सिर्फ आकर्षक होगा, बल्कि सेना की पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों के समन्वय को भी दर्शाएगा।
सेना में बाज और अन्य शिकारी पक्षियों का उपयोग निगरानी, संदेश और सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक रूप से होता रहा है। यह दस्ता सेना की प्रशिक्षण क्षमता और प्रकृति के साथ तालमेल का प्रतीक है। पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में इस तरह का प्रदर्शन शामिल किया गया है, जो दर्शकों के लिए एक नई और रोमांचक अनुभूति लेकर आएगा।
डॉग स्क्वायड भी करेगा मार्च
गणतंत्र दिवस परेड में इस बार डॉग स्क्वायड दस्ता भी शामिल होगा। ये प्रशिक्षित कुत्ते सेना और सुरक्षा बलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विस्फोटकों का पता लगाने, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और आपात परिस्थितियों में सहायता करने में डॉग स्क्वायड की भूमिका अहम होती है।
परेड में इनके शामिल होने से यह संदेश जाएगा कि भारतीय सेना केवल आधुनिक हथियारों पर ही नहीं, बल्कि हर उस संसाधन पर भरोसा करती है, जो देश की सुरक्षा को मजबूत बनाता है।
आधुनिक हथियार प्रणालियों का भव्य प्रदर्शन
गणतंत्र दिवस परेड हमेशा से ही देश की सैन्य शक्ति का आईना रही है। इस बार भी कर्तव्य पथ पर अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां देखने को मिलेंगी।
परेड में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल प्रणाली और आधुनिक टैंकों का प्रदर्शन किया जाएगा। ब्रह्मोस मिसाइल अपनी मारक क्षमता और गति के लिए जानी जाती है, जबकि आकाश मिसाइल प्रणाली देश की वायु रक्षा को मजबूत बनाती है। इसके अलावा आधुनिक टैंक और बख्तरबंद वाहन सेना की युद्धक क्षमता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए गए प्रयासों को दर्शाएंगे।
मोटरसाइकिल स्टंट से बढ़ेगा रोमांच
गणतंत्र दिवस परेड का एक आकर्षण हमेशा से मोटरसाइकिल स्टंट रहे हैं। इस बार भी जवान मोटरसाइकिलों पर हैरतअंगेज करतब दिखाते नजर आएंगे। संतुलन, साहस और कौशल का यह प्रदर्शन दर्शकों को रोमांच से भर देगा।
पूर्वाभ्यास के दौरान जब मोटरसाइकिल पर सवार जवानों ने करतब दिखाए, तो दर्शक दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो गए। खास बात यह रही कि इस बार महिला जवान भी मोटरसाइकिल स्टंट का हिस्सा बनीं, जिन्होंने अपने साहस और आत्मविश्वास से सभी का दिल जीत लिया।
महिला जवानों की दमदार मौजूदगी
इस वर्ष की परेड में महिला सशक्तिकरण की झलक भी साफ नजर आएगी। मोटरसाइकिल स्टंट से लेकर विभिन्न सैन्य टुकड़ियों में महिला जवानों की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारतीय सेना में महिलाएं हर मोर्चे पर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं।
कर्तव्य पथ पर पूर्वाभ्यास के दौरान महिला जवानों का आत्मविश्वास और अनुशासन दर्शकों के लिए प्रेरणादायक रहा।
शौर्य, शक्ति और संस्कृति का संगम
गणतंत्र दिवस परेड केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं होती, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विविधता और एकता का भी उत्सव है। इस बार भी विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां, लोक कलाकारों के प्रदर्शन और पारंपरिक वेशभूषा देश की विविध संस्कृति को मंच प्रदान करेंगी।
सेना के शौर्य और देश की सांस्कृतिक विरासत का यह संगम गणतंत्र दिवस को और भी खास बना देगा।
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कर्तव्य पथ पर अनुशासन और समर्पण का संदेश
कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड केवल एक समारोह नहीं, बल्कि यह देश के प्रति समर्पण, अनुशासन और कर्तव्यबोध का प्रतीक है। जवानों की एक-एक चाल, हथियारों की सटीक प्रस्तुति और दस्तों का तालमेल यह संदेश देता है कि देश की सुरक्षा मजबूत हाथों में है।
देशवासियों के लिए गर्व का क्षण
गणतंत्र दिवस परेड हर भारतीय के लिए गर्व का अवसर होती है। इस बार लद्दाख के ऊंट, बाज, डॉग स्क्वायड, आधुनिक मिसाइलें और साहसी जवानों के करतब इस गर्व को और बढ़ाएंगे।
यह परेड न सिर्फ भारत की सैन्य ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि भारतीय सेना हर परिस्थिति, हर भूभाग और हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है।
76वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड शौर्य, शक्ति और समर्पण का जीवंत उदाहरण होगी। लद्दाख के डबल-हंप ऊंटों से लेकर हाथों पर बाज लिए जवानों तक, आधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर मोटरसाइकिल स्टंट तक—हर दृश्य देश की ताकत और आत्मविश्वास को दर्शाएगा।
यह परेड न केवल एक सैन्य आयोजन है, बल्कि यह भारत की एकता, विविधता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है, जिसे देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।







