78वें भारतीय सेना दिवस के अवसर पर आज जयपुर (राजस्थान) में आयोजित होने वाली परेड भारत के सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय लिख रही है। यह पहली बार है जब सेना दिवस की मुख्य परेड किसी पारंपरिक छावनी (Cantonment) क्षेत्र से बाहर, आम जनता के बीच एक सार्वजनिक सड़क पर आयोजित की जा रही है।
78वां सेना दिवस परेड 2026 – एक ऐतिहासिक अवलोकन
भारतीय सेना हर साल 15 जनवरी को ‘सेना दिवस’ मनाती है। यह दिन 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार संभालने की याद में मनाया जाता है।
2023 से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर इस उत्सव को दिल्ली से बाहर देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया गया है (जैसे बेंगलुरु, लखनऊ और पुणे), लेकिन जयपुर 2026 का आयोजन विशेष है क्योंकि यह छावनी की बंद सीमाओं से निकलकर जगतपुरा की महल रोड पर आम नागरिकों के बीच पहुँचा है।
आयोजन का समय और स्थान
- तिथि – 15 जनवरी, 2026
- स्थान – महल रोड, जगतपुरा, जयपुर (सप्त शक्ति कमान द्वारा आयोजित)
- मुख्य परेड का समय – सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
- शौर्य संध्या – शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक (सवाई मानसिंह स्टेडियम)
कौन-कौन शामिल हुआ? (मुख्य अतिथि और गणमान्य व्यक्ति)
इस समारोह में देश के शीर्ष सैन्य और नागरिक नेतृत्व ने शिरकत की|
- संवैधानिक अतिथि- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा।
- सैन्य नेतृत्व – चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान और थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी।
- विशेष अतिथि – केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (शाम के कार्यक्रम ‘शौर्य संध्या’ के मुख्य अतिथि), मिजोरम के राज्यपाल वी.के. सिंह और 40 से अधिक देशों के राजदूत।
- जनभागीदारी – लगभग 1.5 लाख से अधिक दर्शकों और हज़ारों स्कूली बच्चों ने इस गौरवशाली पल का साक्षी बनने के लिए शिरकत की।
परेड के मुख्य आकर्षण और प्रदर्शन
परेड में भारतीय सेना के अनुशासन, आधुनिक तकनीक और नारी शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला
पहली बार ‘भैरव बटालियन’ का प्रदर्शन
इस परेड की सबसे बड़ी विशेषता ‘भैरव बटालियन’ (Bhairav Battalion) की पहली सार्वजनिक उपस्थिति रही। यह एक नई उठाई गई विशेष इकाई है जो आधुनिक युद्धकौशल और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार की गई है।
हथियारों और तकनीक का शक्ति प्रदर्शन
परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल किए गए हथियारों सहित अत्याधुनिक प्रणालियों को दिखाया गया:
- मिसाइल प्रणालियाँ – ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाश (Akash) एयर डिफेंस सिस्टम।
- आर्टिलरी और रॉकेट – पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, सूर्यास्त्र (URLS) और M-777 होवित्जर तोपें।
- ड्रोन तकनीक – 1000 से अधिक ड्रोन्स का प्रदर्शन, जिसमें ‘मिनी हार्पी’, ‘हाप’ और ‘स्काई स्ट्राइकर’ जैसे कामिकेज़ (Kamikaze) ड्रोन शामिल थे।
- रोबोटिक उपकरण – भारतीय सेना के बेड़े में शामिल नए रोबोटिक कुत्ते (MULE) और आधुनिक निगरानी उपकरण।
फ्लाइपास्ट और मार्चिंग दस्ते
- आकाश में AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों और स्वदेशी LCH प्रचंड ने अपनी ताकत दिखाई।
- मार्चिंग दस्तों में राजपूत रेजिमेंट, मद्रास रेजिमेंट, गढ़वाल रेजिमेंट और 61 कैवलरी (घोड़े पर सवार दस्ता) ने कदमताल की।
- नेपाल सेना के बैंड ने भी अंतरराष्ट्रीय मैत्री के प्रतीक के रूप में परेड में हिस्सा लिया।
प्रस्तुत की गई झांकियां (Tableaux)
झांकियों के माध्यम से सेना के गौरवशाली इतिहास और राजस्थान की संस्कृति को पिरोया गया
- ऑपरेशन सिंदूर – इस झांकी में हालिया सैन्य सफलताओं और ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक जीत को जीवंत किया गया।
- नारी शक्ति – सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनके नेतृत्व को समर्पित एक विशेष झांकी।
- सांस्कृतिक विरासत – राजस्थान की ‘वीर धरा’ की लोक परंपराओं और सेना के अटूट संबंध को दर्शाती झांकी।
‘शौर्य संध्या’ और ‘नो योर आर्मी’ प्रदर्शनी
परेड के अलावा, जयपुर में कई अन्य गतिविधियाँ आयोजित की गईं|
- नो योर आर्मी (Know Your Army) – 8 से 12 जनवरी तक भवानी निकेतन कॉलेज में हथियारों की प्रदर्शनी लगाई गई जहाँ युवाओं को सेना के करीब जाने का मौका मिला।
- लाइट एंड साउंड शो – एसएमएस स्टेडियम में लेजर शो के माध्यम से भारतीय सेना के 250 साल के इतिहास और बलिदान की गाथा सुनाई गई।
- वीर नारियों का सम्मान – थल सेनाध्यक्ष और उनकी पत्नी ने शहीद परिवारों (वीर नारियों और वीर माताओं) को सम्मानित किया।
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आयोजन का महत्व
जयपुर में आयोजित यह परेड केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह “सेना-नागरिक जुड़ाव” का एक सशक्त माध्यम है। छावनी से बाहर निकलकर जनता के बीच आने का उद्देश्य युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करना और नागरिकों में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति विश्वास जगाना है।







