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35 साल के लंबे अंतराल के बाद बांग्लादेश को मिलेगा अपना नया पीएम

35 साल के लंबे अंतराल के बाद बांग्लादेश को मिलेगा अपना नया पीएम
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 8, 2026 2:06 अपराह्न
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बांग्लादेश की राजनीति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ 35 वर्षों का एक लंबा इतिहास धराशायी हो चुका है। 12 फरवरी 2026 को होने जा रहे आम चुनाव केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि बांग्लादेश के ‘बैटलिंग बेगम्स’ (Battling Begums) युग के अंत की आधिकारिक घोषणा भी हैं।

 35 साल बाद ‘नया’ पीएम क्यों?

पिछले 35 वर्षों (1991 से 2024 तक) से बांग्लादेश की सत्ता दो महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही 

शेख हसीना (आवामी लीग) और खालिदा जिया (BNP)। 1991 में लोकतंत्र की बहाली के बाद से इन्हीं दो चेहरों ने बारी-बारी से देश पर शासन किया।

  • हसीना और जिया का एकाधिकार –  1991 में खालिदा जिया पहली बार पीएम बनीं। तब से अब तक या तो वे सत्ता में रहीं या शेख हसीना। बीच के कुछ समय (2006-2008) को छोड़ दें, तो बांग्लादेश ने कोई तीसरा चेहरा शीर्ष पद पर नहीं देखा।
  • ऐतिहासिक बदलाव – 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के इस्तीफे और हाल ही में खालिदा जिया के निधन (जनवरी 2026) के बाद, अब पहली बार बांग्लादेश को इन दोनों से हटकर एक बिल्कुल नया नेतृत्व मिलने जा रहा है।

 ‘बैटलिंग बेगम्स’ की अदावत –  कौन थीं ये दो महिलाएं?

बांग्लादेश की राजनीति को ‘टू बेगम्स’ की लड़ाई कहा जाता रहा है। इनके बीच की दुश्मनी केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक थी।

पक्ष नेतापृष्ठभूमिविचारधारा
आवामी लीगशेख हसीनाबांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी।धर्मनिरपेक्ष, भारत के प्रति झुकाव, बंगाली राष्ट्रवाद। 
BNPखालिदा जियापूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की विधवा।बांग्लादेशी राष्ट्रवाद, इस्लामी दलों (जैसे जमात-ए-इस्लामी) के प्रति नरम, पाकिस्तान समर्थक छवि। 

35 साल का ‘कब्जा’ और संघर्ष

1990 में दोनों ने मिलकर सैन्य तानाशाह जनरल इरशाद को हटाया था, लेकिन उसके बाद वे कट्टर दुश्मन बन गईं।

  • शेख हसीना-  1996-2001 और फिर 2009-2024 तक रिकॉर्ड समय के लिए पीएम रहीं। उन पर तानाशाही और चुनाव धांधली के आरोप लगे।
  • खालिदा जिया-  1991-1996 और 2001-2006 तक शासन किया। 2018 के बाद से वे भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल और नज़रबंदी में रहीं।

किसने देश छोड़ा और किसका हुआ निधन?

  • शेख हसीना (देश छोड़ा)-  अगस्त 2024 में ‘आरक्षण विरोधी आंदोलन’ ने एक हिंसक क्रांति का रूप ले लिया। लाखों छात्र सड़कों पर उतर आए और ‘गणभवन’ (पीएम आवास) की ओर कूच किया। अपनी जान बचाने के लिए हसीना ने इस्तीफा दिया और हेलीकॉप्टर से भारत शरण लेने पहुँच गईं। वे तब से भारत में ही हैं।
  • खालिदा जिया (निधन)-  लंबे समय से बीमार चल रही पूर्व पीएम खालिदा जिया का जनवरी 2026 में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही BNP के एक युग का अंत हो गया और नेतृत्व की कमान उनके बेटे तारिक रहमान के हाथों में आ गई।

नए पीएम की दौड़-  कौन है सबसे आगे?

2026 के चुनाव में तारिक रहमान (Tarique Rahman) को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

क्यों जीत सकते हैं? ‘द इकोनॉमिस्ट’ और अन्य अंतरराष्ट्रीय सर्वे के अनुसार, शेख हसीना की पार्टी (आवामी लीग) इस समय बिखरी हुई है और उस पर चुनाव लड़ने को लेकर कई प्रतिबंध भी हैं। जनता के बीच BNP के प्रति सहानुभूति है।

चुनौती – तारिक रहमान लंबे समय से लंदन में निर्वासन में थे। उन पर भ्रष्टाचार के कई पुराने मामले हैं, लेकिन वे वर्तमान में बांग्लादेश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरे हैं। उनके खिलाफ जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन भी चुनाव मैदान में है।

हिंदुओं पर अत्याचार – क्या नया पीएम सुधार ला पाएगा?

बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसंख्या लगभग 8% है। हसीना के जाने के बाद से उन पर हमलों की बाढ़ आ गई है।

  • वर्तमान स्थिति-  रिपोर्टों के अनुसार, 2024 के बाद से 2000 से अधिक सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। हाल ही में दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में हिंदुओं के घरों और मंदिरों पर हमलों की खबरें पुनः सुर्खियों में रहीं।
  • नए पीएम की चुनौती-  यदि तारिक रहमान या BNP की सरकार बनती है, तो हिंदुओं में डर और बढ़ेगा क्योंकि BNP का इतिहास कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के साथ रहा है। हालाँकि, तारिक रहमान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर वादा किया है कि वे “समावेशी बांग्लादेश” बनाएंगे, लेकिन ज़मीन पर कट्टरपंथ को रोकना उनके लिए सबसे कठिन परीक्षा होगी।

भारत के साथ संबंध और बजट का मुद्दा

भारत ने हाल ही में अपने केंद्रीय बजट 2026 में बांग्लादेश के लिए विकास सहायता (Aid) को घटाकर 60 करोड़ रुपये (जो पहले 120 करोड़ था) कर दिया है। इसके पीछे कई कारण हैं-

  • अविश्वास की खाई-  भारत ने हमेशा शेख हसीना का साथ दिया। उनके जाने के बाद ढाका में भारत विरोधी भावनाओं में वृद्धि हुई है।
  • बजट में कटौती क्यों- भारत अभी ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) की स्थिति में है। जब तक वहां एक स्थिर और मित्र सरकार नहीं बनती, तब तक भारत बड़े निवेश या सहायता से बच रहा है।
  • क्या संबंध सुधरेंगे – यदि तारिक रहमान पीएम बनते हैं, तो भारत के लिए यह एक कूटनीतिक चुनौती होगी। तारिक रहमान को पारंपरिक रूप से पाकिस्तान और चीन के करीब माना जाता रहा है। हालांकि, सत्ता संभालने के बाद वे भारत जैसे बड़े पड़ोसी को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • भारत-  शांति और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग कर रहा है।
  • अमेरिका और पश्चिमी देश – वे इस बदलाव को “लोकतंत्र की नई लहर” के रूप में देख रहे हैं और चुनाव की निष्पक्षता पर ज़ोर दे रहे हैं।
  • चीन और पाकिस्तान –  दोनों इस राजनीतिक बदलाव का फायदा उठाकर बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में हैं।

क्या हालात सुधरेंगे?

बांग्लादेश एक अत्यंत नाजुक दौर से गुजर रहा है। नया पीएम चाहे जो भी बने, उसके सामने तीन बड़ी पहाड़ जैसी चुनौतियां होंगी

  • अर्थव्यवस्था को संभालना-  बढ़ती महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी।
  • कानून-व्यवस्था-  कट्टरपंथी समूहों पर लगाम कसना और अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) को सुरक्षा देना।
  • भारत के साथ संतुलन-  बजट में हुई कटौती और व्यापारिक रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना।

उम्मीद फिलहाल तारिक रहमान की जीत की लग रही है, लेकिन बांग्लादेश का इतिहास गवाह है कि यहाँ सत्ता परिवर्तन अक्सर रक्तपात और अस्थिरता लेकर आता है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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