डेलीबार्ता,ढाका।बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है। इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार बांग्लादेश की सबसे पुरानी और लंबे समय तक सत्ता में रही अवामी लीग चुनावी मैदान से बाहर है। ऐसे में चुनाव का केंद्र बिंदु बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी और अंतरिम प्रशासन के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है।
इसी बीच BNP के कार्यकारी चेयरमैन और पार्टी के प्रमुख नेता तारिक रहमान ने चुनावों में संभावित हेराफेरी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को आगाह करते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया और मतगणना के दौरान गड़बड़ी की साजिश हो सकती है, जिसे हर हाल में नाकाम करना जरूरी है।
वर्चुअल रैली में तारिक रहमान का अलर्ट संदेश
सोमवार को एक वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने कहा कि सिर्फ मतदान करना ही नागरिकों की जिम्मेदारी पूरी नहीं करता, बल्कि मतदान के बाद भी सतर्क रहना उतना ही जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि लोग वोट डालने के बाद पोलिंग स्टेशन छोड़ देंगे, तो उनके वोट के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रहेगी।
तारिक रहमान ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदान के दिन सुबह-सुबह अपने पोलिंग स्टेशनों पर पहुंचें और वहां डटे रहें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतगणना निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो।
जमात-ए-इस्लामी पर हेराफेरी के आरोप
हालांकि तारिक रहमान ने अपने भाषण में किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि उनका इशारा जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े गठबंधनों की ओर था। बांग्लादेश के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में BNP चुनावों में बढ़त बनाए हुए है, लेकिन कुछ ताकतें परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती हैं।
जमात-ए-इस्लामी, चुनावी प्रक्रिया में कर सकती है गड़बड़ी
आशंका जताई जा रही है कि जमात-ए-इस्लामी, जो कट्टरपंथी विचारधारा के लिए जानी जाती है, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी कर सत्ता तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों से संपर्क बढ़ने के बाद जमात-ए-इस्लामी का मनोबल बढ़ा है। कुछ आरोपों के अनुसार, बांग्लादेश में जारी अस्थिरता के माहौल में जमात-ए-इस्लामी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परोक्ष समर्थन मिल रहा है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मोहम्मद यूनुस की भूमिका पर सवाल
अंतरिम प्रशासन और मोहम्मद यूनुस की भूमिका पर सवाल
चुनावों को लेकर एक और बड़ा सवाल अंतरिम प्रशासन की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। मौजूदा अंतरिम सरकार का नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के बाद भी अंतरिम प्रशासन तुरंत सत्ता नहीं छोड़ेगा, भले ही BNP बहुमत हासिल कर ले।
बताया जा रहा है कि चुनाव के बाद चुने गए सभी सांसदों को छह महीने के लिए एक संवैधानिक सुधार परिषद या संविधान सभा के रूप में बैठाया जा सकता है। इस अवधि में संविधान के कुछ प्रावधानों को फिर से लिखने और नए कानून पारित करने की योजना हो सकती है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक अंतरिम प्रशासन के सत्ता में बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
आलोचकों का कहना है कि सत्ता में बने रहने से अंतरिम प्रशासन को नीतियों में बदलाव और राजनीतिक संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ने का अतिरिक्त समय मिल सकता है। खास तौर पर जमात-ए-इस्लामी पर यह आरोप लग रहा है कि वह संविधान में बड़े और मूलभूत बदलाव चाहती है, जो देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं।
मतदान से पहले धार्मिक अपील
अपने भाषण में तारिक रहमान ने धार्मिक संदर्भों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे मतदान के दिन तड़के तहज्जुद की नमाज अदा करें और फिर फज्र की नमाज जमात के साथ अपने पोलिंग स्टेशनों के पास पढ़ें। उनके अनुसार, इससे न सिर्फ आध्यात्मिक मजबूती मिलेगी बल्कि मतदान केंद्रों पर लोगों की मौजूदगी भी बनी रहेगी।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका संदेश सिर्फ मुसलमानों तक सीमित नहीं है। उन्होंने सभी धर्मों और समुदायों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
“सिर्फ वोट डालना काफी नहीं” – तारिक रहमान
तारिक रहमान ने कहा,“सिर्फ वोट डालना ही काफी नहीं है। आपको पोलिंग स्टेशन पर जमे रहना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपका वोट सही तरीके से गिना जाए। इंशाअल्लाह, मुझे उम्मीद है कि आप सभी इस जिम्मेदारी को निभाएंगे।”
उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। समर्थकों का कहना है कि यह अपील लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है, जबकि विरोधी इसे अनावश्यक आशंका फैलाने की कोशिश बता रहे हैं।
सभी समुदायों से एकता की अपील
अपने संबोधन के अंत में तारिक रहमान ने जाति, पंथ और धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सिर्फ किसी एक समुदाय का नहीं है, बल्कि यह सभी नागरिकों का साझा घर है।
उन्होंने कहा,“मुसलमान, हिंदू, बौद्ध, ईसाई और अन्य धर्मों के लोग हम सभी को मिलकर इस देश को आगे बढ़ाना होगा। बांग्लादेश के पुनर्निर्माण के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। यह देश हमारा पहला और आखिरी घर है।”
चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक बेचैनी
बांग्लादेश में यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक भविष्य और संवैधानिक ढांचे से भी जुड़ा हुआ है। अवामी लीग के बाहर होने से राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल चुका है। एक ओर BNP खुद को लोकतांत्रिक ताकत के रूप में पेश कर रही है, तो दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी और अंतरिम प्रशासन की भूमिका को लेकर संदेह बना हुआ है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चुनावी बयानबाजी और तेज होगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी इस चुनाव पर टिकी हैं, क्योंकि बांग्लादेश दक्षिण एशिया का एक अहम देश है और यहां की स्थिरता का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।
ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग, अंतरिम प्रशासन और राजनीतिक दल इस प्रक्रिया को कितनी निष्पक्षता से पूरा कर पाते हैं और क्या बांग्लादेश एक स्थिर और लोकतांत्रिक रास्ते पर आगे बढ़ पाता है या नहीं।







