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सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में हुआ हादसा सुरक्षा पर उठते सवाल 

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में हुआ हादसा सुरक्षा पर उठते सवाल 
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 8, 2026 2:19 अपराह्न
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सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक अद्भुत संगम है, लेकिन कभी-कभी ऐसी घटनाएं खुशियों के माहौल को मातम में बदल देती हैं 

सूरजकुंड मेला हादसा – क्या हुआ और कैसे हुआ?

फरीदाबाद के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में मनोरंजन क्षेत्र (Amusement Zone) में एक बड़ा हादसा उस समय हुआ जब एक झूला (Tower Slide/Swing) तकनीकी खराबी के कारण ऊपर से नीचे आते समय अचानक टूटकर गिर गया।

  • जनहानि – इस हादसे में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस उप-निरीक्षक (थानेदार) की दुखद मृत्यु हो गई। वह मेले में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे थे।
  • घायल –  इस दुर्घटना में 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
  • प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार -; झूला अपनी पूरी ऊंचाई पर था और जब वह नीचे की ओर आ रहा था, तभी एक जोरदार आवाज के साथ उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे जमीन पर आ गिरा।

घायलों का उपचार और तत्काल सहायता

हादसे के तुरंत बाद मेला परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत कार्य शुरू किया|

  • अस्पताल-  घायलों को तुरंत फरीदाबाद के बीके अस्पताल (Badshah Khan Hospital) और पास के निजी मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों (जैसे सर्वोदय या फोर्टिस) में भर्ती कराया गया।
  • प्रशासनिक मुस्तैदी-  हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया है ताकि घायलों को सर्वोत्तम इलाज मिल सके।

कानूनी कार्रवाई और जांच

इस घटना ने मेले के सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

  • FIR दर्ज-  झूला संचालक के खिलाफ लापरवाही बरतने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
  • जांच कमेटी-  जिला मजिस्ट्रेट ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है जो यह पता लगाएगी कि क्या झूले के पास फिटनेस सर्टिफिकेट था।
  • लाइसेंस रद्द – संबंधित झूला संचालक का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है और मेले के अन्य झूलों की भी दोबारा जांच की जा रही है।

सूरजकुंड मेला-  इतिहास और महत्व

यह मेला फरीदाबाद में ही क्यों लगता है?

सूरजकुंड का ऐतिहासिक महत्व इस स्थान को विशेष बनाता है।

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – सूरजकुंड का निर्माण 10वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने करवाया था। यहाँ एक प्राचीन सूर्य कुंड (Amphitheater के आकार का जलाशय) है।
  • शिल्पकारों को मंच – हरियाणा सरकार ने इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन के मानचित्र पर लाने और देश भर के शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए एक मंच देने के उद्देश्य से इसे चुना।

यह मेला कब से लगता है?

  • शुरुआत –  सूरजकुंड शिल्प मेले की शुरुआत 1987 में हुई थी।
  • स्तर-  शुरुआत में यह एक छोटा क्षेत्रीय मेला था, लेकिन 2013 में इसे ‘अंतरराष्ट्रीय’ स्तर का दर्जा दिया गया। अब इसमें दक्षिण एशिया, अफ्रीका और यूरोप के दर्जनों देश भाग लेते हैं।
  • समय – यह प्रतिवर्ष फरवरी के पहले पखवाड़े (1 से 15 या 16 फरवरी) में आयोजित किया जाता है।

राजस्थान के नेताओं की संवेदनाएं

चूंकि सूरजकुंड मेले में राजस्थान की कला और संस्कृति की हमेशा गहरी भागीदारी रहती है, इस हादसे ने राजस्थान के नेताओं को भी झकझोर दिया है।

  • संवेदना का स्वरूप – राजस्थान के मुख्यमंत्री और विपक्षी नेताओं ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने विशेष रूप से शहीद पुलिस अधिकारी के प्रति सम्मान प्रकट किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
  • मदद का आश्वासन-  राजस्थान सरकार ने फरीदाबाद प्रशासन से संपर्क कर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि यदि मेले में आए राजस्थान के किसी शिल्पकार या पर्यटक को सहायता की आवश्यकता है, तो वह तुरंत प्रदान की जाए।

मेले की सुरक्षा पर उठते सवाल 

सूरजकुंड मेला देश की शान है, लेकिन एक छोटे से तकनीकी दोष या लापरवाही के कारण किसी की जान जाना बेहद दुखद है। यह घटना भविष्य के लिए एक सबक है कि मनोरंजन क्षेत्रों में ‘सेफ्टी ऑडिट’ को केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

महत्वपूर्ण नोट – यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। किसी भी कानूनी संदर्भ के लिए आधिकारिक पुलिस रिपोर्ट का संदर्भ लें।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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