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 रूस से तेल इम्पोर्ट के कारण पेनल्टी के रूप में लगा 25% टैरिफ अमेरिका भारत को वापस करेगा 

 रूस से तेल इम्पोर्ट के कारण पेनल्टी के रूप में लगा 25% टैरिफ अमेरिका भारत को वापस करेगा 
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 9, 2026 6:34 अपराह्न
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भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ व्यापार समझौता (Trade Deal 2026) भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यातकों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ है। अमेरिका ने भारत पर लगे 25% दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariff) को पूरी तरह वापस लेने और इसे रिफंड करने का निर्णय लिया है।

टैरिफ की पृष्ठभूमि – क्या और कितना लगा था?

पिछले साल (2025) अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव अपने चरम पर था। अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर दो तरह के टैक्स लगा दिए थे, जिससे कुल ड्यूटी 50% तक पहुँच गई थी

  • 25% रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) –  यह सामान्य व्यापारिक असंतुलन के कारण लगाया गया था।
  • 25% पेनल्टी टैरिफ (Penalty Tariff) –  यह विशेष रूप से भारत द्वारा रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने के कारण लगाया गया था।
  • ताजा बदलाव –  फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश (Executive Order) के अनुसार, रूस से तेल खरीदने के कारण लगा 25% पेनल्टी टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा, 25% रेसिप्रोकल टैरिफ को भी घटाकर 18% कर दिया गया है। यानी अब भारतीय सामानों पर कुल प्रभावी टैरिफ 50% से घटकर मात्र 18% रह गया है।

टैरिफ कब और क्यों लगाया गया था? (इतिहास और कारण)

अमेरिका ने यह कठोर कदम 27 अगस्त 2025 को उठाया था। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थेl

  • रूस-यूक्रेन युद्ध – अमेरिका चाहता था कि रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए कोई भी देश उससे तेल न खरीदे।
  • रूस को वित्तीय मदद का आरोप – अमेरिका का तर्क था कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से मॉस्को को युद्ध के लिए पैसा मिल रहा है।
  • राष्ट्रीय आपातकाल (Executive Order 14066) – अमेरिका ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा बताते हुए भारत पर दबाव बनाने के लिए यह दंडात्मक शुल्क लगाया था।
  • पेनल्टी रिफंड – भारतीय व्यापारियों को कितनी राहत?

अमेरिकी प्रशासन ने केवल भविष्य के लिए टैरिफ नहीं घटाया है, बल्कि पिछला भुगतान वापस (Refund) करने का भी आदेश दिया है।

  • रिफंड की अवधि – 27 अगस्त 2025 से लेकर 6 फरवरी 2026 के बीच भारतीय निर्यातकों ने जो 25% अतिरिक्त पेनल्टी चुकाई थी, वह उन्हें वापस मिलेगी।
  • हजारों करोड़ का फायदा –  एक अनुमान के अनुसार, इस 6 महीने की अवधि में भारतीय कारोबारियों ने अरबों डॉलर की पेनल्टी दी थी। अब यह राशि रिफंड होने से भारतीय कंपनियों के पास कैश फ्लो बढ़ेगा।
  • सीधे लाभार्थी –  कपड़ा (Textiles), रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery), इंजीनियरिंग सामान, और फार्मास्युटिकल क्षेत्र के व्यापारियों को इससे सबसे ज्यादा लाभ होगा।

भारत को क्या शर्तें माननी पड़ीं?

यह राहत बिना किसी शर्त के नहीं मिली है। अमेरिका और भारत के बीच हुए इस “इंटरिम ट्रेड डील” के तहत कुछ प्रमुख समझौते हुए हैं

  • रूसी तेल पर रोक – भारत ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल के आयात को बंद करने या काफी कम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • अमेरिकी ऊर्जा की खरीद –  भारत अब रूस के बजाय अमेरिका से अधिक मात्रा में कच्चा तेल (Crude Oil) और LNG खरीदेगा।
  •  रक्षा सहयोग –  दोनों देशों के बीच अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।

व्यापार पर प्रभाव और भविष्य का रोडमैप

इस टैरिफ कटौती से भारत-अमेरिका व्यापार में एक नई तेजी आने की उम्मीद है

विवरण पहले (2025)अब  (2026)
पेनल्टी टैरिफ25%0%(पूरी तरह खत्म)
रेसिप्रोकल टैरिफ25%18%
कुल प्रभावी ड्यूटी50%18%
रिफंड सुविधालागू नहीं27 अगस्त 2025 से लागू 

अमेरिका द्वारा टैरिफ वापसी का यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए किसी “संजीवनी” से कम नहीं है। इससे न केवल भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में फिर से प्रतिस्पर्धी (Competitive) हो जाएंगे, बल्कि रिफंड के रूप में मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये भारतीय उद्योगों की कमर मजबूत करेंगे।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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