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सुप्रीम कोर्ट में US के द्वारा लगाए गए टैरिफ के फैसले के पहले ट्रंप ने की सोशल मीडिया में एक पोस्ट

सुप्रीम कोर्ट में US के द्वारा लगाए गए टैरिफ के फैसले के पहले ट्रंप ने की सोशल मीडिया में एक पोस्ट
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 13, 2026 1:39 अपराह्न
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ (Tariffs) पर एक ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई अपने अंतिम चरण में है। इस फैसले से ठीक पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक बेहद आक्रामक और चेतावनी भरी पोस्ट साझा की है, जिसने पूरी दुनिया के बाजारों और कानूनी विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।

ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट –  “WE’RE SCREWED!”

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से ठीक पहले (12-13 जनवरी 2026), डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक लंबी पोस्ट साझा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सुप्रीम कोर्ट उनके टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाता है, तो अमेरिका के लिए यह एक “वित्तीय आपदा” होगी।

उनकी पोस्ट के मुख्य बिंदु

“हम बर्बाद हो जाएंगे” (WE’RE SCREWED!) – ट्रंप ने सीधे शब्दों में लिखा कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को अवैध घोषित किया, तो अमेरिका की स्थिति बहुत खराब हो जाएगी।

हजारों अरब डॉलर का रिफंड –  उन्होंने दावा किया कि यदि टैरिफ रद्द होते हैं, तो अमेरिकी सरकार को आयातकों (Importers) को सैकड़ों अरब डॉलर लौटाने होंगे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि अन्य देशों और कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को जोड़ लिया जाए, तो यह राशि ट्रिलियन (लाखों करोड़) डॉलर तक पहुँच सकती है।

“पूरी तरह से अव्यवस्था” (Complete Mess) –  उन्होंने लिखा कि यह पैसा वापस करना लगभग “असंभव” होगा और यह पता लगाने में सालों लग जाएंगे कि किसे, कब और कितना भुगतान करना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला –  ट्रंप ने अपने टैरिफ को एक “National Security Bonanza” बताया और कहा कि यह अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

क्यों है यह केस सुप्रीम कोर्ट में (The Legal Battle)

यह मामला मुख्य रूप से ट्रंप की उन शक्तियों के इर्द-गिर्द घूमता है, जिनका उपयोग उन्होंने व्यापारिक शुल्क लगाने के लिए किया है।

विवाद का मुख्य केंद्र – IEEPA कानून

ट्रंप ने ‘International Emergency Economic Powers Act (IEEPA)’ (1977) का उपयोग करके ये टैरिफ लगाए थे। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका का बढ़ता व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चीन से नशीली दवाओं (fentanyl) की तस्करी एक “राष्ट्रीय आपातकाल” है।

केस की पृष्ठभूमि

निचली अदालतों का फैसला –  निचली संघीय अदालतों ने पहले ही ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कहा था कि IEEPA कानून राष्ट्रपति को “असीमित टैरिफ लगाने” की शक्ति नहीं देता। अदालतों के अनुसार, कर (Tax) लगाने की शक्ति संविधान के तहत अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।

विवादित टैरिफ –  इनमें तथाकथित “लिबरेशन डे” (Liberation Day) टैरिफ शामिल हैं, जिनमें चीन, भारत, ब्राजील, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों से आने वाले सामानों पर 10% से 50% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था।

कंपनियों का विरोध – लगभग 1,000 से अधिक कंपनियों (जैसे कोस्टको और अन्य रिटेलर्स) ने सरकार पर केस किया है, जिसमें उन्होंने वसूले गए टैरिफ को वापस करने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान स्थिति

सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायाधीशों ने नवंबर 2025 में इस मामले पर दलीलें सुनी थीं। प्रारंभिक टिप्पणियों से ऐसा लग रहा था कि न्यायाधीश (रूढ़िवादी और उदारवादी दोनों) इस बात को लेकर संशय में हैं कि क्या एक राष्ट्रपति बिना संसद की अनुमति के इतने बड़े पैमाने पर वैश्विक टैरिफ लगा सकता है।

संभावित परिणाम –  यदि कोर्ट टैरिफ को अवैध मानता है, तो सरकार को करीब 150 अरब डॉलर से 200 अरब डॉलर के बीच का राजस्व रिफंड करना पड़ सकता है।

व्हाइट हाउस की रणनीति –  ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि यदि वे सुप्रीम कोर्ट में हारते भी हैं, तो वे 1962 के ट्रेड एक्ट जैसे अन्य कानूनों का उपयोग करके टैरिफ को फिर से लागू करने की कोशिश करेंगे।

वैश्विक और आर्थिक प्रभाव

इस एक फैसले पर भारत सहित पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं|

भारत पर असर: भारत से होने वाले निर्यात पर अमेरिका ने 25% से 50% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यदि फैसला ट्रंप के खिलाफ आता है, तो भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।

बाजार की हलचल – ट्रंप की इस पोस्ट के बाद अमेरिकी और वैश्विक शेयर बाजारों में अनिश्चितता देखी गई है, क्योंकि “लाखों करोड़ डॉलर के रिफंड” की बात से निवेशक डरे हुए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की पोस्ट को सुप्रीम कोर्ट पर “सार्वजनिक दबाव” बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वे यह संदेश देना चाहते हैं कि टैरिफ हटाना केवल एक कानूनी फैसला नहीं होगा, बल्कि यह अमेरिकी खजाने को खाली कर देने वाला कदम होगा।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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