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रूस और US  के बीच बढ़ सकता है तनाव – ब्रिटेन की मदद से अमेरिका ने किया रूसी जहाज को जप्त

रूस और US  के बीच बढ़ सकता है तनाव - ब्रिटेन की मदद से अमेरिका ने किया रूसी जहाज को जप्त
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 8, 2026 1:19 अपराह्न
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रूस और अमेरिका के बीच हाल ही में एक ऐसी घटना घटी है जिसने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। अटलांटिक महासागर की लहरों के बीच चले एक हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद से एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। यह घटना न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों बल्कि दो महाशक्तियों के बीच पहले से ही जारी तनाव को एक नए चरम पर ले गई है।

बेला-1 से मैरिनेरा तक का सफर

जिस जहाज को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हुआ है उसका नाम वर्तमान में मैरिनेरा (Marinera) है। हालांकि यह जहाज हमेशा से इस नाम से नहीं जाना जाता था।

मूल नाम – इस टैंकर का असली नाम बेला-1 (Bella-1) था।

प्रतिबंधों का इतिहास

अमेरिका ने साल 2024 में ही इस जहाज पर प्रतिबंध लगा दिए थे। आरोप था कि यह जहाज शैडो फ्लीट (Shadow Fleet) का हिस्सा है जो ईरान, वेनेजुएला और रूस के लिए अवैध तेल की तस्करी करता है।

पहचान बदलने की कोशिश

जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इस जहाज का पीछा करना शुरू किया तो पकड़े जाने के डर से जहाज के चालक दल ने समुद्र के बीचों-बीच ही इसके पिछले हिस्से पर रूसी झंडा (Russian Flag) पेंट कर दिया और जहाज का नाम बदलकर मैरिनेरा रख दिया।

रूस का संरक्षण

24 दिसंबर 2025 को रूस ने इस जहाज को अपनी आधिकारिक शिपिंग रजिस्ट्री में शामिल कर लिया और इसे सोची (Sochi) के होम पोर्ट के साथ रूसी ध्वज के तहत चलने का अस्थायी परमिट दे दिया।

कहां और कैसे हुई जब्ती

यह ऑपरेशन किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन जैसा था। अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर इसे उत्तरी अटलांटिक महासागर (North Atlantic Ocean) में अंजाम दिया।

सटीक लोकेशन

जहाज को आइसलैंड और स्कॉटलैंड के बीच स्थित समुद्री क्षेत्र जिसे GIUK गैप कहा जाता है में घेरा गया। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

लंबा पीछा

अमेरिकी सेना और कोस्ट गार्ड लगभग दो सप्ताह से इस जहाज का पीछा कर रहे थे। शुरुआत में इसे कैरिबियन सागर में वेनेजुएला के पास रोकने की कोशिश की गई थी लेकिन तब यह चकमा देकर भाग निकला था।

अंतिम कार्रवाई

7 जनवरी 2026 को जब यह जहाज रूस के आर्कटिक बंदरगाह मुरमान्स्क (Murmansk) की ओर बढ़ रहा था तब अमेरिकी नौसेना और कोस्ट गार्ड के जवानों ने हेलिकॉप्टर के जरिए इस पर धावा बोला और इसे अपने नियंत्रण में ले लिया।

किस प्रकार से मदद की ब्रिटेन ने 

इस पूरे ऑपरेशन में ब्रिटेन (UK) की भूमिका इनैबलिंग सपोर्ट (Enabling Support) की रही। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय (MoD) ने खुद पुष्टि की है कि उन्होंने अमेरिका की मदद के लिए अपने सैन्य संसाधनों का उपयोग किया।

वायु सेना (RAF) की निगरानी

ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स के P-8 पोसिडॉन (Poseidon) निगरानी विमानों ने लगातार जहाज की स्थिति को ट्रैक किया।

सैन्य बेस की सुविधा

अमेरिका को अपने लड़ाकू विमानों और निगरानी विमानों के लिए ब्रिटेन के हवाई अड्डों जैसे सफोल्क में RAF माइल्डनहॉल का उपयोग करने की अनुमति दी गई।

लॉजिस्टिक्स और रीफ्यूलिंग

ब्रिटिश नौसेना के आपूर्ति जहाज RFA टाइडफोर्स (RFA Tideforce) ने अमेरिकी बेड़े को समुद्र के बीच ईंधन और अन्य रसद पहुँचाई जिससे अमेरिकी जहाज बिना रुके पीछा जारी रख सके।

खुफिया जानकारी

ब्रिटेन ने अपनी खुफिया एजेंसियों के जरिए जहाज के रूट और उसके संभावित गंतव्य की सटीक जानकारी अमेरिका के साथ साझा की।

जहाज कब से और क्यों ढूंढ रहा था अमेरिका

अमेरिका की इस जहाज पर नजर साल 2024 से ही थी।

प्रतिबंधों का उल्लंघन

बेला-1 अब मैरिनेरा को हिजबुल्ला से जुड़ी कंपनियों और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई के लिए काली सूची में डाला गया था।

ट्रंप प्रशासन की सख्ती

2026 में अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वेनेजुएला और ईरान के तेल व्यापार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज वेनेजुएला से कच्चा तेल लेकर रूस जा रहा था।

दो हफ्तों का हाई-ड्रामा

दिसंबर 2025 के अंत में जब यह जहाज एंटीगुआ और बारबुडा के तट के पास देखा गया तब से अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसके पीछे अपना पूरा जोर लगा दिया था।

समुद्री डकैती का आरोप रूस की प्रतिक्रिया

रूस ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है।

संप्रभुता पर हमला

रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश को खुले समुद्र (International Waters) में किसी दूसरे देश के पंजीकृत जहाज पर बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।

सबमरीन का हस्तक्षेप

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब अमेरिका इस जहाज का पीछा कर रहा था तब रूस ने इसकी सुरक्षा के लिए एक परमाणु पनडुब्बी (Nuclear Submarine) और युद्धपोत भी तैनात किए थे लेकिन वे अमेरिकी घेराबंदी को नहीं तोड़ सके।

चेतावनी

रूसी अधिकारियों ने इसे समुद्री डकैती (Piracy) करार दिया है और चेतावनी दी है कि इसके गंभीर परिणाम होंगे।

क्या  बन सकती हैयुद्ध की स्थिति

इस घटना ने शीत युद्ध (Cold War) की यादें ताजा कर दी हैं। इसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं-

सैन्य टकराव का डर

अगर रूस जवाबी कार्रवाई में किसी अमेरिकी या ब्रिटिश व्यापारिक जहाज को रोकता है तो स्थिति बेकाबू हो सकती है।

ऊर्जा संकट

शैडो फ्लीट पर इस तरह की कार्रवाई से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता आ सकती है।

राजनयिक दरार

अमेरिका और ब्रिटेन के इस संयुक्त ऑपरेशन ने रूस के साथ उनके बचे-खुचे कूटनीतिक रास्तों को भी बंद कर दिया है।

मैरिनेरा की जब्ती केवल एक जहाज को पकड़ने की घटना नहीं है बल्कि यह पश्चिमी देशों और रूस-ईरान-वेनेजुएला धुरी के बीच चल रहे ग्रेट गेम का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि व्लादिमीर पुतिन इस अपमान का बदला किस तरह लेते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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