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ईरान की  नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को सात साल की सजा

ईरान की  नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को सात साल की सजा
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 9, 2026 8:17 अपराह्न
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ईरान की सुप्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने सलाखों के पीछे रहकर भी अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज को दबने नहीं दिया। हाल ही में फरवरी 2026 में उन्हें एक बार फिर सात साल और छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। यह सजा ‘राज्य के खिलाफ साजिश’ और ‘प्रोपेगेंडा’ फैलाने के आरोपों में दी गई है।

नरगिस मोहम्मदी –  जीवन परिचय 

नरगिस मोहम्मदी का जन्म 21 अप्रैल 1972 को ईरान के जांजन (Zanjan) शहर में हुआ था। उनका पालन-पोषण कराज और कुर्दिस्तान के इलाकों में हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा इमाम खमेनी इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से पूरी की जहाँ से उन्होंने भौतिक विज्ञान (Physics) में डिग्री प्राप्त की। एक पेशेवर इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू करने के साथ-साथ उनका झुकाव सामाजिक न्याय और लेखन की ओर था।

शादी और परिवार –  1999 में उन्होंने सुधारवादी पत्रकार तागी रहमानी से शादी की। रहमानी खुद भी अपने राजनीतिक सक्रियता के कारण 14 साल जेल में बिता चुके हैं और अब फ्रांस में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। नरगिस के दो जुड़वां बच्चे अली और कियाना हैं जिनसे वह 2015 से नहीं मिल पाई हैं।

मानवाधिकारों के लिए संघर्ष और नोबेल पुरस्कार

नरगिस मोहम्मदी का मुख्य कार्य ईरान में महिलाओं के दमन के खिलाफ लड़ना और सभी के लिए मानवाधिकारों की वकालत करना रहा है।

डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (DHRC) –  वह नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी द्वारा स्थापित इस संगठन की उपाध्यक्ष हैं।

मृत्युदंड के खिलाफ अभियान –  उन्होंने ईरान में मृत्युदंड को समाप्त करने के लिए लेगाम (Legam) नामक अभियान का नेतृत्व किया।

नोबेल शांति पुरस्कार (2023) – अक्टूबर 2023 में उन्हें ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के उनके संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जब यह पुरस्कार घोषित हुआ तब भी वह तेहरान की कुख्यात एविन जेल में बंद थीं।

हालिया सजा –  सात साल की जेल फरवरी 2026

8 फरवरी 2026 को ईरानी अदालत ने नरगिस मोहम्मदी को फिर से सजा सुनाई। इस नई सजा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं

  • सजा की अवधि – 7 साल और 6 महीने की कैद।
  • आरोप – राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ मिलीभगत (Collusion) और राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा।
  •  अतिरिक्त दंड –  उन्हें सजा के बाद दो साल के लिए दक्षिण खुरासान प्रांत के खोफ (Khosf) शहर में आंतरिक निर्वासन (Internal Exile) में रहने और विदेश यात्रा पर प्रतिबंध का सामना करना होगा।
  •   कारण –  यह सजा जेल के अंदर से भी उनकी सक्रियता लेखों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लिखे गए पत्रों के जवाब में दी गई है।

 अब तक कितनी बार जेल और कितनी सजा?

नरगिस मोहम्मदी का जीवन जेल की दीवारों और अदालती कार्यवाहियों के बीच बीता है। ईरानी शासन ने उनकी आवाज दबाने के लिए हर संभव प्रयास किया है।

गिरफ्तारी और सजा का सांख्यिकीय विवरण

विवरण कुल संख्या (अनुमानित)
कुल गिरफ्तारियां

प्रमुख जेल यात्राएं और ऐतिहासिक क्रम

  • 1998 –  पहली गिरफ्तारी आलोचनात्मक लेखों के लिए एक साल की जेल।
  • 2010 –  DHRC की सदस्यता के लिए गिरफ्तारी। स्वास्थ्य खराब होने पर जमानत मिली।
  • 2011 – राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ कार्य के लिए 11 साल की सजा (बाद में 6 साल की गई)।
  • 2015 –  16 साल की जेल की सजा (इसमें लेगाम समूह बनाने के लिए 10 साल शामिल थे)।
  • 2021-2022 – जेल के अंदर से प्रदर्शन करने और लेख लिखने के लिए बार-बार अतिरिक्त सजाएं दी गईं।
  • दिसंबर 2024 – गंभीर सर्जरी के बाद उन्हें अस्थायी तौर पर तीन सप्ताह की मेडिकल पैरोल मिली थी लेकिन दिसंबर 2025 में उन्हें फिर से ‘हिंसक’ तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया।

ईरान की वर्तमान स्थिति और नरगिस की भूमिका

ईरान में पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर महसा अमीनी की मौत के बाद महिला  जीवन  स्वतंत्रता (Woman, Life, Freedom) आंदोलन ने जोर पकड़ा है। नरगिस मोहम्मदी ने जेल के अंदर रहते हुए भी इस आंदोलन का समर्थन किया।

  • सफेद यातना (White Torture) –  उन्होंने जेलों में होने वाले मानसिक अत्याचार और एकांत कारावास पर एक किताब लिखी है जिसका शीर्षक वाइट टॉर्चर है। इसमें उन्होंने महिला कैदियों के अनुभवों को दुनिया के सामने रखा।
  •  भूख हड़ताल – उन्होंने जेल में चिकित्सा देखभाल की कमी और अनिवार्य हिजाब के खिलाफ कई बार भूख हड़ताल की है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

नरगिस की हालिया सजा की संयुक्त राष्ट्र (UN) एमनेस्टी इंटरनेशनल और कई यूरोपीय देशों ने कड़ी निंदा की है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ईरान उनके साहस से डरा हुआ है और उन्हें स्थायी रूप से सलाखों के पीछे रखना चाहता है।

जेल की दीवारें नरगिस मोहम्मदी की आवाज को लोगों तक पहुंचने से नहीं रोक पाई हैं। – शिरीन एबादी (नोबेल विजेता)

नरगिस मोहम्मदी सिर्फ एक कार्यकर्ता नहीं बल्कि आधुनिक ईरान में मानवाधिकारों की मशाल हैं। उनकी नई 7.5 साल की सजा यह दर्शाती है कि ईरानी शासन असहमति की आवाजों के प्रति कितना कठोर है। बावजूद इसके उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी यह लंबी लड़ाई अंततः रंग लाएगी।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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