फरवरी 2026 में, मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आया है। आठ प्रमुख मुस्लिम देशों ने एकजुट होकर वेस्ट बैंक (West Bank) में इजरायल की विस्तारवादी नीतियों और अवैध कब्जे के प्रयासों के खिलाफ एक औपचारिक और कड़ा मोर्चा खोल दिया है|
यह घटनाक्रम न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र में शांति की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की मर्यादा पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
मोर्चा खोलने वाले 8 मुस्लिम देश कौन से हैं?
फरवरी, 2026 को जारी एक संयुक्त बयान में निम्नलिखित आठ देशों के विदेश मंत्रियों ने इजरायल की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की
- सऊदी अरब (Saudi Arabia)
- मिस्र (Egypt)
- जॉर्डन (Jordan)
- कतर (Qatar)
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- तुर्की (Türkiye)
- इंडोनेशिया (Indonesia)
- पाकिस्तान (Pakistan)
इन देशों का एक साथ आना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें से कुछ देशों (जैसे मिस्र, जॉर्डन, और यूएई) के इजरायल के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध हैं, जबकि सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देश इजरायल को मान्यता नहीं देते।
विवाद की ताज़ा वजह क्या है? (फरवरी 2026 का घटनाक्रम)
वेस्ट बैंक में तनाव हमेशा से रहा है, लेकिन ताजा आक्रोश इजरायल के ‘सुरक्षा कैबिनेट’ द्वारा लिए गए कुछ विवादास्पद फैसलों के कारण है। इन फैसलों में निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल हैं
- संपत्ति रिकॉर्ड का खुलासा- इजरायल ने वेस्ट बैंक में भूमि स्वामित्व के रिकॉर्ड (Land Records) को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। इससे पहले ये गोपनीय थे। मुस्लिम देशों का आरोप है कि इससे फिलिस्तीनी जमीनों को इजरायली निवासियों द्वारा खरीदने या जब्त करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
- प्रशासनिक बदलाव – हेब्रोन (Hebron) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति देने का अधिकार फिलिस्तीनी नगर पालिकाओं से छीनकर इजरायली नागरिक प्रशासन को सौंपने की योजना है।
- अवैध बस्तियों का विस्तार – इजरायल ने 19 नई बस्तियों (Settlements) की स्थापना और हजारों नए घर बनाने की योजना को मंजूरी दी है।
- एरिया A और B में हस्तक्षेप – ओस्लो समझौते के तहत जो क्षेत्र (एरिया A और B) फिलिस्तीनी प्राधिकरण के नियंत्रण में होने चाहिए थे, वहां भी अब इजरायल सुरक्षा और निर्माण उल्लंघन के बहाने कार्रवाई कर रहा है।
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मुस्लिम देशों का तर्क और मांगें
इन आठ देशों ने अपने संयुक्त बयान में बहुत ही स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है-
1. अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
इन देशों ने कहा कि इजरायल की ये कार्रवाइयां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 का सीधा उल्लंघन हैं। यह प्रस्ताव स्पष्ट रूप से कहता है कि 1967 के बाद कब्जाई गई जमीन पर इजरायली बस्तियां अवैध हैं।
2. संप्रभुता का अभाव
बयान में जोर देकर कहा गया कि “कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर इजरायल की कोई संप्रभुता नहीं है।” वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गाजा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलिस्तीनी क्षेत्र माना जाता है।
3. दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) को खतरा
मुस्लिम देशों का मानना है कि यदि इजरायल वेस्ट बैंक का इसी तरह धीरे-धीरे ‘एनेक्सेशन’ (विलय) करता रहा, तो भविष्य में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र बनाना असंभव हो जाएगा। यह इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के स्थायी समाधान की संभावना को पूरी तरह खत्म कर देगा।
ऐतिहासिक संदर्भ – वेस्ट बैंक क्या है और क्यों विवादित है?
वेस्ट बैंक जॉर्डन नदी के पश्चिम में स्थित एक भूमि का टुकड़ा है। इसके इतिहास को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को जानना जरूरी है
- 1948 का युद्ध- इजरायल के गठन के बाद हुए युद्ध में इस क्षेत्र पर जॉर्डन का नियंत्रण हो गया था।
- 1967 का छह दिवसीय युद्ध- इजरायल ने जॉर्डन को हराकर वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया। तब से यह ‘कब्जे वाले क्षेत्र’ (Occupied Territory) के रूप में जाना जाता है।
- ओस्लो समझौता (1990 के दशक)- इसके तहत वेस्ट बैंक को तीन क्षेत्रों (Area A, B, C) में बांटा गया था। ‘एरिया सी’ पूरी तरह इजरायली सैन्य नियंत्रण में है, और यहीं सबसे ज्यादा अवैध बस्तियां बनाई जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
केवल ये आठ देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इजरायल के इन कदमों की आलोचना हो रही है-
- OIC (इस्लामी सहयोग संगठन) – 57 देशों के इस संगठन ने इसे “युद्ध अपराध” करार दिया है।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) – यूएन महासचिव ने चेतावनी दी है कि ये कदम क्षेत्र में हिंसा को और भड़काएंगे।
- यूरोपीय संघ (EU) – यूरोपीय देशों ने भी बस्तियों के विस्तार को शांति के मार्ग में बड़ी बाधा बताया है।
इस मोर्चे का प्रभाव क्या होगा?
यह कूटनीतिक मोर्चा कई स्तरों पर प्रभाव डाल सकता है
- अब्राहम समझौते (Abraham Accords) पर दबाव – यूएई जैसे देशों का कड़ा रुख यह दिखाता है कि इजरायल के साथ सामान्य संबंधों के बावजूद वे फिलिस्तीनी मुद्दे पर समझौता नहीं करेंगे।
- सऊदी-इजरायल संबंधों में देरी – सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि जब तक फिलिस्तीन राष्ट्र की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, वह इजरायल को मान्यता नहीं देगा।
- वैश्विक कूटनीति – ये देश अब अंतरराष्ट्रीय मंचों (जैसे UN और ICJ) पर इजरायल को घेरने की तैयारी कर रहे हैं।
आठ मुस्लिम देशों द्वारा वेस्ट बैंक के मुद्दे पर उठाया गया यह कदम यह दर्शाता है कि मुस्लिम जगत अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहता। इजरायल की वर्तमान सरकार की विस्तारवादी नीतियों ने अरब और इस्लामी देशों को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है
जहाँ उन्हें अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और ऐतिहासिक प्रतिबद्धताओं के लिए कड़ा रुख अपनाना पड़ रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इजरायल पर इन अवैध कब्जों को रोकने के लिए कोई प्रभावी प्रतिबंध लगाता है या नहीं।







