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आजीवन कारावास की सजा कट रहे गैंगस्टर अबू सलेम कोर्ट से मांगी इमरजेंसी परोल

अबू सलेम कोर्ट से मांगी इमरजेंसी परोल
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 6, 2026 7:36 अपराह्न
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अबू सलेम कोर्ट से मांगी इमरजेंसी परोल-अबू सलेम -अंडरवर्ल्ड की गलियों से आजीवन कारावास तक का सफर-अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी जिसे अंडरवर्ल्ड में कैप्टन या अबू के नाम से जाना जाता है भारतीय अपराध जगत का एक ऐसा नाम है जिसने 90 के दशक में मुंबई को दहला कर रख दिया था। वर्तमान में वह तलोजा जेल में बंद है और अपनी सजा काट रहा है।

इमरजेंसी पैरोल की मांग

अबू सलेम ने हाल ही में अदालत के समक्ष इमरजेंसी पैरोल (Emergency Parole) के लिए याचिका दायर की है। 

  • पैरोल मांगने का मुख्य कारण –अबू सलेम ने अपनी याचिका में मानवीय आधार (Humanitarian Grounds) का हवाला दिया है। सलेम ने दावा किया है कि उसे अपने परिवार से मिलने और कुछ घरेलू विवादों को सुलझाने के लिए कुछ समय के लिए बाहर जाने की अनुमति दी जाए। विशेष रूप से उसने अपनी शादी और परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा पहले भी जताई है लेकिन इस बार इमरजेंसी शब्द का प्रयोग कानूनी प्रक्रियाओं को गति देने के लिए किया गया है।
  • पैरोल की अवधि और गंतव्य-अबू सलेम ने अदालत से लगभग 45 दिनों की पैरोल मांगी है। उसका गंतव्य मुख्य रूप से मुंबई और उत्तर प्रदेश उसका पैतृक स्थान के आसपास के क्षेत्र हैं जहाँ उसके परिवार के सदस्य रहते हैं।
  • कानूनी पेच और सीबीआई का विरोध-अबू सलेम की पैरोल याचिका का हमेशा केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कड़ा विरोध किया जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
  • सुरक्षा का खतरा-सलेम एक हाई-प्रोफाइल कैदी है। उसके बाहर निकलने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने या उसके फरार होने का खतरा बना रहता है।
  • प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty)-सलेम को 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। संधि की शर्तों के अनुसार उसे मृत्युदंड या 25 वर्ष से अधिक की जेल नहीं दी जा सकती। एजेंसियां तर्क देती हैं कि पैरोल देने से संधि की जटिलताएं और सुरक्षा प्रोटोकॉल प्रभावित हो सकते हैं।

अबू सलेम का आपराधिक इतिहास और प्रमुख मामले

अबू सलेम का नाम कई जघन्य अपराधों से जुड़ा रहा है जिसने उसे भारत के सबसे खतरनाक अपराधियों की सूची में खड़ा कर दिया।

  • 1993 के मुंबई बम धमाके-सलेम 1993 के सिलसिलेवार बम विस्फोटों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। उस पर हथियारों और विस्फोटकों जैसे AK-56 राइफलें को गुजरात से मुंबई लाने और उन्हें विभिन्न स्थानों पर वितरित करने का आरोप था। इसी मामले में टाडा TADA कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
  • बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या 1995-मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी सलेम को दोषी ठहराया गया था। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा मिली हुई है।
  • गुलशन कुमार हत्याकांड 1997-संगीत जगत के दिग्गज और टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की हत्या ने बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के संबंधों को उजागर किया था। इस हत्याकांड में भी अबू सलेम का नाम मुख्य संदिग्ध के रूप में उभरा था।
  • बॉलीवुड से जबरन वसूली Extortion –सलेम अपनी ग्लैमरस जीवनशैली और बॉलीवुड अभिनेताओं व निर्देशकों को डराने-धमकाने के लिए कुख्यात था। 

क्या सलेम को पैरोल मिलेगी

भारतीय कानून के तहत एक अपराधी को पैरोल मिलना उसका अधिकार नहीं बल्कि एक विशेष विशेषाधिकार है जो जेल अधिकारियों और अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।

  • आतंकवाद के मामलों में कठोरता-चूंकि सलेम आतंकवाद TADA के तहत दोषी है इसलिए नियमों के अनुसार ऐसे कैदियों को पैरोल मिलना अत्यंत कठिन होता है।
  • अदालत का रुख-अदालतें अक्सर ऐसे अपराधियों की पैरोल याचिकाओं को खारिज कर देती हैं जिन्हें समाज के लिए खतरा माना जाता है। पूर्व में भी सलेम की ऐसी कई याचिकाओं को सुरक्षा कारणों से खारिज किया जा चुका है।

अबू सलेम की पैरोल याचिका वर्तमान में विचाराधीन है लेकिन उसके आपराधिक इतिहास और सुरक्षा एजेंसियों के कड़े रुख को देखते हुए उसे राहत मिलने की संभावना काफी कम दिखाई देती है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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