धर्मेंद्र का निधन: हिंदी सिनेमा का ‘ही-मैन’ चला गया, एक युग का अंत
मुंबई, 24 नवंबर 2025 — हिंदी फिल्म जगत के महानायक और बॉलीवुड के “ही-मैन” कहलाने वाले धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में उनका निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक गहरा आघात है। छह दशकों से अधिक के अपने शानदार करियर में उन्होंने न सिर्फ 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, बल्कि भारतीय सिनेमा को कई कालजयी किरदार भी दिए, जिन्हें आज भी दर्शक उतने ही प्रेम से याद करते हैं।

धर्मेंद्र का फिल्मी सफर 1960 के दशक में शुरू हुआ था, और देखते ही देखते वे हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय नायकों में से एक बन गए। उनकी कद-काठी, व्यक्तित्व, अभिनय की सहजता और एक अलग ही करिश्मा ने उन्हें बॉलीवुड का पहला “माचो हीरो” बना दिया। यही वजह थी कि उन्हें प्यार से “ही-मैन ऑफ बॉलीवुड” कहा गया।
एक बहुमुखी कलाकार
धर्मेंद्र ने अपने करियर में हर तरह की भूमिकाएँ निभाईं — रोमांटिक, एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी और कैरेक्टर रोल।
1960 और 70 के दशक में उनके रोमांटिक किरदारों को दर्शकों ने बेहद सराहा। “अनुपमा”, “सत्यकाम”, “बंधन” और “आया सावन झूम के” जैसी फिल्मों में उनका संवेदनशील और गहरा अभिनय आज भी मिसाल माना जाता है।
बाद में उन्होंने एक्शन फिल्मों में भी जबरदस्त सफलता हासिल की। “शोले”, “धरम वीर”, “राम बलराम”, “कातिलों का कातिल” और “द पटियाला हाउस” जैसी फिल्में उनके एक्शन-स्टार व्यक्तित्व को मजबूत बनाती हैं। दर्शक आज भी “शोले” के वीरू को याद करके मुस्कुरा उठते हैं — एक ऐसा किरदार जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर है।
सुपरहिट फिल्मों की लंबी सूची
धर्मेंद्र ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनमें से कई सिनेमा इतिहास की सबसे सफल फिल्मों में शामिल हैं।
उनकी शीर्ष सफल फिल्मों में शामिल हैं:
• शोले (1975) — भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक
• सीता और गीता
• चुपके चुपके — कॉमेडी का कालजयी उदाहरण
• धरम वीर
• राम बलराम
• कटी पतंग
• यादों की बारात
इन फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स-ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए, बल्कि धर्मेंद्र को एक सर्वगुण संपन्न अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
अंतिम फिल्म और अंतिम विदाई
धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म “इक्कीस” (21) है, जिसमें उन्होंने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह फिल्म 25 दिसंबर 2025 को रिलीज़ होने वाली है, और अब इसे उनके चाहने वालों के लिए एक भावुक श्रद्धांजलि माना जा रहा है।

अभिनेता का अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान में किया गया, जहाँ उनके परिवार के साथ फिल्म इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियाँ भी उपस्थित थीं। सभी ने नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
नेताओं और फिल्म जगत ने व्यक्त किया शोक
धर्मेंद्र के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर फैल गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की धरोहर थे। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि उनके जाने से “एक दौर का अंत” हो गया है।
फिल्म निर्देशक करण जौहर ने उन्हें “सच्चा लेजेंड” बताया और कहा कि धर्मेंद्र की विनम्रता, दयालुता और सादगी फिल्म इंडस्ट्री में दुर्लभ थी।
सम्मान और उपलब्धियाँ
धर्मेंद्र को उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले।
उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
उन्हें फ़िल्मफ़ेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए।
लेकिन इन सम्मानों से भी बड़ी थी उनकी वह छवि जो लाखों दिलों में बसी हुई है — एक सरल, गर्मजोशी से भरपूर और अंदर से बेहद भावुक इंसान की।
एक युग की विरासत
धर्मेंद्र का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है। यह एक ऐसे दौर का अंत है जिसने हिंदी सिनेमा में हीरो की परिभाषा बदल दी।
उनकी हँसी, उनका अंदाज़, उनकी संवाद अदायगी और उनकी फिल्मों का विशाल संग्रह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

“शोले” का वीरू, “चुपके चुपके” का प्रोफेसर परिमल, “सत्यकाम” का सत्यप्रकाश और “धरम वीर” का शूरवीर — ये सभी किरदार हमेशा जीवित रहेंगे, क्योंकि धर्मेंद्र ने उन्हें सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि जिया था।
उनके चाहने वालों के लिए यह समय बेहद भावुक है, लेकिन उनकी फ़िल्में, उनकी कहानियाँ और उनकी यादें आने वाले वर्षों तक उन्हें हर भारतीय के दिल में अमर बनाए रखेंगी।







