एशेज 2025-26 का रोमांच अब तीसरे टेस्ट की दहलीज पर खड़ा है। पहले दो मुकाबलों में लगातार हार के बाद इंग्लैंड जिस दबाव में पहुंच चुका है, वह इस श्रंखला का सबसे निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। दूसरी ओर मेज़बान ऑस्ट्रेलिया 2-0 की बढ़त के साथ एडिलेड ओवल में उतर रहा है, जहाँ उसके पास सीरीज को अपनी मुट्ठी में करने का सुनहरा अवसर है। तीसरा टेस्ट आनें वाले 17 दिसंबर से गुलाबी गेंद के साथ डे-नाइट प्रारूप में खेला जाएगा, और यह मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना देता है। एडिलेड की पिच, शाम की नमी, रोशनी में स्विंग और रणनीति इन सबका मिश्रण दोनों टीमों के लिए चुनौती और अवसर दोनों लेकर आता है। ऐसे में यह टीमें अपना कैसा प्रदर्शन कर पाती है इस पर सबकी निगाहें टिकी है।

ऑस्ट्रेलिया की तैयारी, कप्तान की वापसी से बढ़ा हौसला
ब्रिसबेन टेस्ट के बाद जिस फैसले का इंतज़ार था, वह आखिरकार हो गया, कप्तान पैट कमिंस टीम में लौट आए हैं। पीठ की परेशानी के कारण वह पहले दो टेस्ट नहीं खेल पाए थे, लेकिन अब उनकी फिटनेस को लेकर टीम मैनेजमेंट पूरी तरह आश्वस्त है। कमिंस की वापसी से सिर्फ गेंदबाज़ी नहीं, बल्कि कप्तानी में स्थिरता भी लौटेगी। ऑस्ट्रेलिया की टीम पहले से ही जीत के जोश में है, और उसमें यदि अनुभव और नेतृत्व फिर से जुड़ जाए, तो इंग्लैंड के लिए हालात और मुश्किल बन सकते हैं। तेज़ गेंदबाज़ी का ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण पहले ही दो मैचों में इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी को दबाव में ला चुका है। अब कमिंस, स्टार्क और बोलैंड की संयुक्त ताकत एडिलेड की स्विंग फ्रेंडली हवा में और खतरनाक साबित हो सकती है।
टीम के स्पिन गेंदबाजों में नथन लायन की वापसी की चर्चाएँ तेज़ हैं। एडिलेड में लायन का रिकॉर्ड शानदार रहा है, और गुलाबी गेंद उनकी उंगलियों से निकलकर असर दिखा सकती है। वहीं, बल्लेबाज़ी में ट्रेविस हेड और मार्नस लाबुशेन बेहतरीन फॉर्म में हैं। स्टीव स्मिथ अनुभवी स्तंभ की तरह खड़े हैं और शुरुआती ओवरों में गेंद को पढ़ने की उनकी अद्भुत क्षमता गुलाबी गेंद के खिलाफ टीम को भरोसा देती है।
इंग्लैंड की स्थिति, हार से सबक.. तीसरे टेस्ट में अस्तित्व दांव पर
इंग्लैंड के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि सीरीज में खुद को जिंदा रखने की अंतिम उम्मीद है। पर्थ और ब्रिसबेन दोनों जगह इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी लड़खड़ाती रही। शीर्ष क्रम न चलने से मध्यक्रम पर अत्यधिक दबाव आया, और नतीजा कमजोर कुल स्कोर और पूरी टीम पर मानसिक दबाव।
गेंदबाज़ी में भी संगति की कमी साफ दिखाई दी। पहले टेस्ट में हल्की चाल दिखी थी, लेकिन दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने उनकी योजनाओं को पूरी तरह पढ़ लिया। अब एडिलेड में इंग्लैंड को अपनी गेंदबाज़ी संयोजन में जल्दी और ठोस बदलाव करने होंगे। गुलाबी गेंद के साथ गेंदबाज़ों से उम्मीदें बढ़ जाएंगी, पर सवाल यह है कि क्या उनके पास वह अनुशासन और निरंतरता है, जिसके बिना डे-नाइट टेस्ट जीतना मुश्किल है? बेन स्टोक्स की कप्तानी इस श्रृंखला में लगातार दबाव में दिखी है। अब तीसरे टेस्ट में वह रणनीतिक बदलावों के साथ उतर सकते हैं,मसलन अतिरिक्त तेज़ गेंदबाज़, शुरुआती ओवरों में चौकस फील्ड प्लेसमेंट, और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों के खिलाफ अधिक आक्रामक फील्डिंग योजनाएँ।
इंग्लिश बल्लेबाज़ी में भी संशोधन हो सकता है। ओपनिंग संयोजन में बदलाव, मध्यक्रम की रक्षा क्षमता और लंबे समय तक क्रीज पर टिकने का मानसिक आत्मविश्वास ये सभी पहलू उनके लिए अहम होंगे। अगर इंग्लैंड पहले दिन खुद को संभाल ले, तो मैच की दिशा बदलना आसान नहीं होगा पर असंभव भी नहीं।
डे-नाइट टेस्ट का फैक्टर, गुलाबी गेंद तय करेगी मुकाबला
एडिलेड ओवल डे-नाइट टेस्ट की जन्मभूमि जैसा माना जाता है। यहाँ गुलाबी गेंद की स्विंग शाम होते-होते अचानक बढ़ जाती है। पिच सपाट दिखेगी लेकिन रोशनी में गेंदबाज़ों को मदद मिलने लगती है।
दोनों कप्तानों की रणनीति में दो बातें प्रमुख
शाम के सत्र में गेंदबाज़ी का फायदा उठाना और उसी सत्र में बल्लेबाज़ी करते समय कम से कम नुकसान झेलना। ऑस्ट्रेलिया का तेज़ आक्रमण इस स्थिति का फायदा उठाने में माहिर माना जाता है। वहीं इंग्लैंड के पास जेम्स एंडरसन जैसा अनुभवी स्विंग गेंदबाज़ है, जो गुलाबी गेंद से किसी भी बल्लेबाज़ को परेशान कर सकता है। मगर यह तभी संभव होगा जब अन्य गेंदबाज़ भी बराबरी का सहयोग दिखाएँ।
दोनों टीमों की संभावित योजनाएँ
यदि देखा जाये तो इस मुकाबले के लिये दोनों टीमें अपनी पूरी तैयारी में हैं। और योजनानुरुप मैदान में उतरेंगी, जिसमें बात ऑस्ट्रेलिया की करें तो उस टीम में कमिंस, स्टार्क और बोलैंड के साथ तेज़ गेंदबाज़ी विपक्षी टीम को बड़ी चुनौती दे सकती है। वहीं स्मिथ, हेड और लाबुशेन के विकेट पर भी टीम को भरोसा रहेगा। बात स्पिन की करें तो
एडिलेड में लायन की स्पिन से विपक्षी टीम के रनों की रफ्तार रोकी जा सकती है। क्रिकेट के जानकारों की मानें तो शुरुआती ओवरों में आस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड पर मानसिक दबाव बनाना चाहेगी साथ ही पहली पारी में बड़ा स्कोर भी खड़ा करनें का प्रयास होगा ताकि मैच पर पकड़ बन सके। वहीं दूसरी तरफ इंग्लैंड की बात करें तो इंग्लैड की टीम ओपनिंग जोड़ी में बदलाव या नये शुरुआत की कोशिश कर सकती है़, पिच के हिसाब से स्विंग गेंदबाज़ी का भी अधिकतम उपयोग किया जायेगा, साथ ही टीम का यह प्रयास होगा कि बल्लेबाज लंबे समय तक क्रिज पर टिके रहे। वहीं दुरुस्त फील्डिंग के साथ ही कैच ड्रॉप जैसी गलती न हो इस पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।
सीरीज का सबसे निर्णायक मुकाबला
तीसरे टेस्ट की शुरुआत से पहले दोनों टीमों के बीच माहौल साफ है। ऑस्ट्रेलिया विश्वास में डूबा है, जबकि इंग्लैंड उम्मीदों में उलझा है।
वहीं ऑस्ट्रेलिया एशेज 2025-26 को अपने नाम करने से मात्र एक कदम दूर है। जबकि इंग्लैंड को अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी है, जिसमें न सिर्फ जीत, बल्कि अपने खोते आत्मविश्वास को वापस पाने की ज़रूरत होगी।







