नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की नीतियों को नई दिशा देने वाले सबसे महत्वपूर्ण संस्थान, नीति आयोग में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। बदलते वैश्विक हालात और साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आयोग की पूरी टीम को नया स्वरूप दिया है। इस बड़े पुनर्गठन के तहत देश के जाने-माने अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे मौजूदा उपाध्यक्ष सुमन बेरी की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है। सरकार का यह फैसला केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति भर नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक रणनीतियों को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है,नीति आयोग की स्थापना साल 2015 में योजना आयोग को बदलकर की गई थी। उस समय इसका उद्देश्य राज्यों की भागीदारी बढ़ाना और देश के लिए एक थिंक टैंक के रूप में काम करना था। पिछले करीब नौ सालों में आयोग ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, लेकिन अब सरकार को महसूस हो रहा है कि 2047 के बड़े लक्ष्य को पाने के लिए एक ऐसी टीम की जरूरत है जो वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों को बेहतर ढंग से समझ सके। यही कारण है कि इस बार आयोग के ढांचे में अब तक का सबसे व्यापक बदलाव किया गया है। सरकार चाहती है कि नीति आयोग अब केवल सलाह देने वाली संस्था न रहे, बल्कि वह तेजी से बदलती दुनिया में भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच और ,विकास का इंजन बनकर उभरे।
अनुभवी अर्थशास्त्री को कमान
अशोक लाहिड़ी पूर्व में भारत सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार और वित्त आयोग के सदस्य रह चुके हैं ,वे स्वाद के नामी अर्थशास्त्री हैं तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका अनुभव रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं के साथ भी काम किया है।आर्थिक नीतियों की समझ और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना गया है।सरकार को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में नीति आयोग नई चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेगा।
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केवल आर्थिक ही नहीं तकनीकी विकास पर भी नजर
इस बार के पुनर्गठन में एक नई बात यह देखने को मिली है कि सरकार ने केवल अर्थशास्त्रियों पर ही भरोसा नहीं जताया है। नई टीम में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। विज्ञान, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों को नीति आयोग का हिस्सा बनाना यह दिखाता है कि अब विकास को एक अलग नजरिए से देखा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, गोबर्धन दास जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की नियुक्ति यह संकेत देती है कि आने वाले समय में खेती, पर्यावरण और ऊर्जा जैसे विषयों पर विज्ञान आधारित नीतियां बनाई जाएंगी। आज के दौर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्रांति पूरी दुनिया को बदल रही है, तब नीति आयोग में तकनीक के जानकारों का होना बहुत जरूरी हो गया था।
चुनौतियों के सामना की कवायद
यह बदलाव एक ऐसे समय में किया गया है जब दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या मध्य पूर्व में जारी तनाव, इन सबका असर भारत की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें और वैश्विक व्यापार में आने वाली रुकावटें देश के विकास की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। ऐसे में अशोक लाहिड़ी और उनकी नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे कैसे भारतीय अर्थव्यवस्था को इन बाहरी झटकों से सुरक्षित रखें। सरकार को उम्मीद है कि लाहिड़ी का वैश्विक अनुभव भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से खड़ा करने और देश के भीतर एक स्थिर आर्थिक वातावरण तैयार करने में मदद करेगा।
राज्यों के साथ समन्वय पर जोर
नीति आयोग की एक अहम जिम्मेदारी केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बनाना भी है। भारत जैसे बड़े देश में विकास के लिए राज्यों की भागीदारी बहुत जरूरी होती है।
नई टीम से उम्मीद है कि वह राज्यों के साथ संवाद को और बेहतर बनाएगी और उनकी जरूरतों के अनुसार नीतियां तैयार करेगी।
इससे विकास योजनाओं का असर जमीन पर ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकेगा।
प्राथमिकता में “विकसित भारत 2047”
सरकार ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीति आयोग को प्रमुख भूमिका दी गई है।इसके तहत आर्थिक विकास को तेज करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, उद्योग और तकनीक को मजबूत करना, और सामाजिक विकास सुनिश्चित करना शामिल है।नई टीम से उम्मीद की जा रही है कि वह इन सभी क्षेत्रों में ठोस और व्यावहारिक सुझाव देगी, जिससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके।
कुल मिलाकर देखें तो नीति आयोग का यह पुनर्गठन एक नई शुरुआत की ओर इशारा करता है। अशोक लाहिड़ी के नेतृत्व में एक संतुलित और विशेषज्ञ टीम का गठन यह उम्मीद जगाता है कि आने वाले वर्षों में भारत की नीतियां अधिक प्रभावी और दूरदर्शी होंगी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस पर होंगी कि यह नया ‘थिंक टैंक’ भारत को 2047 के गौरवशाली लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए कौन से नए रास्ते तलाशता है। देश के विकास की गाड़ी को नई रफ्तार देने के लिए अब मंच तैयार है।







