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Australia v England एशेज 2025-26 | चौथा टेस्ट, एमसीजी गेंदबाज़ों का राज, बल्लेबाज़ों की परीक्षा: एशेज का सबसे उग्र मुकाबला

Australia v England एशेज 2025-26
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 27, 2025 3:12 अपराह्न
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मेलबर्न । एशेज 2025-26 का चौथा टेस्ट मैच केवल एक मुकाबला नहीं, बल्कि आधुनिक टेस्ट क्रिकेट की सोच और संतुलन पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले जा रहे इस बॉक्सिंग-डे टेस्ट में जिस तरह पहले ही दिन 20 विकेट गिरे, उसने दर्शकों को रोमांचित भी किया और विशेषज्ञों को चिंतित भी। 

मैच का मिज़ाज: बल्लेबाज़ी नहीं विकेट का बचाव 

इस टेस्ट में रन बनाना नहीं, विकेट बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 152 और इंग्लैंड की 110 रनों पर सिमटना इस बात का प्रमाण है कि पिच ने शुरुआत से ही गेंदबाज़ों को हावी रहने का न्योता दिया। 

जहाँ एक ओर इंग्लैंड के जोश टंग ने धारदार गेंदबाज़ी से पांच विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ी की पोल खोली, वहीं दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई तेज़ तिकड़ी — स्टार्क, बोलांड और नेसर — ने इंग्लैंड को टिकने तक का मौका नहीं दिया। 

पिच: रोमांच या असंतुलन? 

MCG की इस पिच को लेकर बहस तेज़ हो गई है। सवाल यह नहीं कि विकेट गिर रहे हैं, बल्कि यह कि क्या बल्लेबाज़ों को खुद को साबित करने का पर्याप्त मौका मिल रहा है?

विश्लेषकों की मानें तो पिच पर घास, नमी और सीम मूवमेंट का मेल इतना तीखा रहा कि तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज़ भी असहाय दिखे। यह रोमांचक जरूर है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट की “पाँच दिन की परीक्षा” वाली आत्मा पर चोट करता प्रतीत होता है। 

कप्तानी रणनीति का असर 

बेन स्टोक्स का टॉस जीतकर गेंदबाज़ी का फैसला पूरी तरह तार्किक था, लेकिन दूसरी पारी में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ उसी जाल में फँस गए जिसे उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए बिछाया था।

वहीं ऑस्ट्रेलिया ने घरेलू हालात और पिच की प्रकृति को बेहतर ढंग से पढ़ते हुए लाइन-लेंथ में निरंतरता दिखाई — यही दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर साबित हुआ। 

इंग्लैंड की चिंता, ऑस्ट्रेलिया का आत्मविश्वास 

सीरीज़ में पहले से आगे चल रही ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए यह टेस्ट मनोवैज्ञानिक बढ़त और मजबूत करता दिख रहा है। दूसरी ओर इंग्लैंड के लिए यह मुकाबला सिर्फ हार-जीत का नहीं, बल्कि अपनी बल्लेबाज़ी की दिशा और टेस्ट रणनीति पर आत्ममंथन का संकेत है।

‘बैज़बॉल’ की आक्रामक सोच ऐसी परिस्थितियों में कितनी कारगर है, यह सवाल अब और गहराता जा रहा है।

आगे क्या तय करेगा नतीजा? 

दूसरी पारी में जो भी टीम 200 के आसपास पहुँच पाई, वही निर्णायक बढ़त ले सकती है। बल्लेबाज़ों के लिए संयम और समय बिताना ही सफलता की कुंजी होगी। तेज़ गेंदबाज़ों के कार्यभार और चोट का खतरा भी मैच की दिशा बदल सकता है। 

करीब एक लाख दर्शकों की मौजूदगी में यह टेस्ट भले ही रनों का त्यौहार न रहा हो, लेकिन हर गेंद पर नतीजे की आहट ने इसे यादगार बना दिया है। यह मैच याद दिलाता है कि टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती सिर्फ चौकों-छक्कों में नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और रणनीति में भी छिपी है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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