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शपथ ग्रहण में शामिल होगें ओम बिडला तारिक रहमान आज लेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ दो दशक बाद सत्ता में लौटी BNP

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ दो दशक बाद सत्ता में लौटी BNP
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 17, 2026 8:02 अपराह्न
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डेलीबार्ता,ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में मंगलवार, 17 फरवरी का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। हाल ही में हुए आम चुनावों में BNP को मिली प्रचंड जीत ने न केवल सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ किया है, बल्कि दक्षिण एशिया की कूटनीति और क्षेत्रीय राजनीति में भी नए समीकरणों की शुरुआत के संकेत दे दिए हैं।

करीब दो दशक बाद BNP की सत्ता में वापसी को बांग्लादेश की राजनीति का बड़ा मोड़ माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह सिर्फ सरकार बदलने की घटना नहीं, बल्कि देश की नीतियों, विदेश संबंधों और आंतरिक राजनीतिक संतुलन में संभावित बदलाव का संकेत भी है।

ऐतिहासिक स्थल पर होगा शपथ ग्रहण समारोह

इस बार शपथ ग्रहण समारोह परंपरा से अलग अंदाज में आयोजित किया जा रहा है। अब तक बांग्लादेश में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ के दरबार हॉल में शपथ दिलाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार समारोह जातीय संसद (राष्ट्रीय संसद) के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा।

बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी ‘BSS’ के अनुसार राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन दोपहर में नए प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे। खुले परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक माना जा रहा है, जिसे लोकतांत्रिक जनादेश का सार्वजनिक प्रदर्शन भी कहा जा रहा है।

चुनाव में BNP की ऐतिहासिक जीत

12 फरवरी को हुए आम चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 297 में से 209 सीटें जीत लीं। यह आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत से भी अधिक है, जिससे नई सरकार को मजबूत राजनीतिक स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव मैदान में नहीं थी। चुनावी प्रतिबंध और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक मुकाबले का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि BNP की जीत कई कारणों का परिणाम है —

  • सत्ता परिवर्तन की जनभावना
  • आर्थिक चुनौतियों को लेकर जनता की नाराजगी
  • विपक्षी दलों का रणनीतिक एकजुटता
  • ग्रामीण और शहरी वोट बैंक का संतुलित समर्थन
  • जमात-ए-इस्लामी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

इस चुनाव में एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। कट्टरपंथी मानी जाने वाली जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतकर इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और संसद में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

बांग्लादेश की आजादी के बाद से यह पहली बार है जब इस पार्टी ने इतना बड़ा जनादेश हासिल किया है। इससे देश की संसद में वैचारिक संतुलन और राजनीतिक बहसों का नया दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

संसदीय दल की बैठक में औपचारिक चयन

शपथ ग्रहण से पहले BNP ने संसदीय दल का नेता चुनने के लिए संसद भवन में बैठक बुलाई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि बहुमत हासिल करने वाली पार्टी के चेयरमैन होने के नाते तारिक रहमान को सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री चुना गया।

BNP की स्टैंडिंग कमेटी के नेताओं ने इसे “जनता के विश्वास की जीत” बताया। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि नई सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और राजनीतिक संवाद को बढ़ावा देने पर जोर देगी।

राजनीतिक विरोधियों से मुलाकात का संदेश

चुनाव जीतने के बाद तारिक रहमान ने जो कदम उठाया, उसने राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान खींचा। उन्होंने विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर राजनीतिक सौहार्द का संदेश दिया।

उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान और नेशनल सिटिजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम से मुलाकात कर सहयोगात्मक राजनीति का संकेत दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम नई सरकार की संभावित “समावेशी राजनीति” की ओर इशारा करता है, जिससे लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक कटुता कम हो सकती है।

भारत की मौजूदगी,ओम बिड़ला करेंगे प्रतिनिधित्व

शपथ ग्रहण समारोह में भारत की भागीदारी भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था, हालांकि वे इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे।

भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला करेंगे। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम में उनकी भागीदारी दोनों देशों के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है।

यह कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद भारत-बांग्लादेश संबंधों में निरंतरता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

दिल्ली-ढाका रिश्तों पर सबकी नजर

तारिक रहमान की सरकार बनने के साथ सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों की दिशा क्या होगी।

अब तक भारत के साथ मजबूत संबंधों के लिए अवामी लीग की सरकार जानी जाती रही है। ऐसे में BNP के सत्ता में आने के बाद विदेश नीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।

हालांकि BNP नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भारत के साथ संबंध सकारात्मक और सहयोगपूर्ण रहेंगे।

BNP का बयान,रिश्ते एक मुद्दे के बंधक नहीं

BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम ने कहा है कि उनकी पार्टी भारत के साथ बेहतर संबंध चाहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी द्विपक्षीय संबंधों में बाधा नहीं बनेगी।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध व्यापार, निवेश, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे व्यापक मुद्दों पर आधारित हैं और इन्हें किसी एक राजनीतिक विवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

यह बयान भारत के लिए आश्वस्त करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी आई है।

व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर रहेगा फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि नई BNP सरकार आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दे सकती है। भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही मजबूत व्यापारिक संबंध हैं, जिनमें ऊर्जा आपूर्ति, रेल-सड़क संपर्क और सीमा व्यापार शामिल हैं।

संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

  • सीमा पार व्यापार और लॉजिस्टिक्स
  • ऊर्जा और बिजली परियोजनाएं
  • नदी जल प्रबंधन
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी कॉरिडोर
  • सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग

नई सरकार के लिए आर्थिक स्थिरता सबसे बड़ी चुनौती होगी, इसलिए भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ संबंध मजबूत रखना रणनीतिक रूप से जरूरी माना जा रहा है।

घरेलू चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि BNP को भारी जनादेश मिला है, लेकिन नई सरकार के सामने कई चुनौतियां भी खड़ी हैं —

  • आर्थिक दबाव और महंगाई
  • रोजगार सृजन
  • राजनीतिक ध्रुवीकरण
  • विपक्ष को साथ लेकर चलने की चुनौती
  • अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास बनाए रखना

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शुरुआती 100 दिन सरकार की दिशा तय करेंगे।

दक्षिण एशिया की राजनीति में नया अध्याय

तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ सकता है। भारत, चीन और पश्चिमी देशों की नजर अब नई सरकार की विदेश नीति पर रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि BNP संतुलित कूटनीति अपनाती है, तो क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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