केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने व्यापक सुधार का भरोसा दिलाया-नई दिल्ली।भारतीय खेलों को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने के दावों के बीच देश की खेल प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर एक बार फिर सामने आ गई है। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और पूर्व सांसद अभिनव बिंद्रा के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में भारतीय खेल प्रशासन की गंभीर कमियों, संरचनात्मक कमजोरियों और पारदर्शिता के अभाव को उजागर किया है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद खेल मंत्रालय में हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने न सिर्फ रिपोर्ट को गंभीरता से लेने की बात कही है, बल्कि खेल प्रशासन में व्यापक और समयबद्ध सुधार का आश्वासन भी दिया है।
टास्क फोर्स का गठन और उद्देश्य
सरकार द्वारा गठित यह टास्क फोर्स भारतीय खेल व्यवस्था की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने, अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करने और भविष्य के लिए ठोस सुधारात्मक सुझाव देने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
अभिनव बिंद्रा जैसे अनुभवी खिलाड़ी को इसका नेतृत्व सौंपा जाना इस बात का संकेत था कि सरकार खिलाड़ियों के नजरिए से समस्याओं को समझना चाहती है। टास्क फोर्स में खेल प्रशासक, पूर्व खिलाड़ी, नीति विशेषज्ञ और कानूनी सलाहकार शामिल थे।
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रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
टास्क फोर्स की रिपोर्ट में कई ऐसे मुद्दे सामने आए हैं जो वर्षों से भारतीय खेल प्रणाली को कमजोर करते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार:
- शासन और जवाबदेही की कमी – कई राष्ट्रीय खेल महासंघों में एक ही व्यक्ति लंबे समय से पदों पर बना हुआ है। इससे नई सोच, पेशेवर प्रबंधन और पारदर्शिता प्रभावित हुई है।
- खिलाड़ी-केंद्रित प्रणाली का अभाव – फैसले अक्सर खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखे बिना लिए जाते हैं। चयन, प्रशिक्षण और सुविधाओं में असमानता बनी रहती है।
- पेशेवर प्रबंधन की कमी – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां खेल संगठनों का संचालन पेशेवर सीईओ और विशेषज्ञ करते हैं, वहीं भारत में अधिकांश संघ अभी भी पारंपरिक और गैर-पेशेवर तरीके से चल रहे हैं।
- वित्तीय पारदर्शिता का संकट – फंडिंग, प्रायोजन और सरकारी अनुदान के उपयोग में स्पष्टता नहीं है। कई बार संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता।
- राज्य और केंद्र के बीच तालमेल की कमी – जमीनी स्तर पर प्रतिभा पहचान और विकास के लिए राज्यों और राष्ट्रीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।
ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर असर
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक खामियों का सीधा असर भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर पड़ता है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को समय पर समर्थन, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती नहीं मिल पाती।
इसके बावजूद भारत का ओलंपिक और एशियाई खेलों में प्रदर्शन बेहतर हुआ है, जिसे रिपोर्ट ने खिलाड़ियों की व्यक्तिगत मेहनत और कुछ योजनाओं का परिणाम बताया है, न कि मजबूत प्रशासनिक ढांचे का।
मांडविया का आश्वासन: अब बदलाव होगा
रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने स्पष्ट कहा कि सरकार इस दस्तावेज को “आलोचना” के रूप में नहीं, बल्कि “सुधार के अवसर” के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा,
“भारतीय खेलों का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इसके लिए प्रशासनिक सुधार अनिवार्य हैं। बिंद्रा टास्क फोर्स की सिफारिशों पर गंभीरता से काम किया जाएगा और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी।”
मांडविया ने संकेत दिए कि नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस कोड को और सख्त किया जा सकता है, ताकि पदों की अवधि, आयु सीमा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो। इसके साथ ही खेल महासंघों में पेशेवर सीईओ और स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति पर भी विचार किया जा रहा है।
खिलाड़ियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि लंबे समय से वे जिन समस्याओं की बात करते रहे हैं, उन्हें अब आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में इन सिफारिशों को लागू करती है, तो भारत 2032 और 2036 ओलंपिक में कहीं अधिक मजबूत दावेदार बन सकता है।
क्या होगा आगे
बिंद्रा टास्क फोर्स की रिपोर्ट केवल कमियां गिनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्पष्ट रोडमैप भी सुझाया गया है। इसमें डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, एथलीट वेलफेयर सेल, स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र और प्रदर्शन आधारित फंडिंग जैसे सुझाव शामिल हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और खेल महासंघ इन सिफारिशों को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं। यदि वादे जमीन पर उतरते हैं, तो यह रिपोर्ट भारतीय खेल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
भारतीय खेल प्रशासन लंबे समय से सुधार की मांग कर रहा था। अभिनव बिंद्रा के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स की रिपोर्ट ने न सिर्फ समस्याओं को उजागर किया है, बल्कि समाधान का रास्ता भी दिखाया है। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया का सुधार का भरोसा उम्मीद जगाता है। अब जरूरत है राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त क्रियान्वयन और खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर निर्णय लेने की। तभी भारत सच मायनों में एक वैश्विक खेल महाशक्ति बन सकेगा।







