राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सितंबर में आयोजित BRICS सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है। यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह आयोजन 2 दिनों तक चलेगा। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नेता शामिल होंगे। BRICS में अभी 11 देश सदस्य के रूप में हैं। 12 और 13 सितंबर को विश्व के कई शीर्ष नेता शामिल होंगे।
चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग आखिरी बार साल 2019 में भारत आए थे। उसके बाद भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ता ही गया। अब देशवासियों को उम्मीद है कि जब जिनपिंग भारत आयेंगे तो कई सार्थक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच वार्ता होगी। रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भी भारत आना विशेष माना जा रहा है। दोनों देश अपने देशों के आयात निर्यात मुद्दे पर बात कर सकते है। सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रक्षा के क्षेत्र में होने वाला है। भारत कई दशकों से रूस से रक्षा उपकरण खरीदते आया है। ऐसे में रुसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत आना काफी अहम माना जा रहा है।
रूसी दूतावास ने की पुष्टि
दक्षिण अफ्रीका में मौजूद रूसी दूतावास ने भारत में आयोजित BRICS सम्मेलन में रुसी राष्ट्रपति पुतिन के शामिल होने की खबर की पुष्टि की। रूसी दूतावास ने कहा कि भारत ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को BRICS सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भेजा है। पुतिन को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अच्छा दोस्त माना जाता है। दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्ष को विश्व के कई मंचों पर साथ देखा जाता हैं। ऐसे ने उम्मीद है कि जब भारत में आयोजित BRICS सम्मेलन में पुतिन आयेंगे तो कई सार्थक पहलुओं पर दोनों देशों के बीच चर्चा होगी। भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है। जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ था तब रूस द्वारा दिए गए S 24 की सहायता से ही भारत ने पाकिस्तान की मिसाइलों को एंटीसेप्ट कर मार गिराया था। तब भारत के देशवासी रूसी राष्ट्रपति पुतिन के मुरीद हुए थे।
read more :
- भारत-इटली मैत्री का नया अध्याय
- प्रधानमंत्री मोदी के नॉर्वे दौरे से भारत–नॉर्डिक रिश्तों को नई रफ्तार
BRICS के सदस्य
BRICS सम्मेलन हर बार अलग अलग देशों में आयोजित होता है। इस बार यह विशेष मौका भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को मिला है। BRICS सम्मेलन के सदस्य अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए एक मंच पर साथ आते हैं। सभी 11 सदस्य दुनिया में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए एक मंच पर साथ आते हैं। इस सम्मेलन में ऐसे नेता भी शामिल होते हैं जिन देशों की अर्थव्यवस्था अच्छी नहीं है। भारत ऐसे देशों के नेताओं का स्वागत करती है और उनसे अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने की योजनाएँ बनाती है। अभी वर्तमान में BRICS के 11 सदस्य हैं। यह सदस्य है–
- ब्राज़ील
- चाइना
- इजिप्ट
- इथोपिया
- इंडिया
- इंडोनेशिया
- ईरान
- सऊदी अरब
- रूस
- साउथ अफ्रीका
- संयुक्त अरब अमीरात
पुतिन की चीन यात्रा
रूसी राष्ट्रपति पुतिन मंगलवार से चीन के 2 दिवसीय दौरे पर है। यह दौरा इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि ठीक 1 हफ्ते पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन दौरा करके अमेरिका वापस गए थे। दुनिया गवाह है कि अमेरिका की रूस के साथ कभी नहीं बनी। अमेरिका और चीन लगातार रूस के विरुद्ध खड़े रहे है। तीनों देश अपने आप को सैन्य शक्ति का बॉस मानते है। भारत अभी विकसित राष्ट्र बनने की कोशिश में जुटा है। इसलिए अभी वह किसी भी देश से दुश्मनी मोड़ नहीं लेना चाहता। भारत के लिए चीन, अमेरिका और रूस तीनों ही देश महत्वपूर्ण है। चीन जहां भारत के लिए व्यापार का काम करता है तो वही रूस भारत के लिए रक्षा के क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी है। अमेरिका से भी लाखों करोड़ों का व्यापार भारत करता है।
BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग एक प्लेटफॉर्म पर साथ आ रहे हैं। भारत 11 देशों की मेजबानी दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन में करेगा। भारत चीन और रुस से अलग अलग वार्ता करेगा जहां चीन से सीमा विवाद सुलझाने और रूस से रक्षा व्यापार बढ़ाने पर बात हो सकती है। ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान भी शमिल होगा तब यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि पुतिन और जिनपिंग ईरान से कैसे डील करते है। ईरान अभी युद्ध संकट से गुजर रहा है। ऐसे में ईरान से होर्मुज की खाड़ी में ढील देने की भी बात हो सकती है।







