व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

चैत्र नवरात्रि गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत 2083 –  भारतीय नववर्ष का भव्य शंखनाद PM मोदी ने दी देशवासियों को बधाई

चैत्र नवरात्रि गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत 2083
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 19, 2026 5:50 अपराह्न
Follow Us:

​भारत भूमि उत्सवों की भूमि है जहाँ हर ऋतु परिवर्तन अपने साथ एक गहरा आध्यात्मिक संदेश लेकर आता है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा केवल कैलेंडर की तारीख बदलना नहीं है बल्कि यह प्रकृति के पुनर्जन्म का उत्सव है। इस वर्ष विक्रम संवत 2083 का पदार्पण हो रहा है जो भारतीय गौरव और गणना की सटीकता का प्रमाण है। देशभर में गूँजते मंत्र, मंदिरों में उमड़ती भीड़ और घरों के बाहर फहराती ‘गुड़ी’ इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी जड़ें कितनी गहरी हैं।

​ विक्रम संवत 2083 – गौरवशाली इतिहास और वैज्ञानिक आधार

​हिंदू नववर्ष जिसे ‘नव संवत्सर’ भी कहा जाता है राजा विक्रमादित्य के काल से शुरू हुआ था। यह केवल एक धार्मिक तिथि नहीं बल्कि पूर्णतः वैज्ञानिक गणना है।

  • खगोलीय महत्व –  यह वह समय है जब पृथ्वी सूर्य का एक चक्र पूरा करने की दिशा में एक नए पड़ाव पर होती है। दिन और रात बराबर होने लगते हैं और वसंत का आगमन पूर्णता पर होता है।
  • सृष्टि का आरंभ –  ब्रह्मा पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना शुरू की थी।
  • 2083 का महत्व –  इस वर्ष का राजा और मंत्री कौन होगा इसका निर्णय ग्रहों की स्थिति से होता है जो आने वाले साल की वर्षा, कृषि और अर्थव्यवस्था का संकेत देते हैं।

read also: महावीर जयंती – अहिंसा और सत्य के अग्रदूत भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव

​चैत्र नवरात्रि –  शक्ति की भक्ति और नौ रूपों का वैभव

​चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष का प्रारंभ होता है। यह नौ दिन आत्मशुद्धि, उपवास और संकल्प के होते हैं।

​नौ देवियों की महिमा

  • माँ शैलपुत्री –  हिमालय की पुत्री, जो स्थिरता का प्रतीक हैं।
  • माँ ब्रह्मचारिणी – तपस्या और सदाचार की देवी।
  • माँ चंद्रघंटा –  साहस और शांति का संगम।
  • माँ कुष्मांडा –  ब्रह्मांड की आदि-शक्ति।
  • माँ स्कंदमाता –  वात्सल्य और ज्ञान की दात्री।
  • माँ कात्यायनी –  बुराई का विनाश करने वाली योद्धा।
  • माँ कालरात्रि – अज्ञानता के अंधकार को मिटाने वाली।
  • माँ महागौरी –  पवित्रता और करुणा की मूर्ति।
  • माँ सिद्धिदात्री-  सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली।

देशभर के शक्तिपीठों का हाल

प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है। कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर के खीर भवानी तक और असम के कामाख्या देवी से लेकर गुजरात के अंबाजी मंदिर तक भक्तों की किलोमीटर लंबी कतारें लगी हैं। सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

​ महाराष्ट्र का गौरव –  गुड़ी पड़वा की धूम

​महाराष्ट्र में नववर्ष को ‘गुड़ी पड़वा’ के रूप में अत्यंत उत्साह से मनाया जाता है।

  • गुड़ी का अर्थ –  बांस की डंडी पर रेशमी कपड़ा, नीम की पत्तियां, गाठी (चीनी की माला) और ऊपर तांबे या चांदी का लोटा रखकर ‘गुड़ी’ सजाई जाती है। यह विजय का प्रतीक (विजय पताका) माना जाता है।
  • शोभा यात्राएं – मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में भव्य ‘स्वगत यात्रा’ निकाली जाती है, जहाँ पारंपरिक नौवारी साड़ी पहने महिलाएं बुलेट चलाती हैं और लेजिम नृत्य करती हैं।
  • प्रसाद का विज्ञान –  इस दिन नीम की पत्तियों और गुड़ का मिश्रण खिलाया जाता है, जो आयुर्वेद के अनुसार रक्त शुद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करता है।

​प्रधानमंत्री का संदेश और विविध राज्यों के क्षेत्रीय त्योहार

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल हिंदू नववर्ष बल्कि भारत की ‘विविधता में एकता’ को रेखांकित करते हुए विभिन्न राज्यों के त्योहारों की बधाई दी-

राज्यत्योहार का नामविशेषता
आंध्र प्रदेश & तेलंगानाउगादिपचड़ी (छह स्वादों का मिश्रण) का वितरण।
कर्नाटकयुगादिनए युग का प्रारंभ।
सिंधी समाजचेटी चंडभगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव।
मणिपुरसजीबू नोंगमा पानबापारंपरिक भोज और पूजा।
कश्मीरनवरहेकश्मीरी पंडितों का नववर्ष।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ये त्योहार हमारे समाज में आपसी प्रेम और सद्भाव के बंधन को मजबूत करते हैं।

​सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य

​आज का नववर्ष केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल युग में भी अपनी पहचान बनाए हुए है

  • सोशल मीडिया का प्रभाव –  “Happy Hindu New Year” और “Vikram Samvat 2083” सुबह से ही ट्रेंड कर रहे हैं। युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व बढ़ा है।
  • आर्थिक गतिविधियां –  इस अवसर पर सोने की खरीदारी नए वाहनों की डिलीवरी और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा रहे हैं जिससे बाजार में भारी रौनक है।

read also : कामदा एकादशी 29 मार्च 2026

​ आध्यात्मिक गहराई –  क्यों मनाएं यह उत्सव?

​यह समय आत्म-निरीक्षण का है। जैसे प्रकृति पुराने पत्तों को त्याग कर नए पल्लव धारण करती है वैसे ही मनुष्य को अपने भीतर की नकारात्मकता त्याग कर नई ऊर्जा का संचार करना चाहिए। नवरात्रि के नौ दिन के व्रत वैज्ञानिक रूप से शरीर को डिटॉक्स (विषहरण) करने का काम करते हैं।

​ संवत 2083 का संकल्प

​विक्रम संवत 2083 हमारे लिए संकल्पों का वर्ष है। जहाँ एक ओर हम तकनीकी रूप से विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर हमारी सांस्कृतिक विरासत हमें जमीन से जोड़े रखती है। प्रधानमंत्री की बधाई और देशभर का यह उल्लास बताता है कि भारत अपनी विरासत पर गर्व करते हुए विकास की ओर अग्रसर है।

“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।”

इस नववर्ष में हम सभी के स्वास्थ्य और समृद्धि की मंगल कामना करते हैं।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment