पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य 285 लोगों के खिलाफ आरोप तय –कोर्ट ने 21 जनवरी को निर्धारित की निष्पक्ष सुनवाई –पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके सहयोगियों पर चल रहे देशद्रोह के मुकदमों और बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर यह एक विस्तृत रिपोर्ट है।
बांग्लादेश सत्ता परिवर्तन और शेख हसीना पर देशद्रोह के आरोप
बांग्लादेश के इतिहास में साल 2024 एक बड़े राजनीतिक भूकंप के रूप में दर्ज किया गया है। 15 साल तक निर्बाध शासन करने वाली शेख हसीना को न केवल प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा बल्कि उन्हें देश छोड़कर शरण लेनी पड़ी।
वर्तमान में उन पर और उनके सहयोगियों पर देशद्रोह सामूहिक हत्या और मानवता के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आरोप हैं।
पौष पूर्णिमा के दिन प्रयागराज में माघ मेले का पहले स्नान
कब और कैसे हुआ तख्तापलट
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की परिणति 5 अगस्त 2024 को हुई।
- तारीख – 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया।
- पलायन – इस्तीफे के तुरंत बाद वे सैन्य हेलीकॉप्टर से भारत आ गईं।
- कारण – ढाका में लाखों प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री आवास ‘गणभवन’ को घेर लिया था। सेना ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने से इनकार कर दिया जिसके बाद हसीना के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा|
आंदोलन का स्वरूप
‘छात्र शक्ति’ का उदय-यह आंदोलन किसी विपक्षी राजनीतिक दल द्वारा नहीं बल्कि साधारण छात्रों द्वारा शुरू किया गया था।
कोटा विरोधी आंदोलन –जून 2024 में हाई कोर्ट द्वारा सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण (मुक्तिवाहिनी के वंशजों के लिए) को बहाल करने के फैसले के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरे।
भेदभाव का आरोप-छात्रों का तर्क था कि यह कोटा मेधावी छात्रों के साथ अन्याय है और केवल हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ के समर्थकों को लाभ पहुँचाने के लिए है।
असहयोग आंदोलन-जुलाई के अंत तक पुलिसिया कार्रवाई में सैकड़ों छात्रों की मौत के बाद यह आंदोलन ‘एक सूत्री मांग’ (One-Point Demand) में बदल गया शेख हसीना का इस्तीफा।
भारत वापस लौटे भगवान बुद्ध के अवशेष की प्रदर्शनी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन
क्यों और किस कारण लगे आरोप
शेख हसीना और उनके 285 सहयोगियों जिनमें पूर्व मंत्री अवामी लीग के नेता और सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं पर आरोपों के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
अत्यधिक बल प्रयोग – आंदोलन के दौरान लगभग 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस और ‘छात्र लीग’ को प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया।
न्यायेतर हत्याएं (Extrajudicial Killings)– उनके शासनकाल के दौरान ‘आयनाघर’ (गुप्त जेलों) में विरोधियों को गायब करने और मारने के आरोप हैं।
देशद्रोह (Sedition) – वर्तमान सरकार और अदालतों का मानना है कि उन्होंने संविधान का उल्लंघन किया चुनाव में धांधली की और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट किया।
किसके द्वारा लगाए गए आरोप
ये आरोप मुख्य रूप से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की देखरेख में दर्ज किए गए हैं।
- सरकार के अंतरिम प्रमुख – डॉ. मुहम्मद यूनुस नोबेल पुरस्कार विजेता ।
- अभियोजन पक्ष – अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) और स्थानीय अदालतों में विभिन्न मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं।
अदालती कार्यवाही और 21 जनवरी की सुनवाई
बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने शेख हसीना और अन्य के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने और सुनवाई के लिए 21 जनवरी 2026 की तारीख निर्धारित की है।
पिछली सुनवाई – इससे पहले अक्टूबर और नवंबर 2025 में प्रारंभिक सुनवाई हुई थी जिसमें अदालत ने शेख हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
वर्तमान स्थिति – चूंकि शेख हसीना वर्तमान में बांग्लादेश में मौजूद नहीं हैं इसलिए उनके खिलाफ ‘इन एब्सेंटिया’ अनुपस्थिति में सुनवाई शुरू करने की तैयारी है।
बांग्लादेश सरकार ने इंटरपोल के माध्यम से शेख हसीना की गिरफ्तारी के लिए रेड नोटिस भी जारी करवाया है।







