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नए साल की शुरुआत में थिएटर्स में आई धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म “इक्कीस”

नए साल की शुरुआत में थिएटर्स में आई धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म “इक्कीस”
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 2, 2026 7:28 अपराह्न
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थिएटर्स में आई धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म “इक्कीस”1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए 21 साल के जांबाज अरुण खेत्रपाल की कहानी । नए साल की शुरुआत और भारतीय सिनेमा के लिए साल 2026 का आगाज एक बेहद भावुक और गौरवशाली फिल्म ‘इक्कीस’ (Ikkis) के साथ हुआ है। यह फिल्म न केवल 1971 के युद्ध के महानायक सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीरता की गाथा है बल्कि यह हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र की आखिरी ऑन-स्क्रीन उपस्थिति भी है।

​श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी यह फिल्म भावनाओं राष्ट्रवाद और सिनेमाई उत्कृष्टता का एक अनूठा संगम है। आइए इस फिल्म से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

 21 साल का वो जांबाज ‘इक्कीस’ 

​फिल्म का नाम ‘इक्कीस’ दो वजहों से बेहद खास है। पहला यह फिल्म साल 2026 की पहली बड़ी रिलीज है और दूसरा यह उस जांबाज सैनिक की कहानी है जिसने मात्र 21 साल की उम्र में देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान हुई ‘बसंतर की लड़ाई’ (Battle of Basantar) पर आधारित है। कहानी के केंद्र में हैं- अरुण खेत्रपाल (अगस्त्य नंदा)जो पूना हॉर्स रेजिमेंट के एक युवा ऑफिसर हैं। जब पाकिस्तानी सेना ने टैंकों के साथ भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की तब अरुण ने अपने टैंक ‘फामागस्टा’ के साथ दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए। 

थिएटर्स में आई धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म “इक्कीस”

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे गंभीर रूप से घायल होने और टैंक में आग लगने के बावजूद अरुण ने पीछे हटने से मना कर दिया और अकेले ही दुश्मन के कई टैंकों को तबाह कर दिया।

फिल्म की रूह- धर्मेंद्र जी का किरदार

​बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के लिए यह फिल्म उनके करियर का ‘स्वर्ण युग’ समापन है। फिल्म में उनका रोल कोई कैमियो नहीं बल्कि कहानी का एक महत्वपूर्ण भावनात्मक हिस्सा है।

  • किरदार का नाम- धर्मेंद्र ने फिल्म में अरुण खेत्रपाल के पिता ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल का किरदार निभाया है।
  • ​महत्व-  फिल्म की कहानी वर्तमान और अतीत के बीच चलती है। साल 2000 के दौर में बुजुर्ग एम.एल. खेत्रपाल (धर्मेंद्र) पाकिस्तान की यात्रा पर जाते हैं जहाँ उनकी मुलाकात उस पाकिस्तानी अफसर (जयदीप अहलावत) से होती है जिसका सामना युद्ध के मैदान में उनके बेटे से हुआ था।
  • अंतिम फिल्म- धर्मेंद्र जी का साल 2025 के अंत में निधन हो गया जिसके चलते यह उनकी आखिरी फिल्म (Posthumous Release) बन गई है। पर्दे पर उन्हें देखकर दर्शक भावुक हो रहे हैं खासकर फिल्म के आखिरी 20 मिनट में उनके अभिनय ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।

​फिल्म के  मुख्य कलाकार और उनके रोल

​फिल्म ‘इक्कीस’ की कास्टिंग इस युद्ध ड्रामा को और भी प्रभावशाली बनाती है- 

  • अगस्त्य नंदा सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल अमिताभ बच्चन के नाती का डेब्यू मुख्य भूमिका।
  • धर्मेंद्र ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल अरुण के पिता फिल्म की भावनात्मक धुरी।
  • जयदीप अहलावत ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर पाकिस्तानी सेना के अफसर जो युद्ध में अरुण के सामने थे।
  • सिमर भाटिया – अरुण की प्रेमिका (काल्पनिक पात्र) के रूप में डेब्यू।
  • सिल्की खन्ना / राहुल देव सैन्य अधिकारी युद्ध के मैदान के अन्य महत्वपूर्ण कमांडर।

Box Office Report-  पहले दिन की कमाई

​’इक्कीस’ ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से बेहतर शुरुआत की है। हालांकि इसकी टक्कर पहले से चल रही फिल्म ‘धुरंधर’ से थी, लेकिन वर्ड-ऑफ-माउथ (लोगों की तारीफ) ने इसे बढ़त दिलाई।

  • पहले दिन का कलेक्शन-  फिल्म ने भारत में लगभग ₹7.00 करोड़ (Net) की कमाई की है। ट्रेड विशेषज्ञों ने इसकी ओपनिंग ₹2-3 करोड़ की मानी थी लेकिन फिल्म ने उसे दोगुने से ज्यादा कर दिया।
  • ऑक्यूपेंसी- शाम के शोज में सिनेमाघरों में 45-50% तक की भीड़ देखी गई। दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे क्षेत्रों में फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है।

बजट और निर्माण (Budget & Production)

​फिल्म का निर्माण मैडॉक फिल्म्स (Dinesh Vijan) के बैनर तले हुआ है।

​अनुमानित बजट-फिल्म का कुल बजट लगभग ₹100 करोड़ से ₹125 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। (कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे ₹200 करोड़ तक का मेगा प्रोजेक्ट भी कहा गया है जिसमें वीएफएक्स और टैंक वॉर के दृश्यों पर भारी खर्च किया गया है)।

​निर्देशन- श्रीराम राघवन (अंधाधुन फेम) ने पहली बार किसी वॉर ड्रामा का निर्देशन किया है, और उन्होंने युद्ध के शोर के बीच मानवीय संवेदनाओं को बखूबी पिरोया है।

कैसी है फिल्म (रिव्यू और अनुभव)

​फिल्म ‘इक्कीस’ अन्य बॉलीवुड युद्ध फिल्मों की तरह केवल शोर-शराबे वाली नहीं है। यह एक ‘एंटी-वॉर’ फिल्म की तरह महसूस होती है जो शांति का संदेश भी देती है।

  • खास बात-  फिल्म का संगीत (सचिन-जिगर) और रेट्रो गानों का इस्तेमाल कहानी को गहराई देता है।
  • ​परफॉरमेंस-  अगस्त्य नंदा ने अपने पहले ही कदम से साबित किया है कि उनमें अभिनय की विरासत है। जयदीप अहलावत ने एक बार फिर अपनी गंभीरता से दिल जीत लिया है।

​धर्मेंद्र का जादू 

फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट धर्मेंद्र जी की मौजूदगी है। उनके चेहरे की झुर्रियों में छिपी बेटे को खोने की टीस और गर्व फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है।

​’इक्कीस’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि उन शहीदों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने अपनी जवानी देश के नाम कर दी। अगर आप धर्मेंद्र जी के प्रशंसक हैं या भारतीय इतिहास की वीरता देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए एक अनिवार्य अनुभव है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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